देखा था सौवें टेस्ट मैच का सपना: सहवाग

 शुक्रवार, 23 नवंबर, 2012 को 07:19 IST तक के समाचार
वीरेंद्र सहवाग

सहवाग की नज़र में टेस्ट क्रिकेट, असली क्रिकेट है.

भारत के सलामी बल्लेबाज़ वीरेन्द्र सहवाग मुल्तान के सुल्तान, नज़फगढ़ के नवाब, आक्रामक बल्लेबाज़ और वीरू, इन सब नामों और ख़िताबों के साथ जाने जाते हैं.

भारत दौरे पर आई इंग्लैंड़ की क्रिकेट टीम के खिलाफ़ मुंबई में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में उतरने के साथ ही सहवाग के खाते में एक बेहद शानदार उपलब्धि जुड़ गई है.

सहवाग भारत के लिए 100 टेस्ट मैच खेलने वाले नौवें और दुनिया के 54वें बल्लेबाज़ बन गए हैं. सहवाग से पहले ये उपलब्धि भारत के सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड, वीवीएस लक्ष्मण, अनिल कुम्बले, कपिल देव, दिलीप वेंगसरकर, सुनील गावस्कर और सौरभ गांगुली को हासिल हो चुकी है.

20 अक्तूबर 1978 को दिल्ली में जन्मे वीरेन्द्र सहवाग ने अपना पहला टेस्ट मैच दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ 2001 में ब्लोमफोन्टेन में खेला था और शतक भी जड़ा था.

सहवाग अभी तक 99वें टेस्ट मैच में 23 शतक और 32 अर्धशतक के साथ 8,448 रन बना चुके हैं. सहवाग ने इसके अलावा 249 एक-दिवसीय और 19 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले हैं.

अपनी इस उपलब्धि को लेकर सहवाग कहते हैं, ''मेरा पहला सपना देश के लिए खेलना था, उसके बाद मैं 100 टेस्ट मैच खेलने का सपना देखने लगा, मुझे खुशी हैं कि ये क्षण जल्दी आएगा. मेरे लिए यह बड़ा सम्मान है.''

जुदा अंदाज़

"मेरा पहला सपना देश के लिए खेलना था, उसके बाद मैं 100 टेस्ट मैच खेलने का सपना देखने लगा, मुझे खुशी हैं कि यह क्षण जल्दी आएगा. मेरे लिए यह बडा सम्मान है."

वीरेंद्र सहवाग

सहवाग जिस तरह से अपनी अलग ही तरह की बल्लेबाज़ी की वजह से पूरी दुनिया में जाने जाते है, उसी तरह वो अपने ही अंदाज़ में खेल पत्रकारों के सवालों के जवाब भी देते है.

बातचीत का अवसर मिलने पर जब सहवाग से उनकी यादगार पारियों की बात चली तो उनका कहना था, ''पाकिस्तान के मुल्तान में खेलते हुए जो 309 रन बनाए और जो ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ मेलबर्न में 195 रनों की पारी खेली, वो बहुत ही यादगार हैं. मेलबर्न की पारी इसलिए खास है क्योंकि तब एक मुश्किल टीम और मुश्किल हालात हमारे सामने थे.''

अपने टेस्ट करियर के दौरान यादगार जीत पर सहवाग कहते हैं कि जब पाकिस्तान में पहली बार जीते, तो वो जीत बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन सौरव गांगुली की कप्तानी में जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया को वहीं हराया था, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि भारतीय टीम ऐसा भी कर सकती है.

वे कहते हैं, "हमें क्रिकेट-प्रेमियों का भरोसा मिला कि हम भी कही भी, कभी भी, किसी भी टीम को हरा सकते हैं."

गेंदबाजों के बारे में

"टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है क्योंकि इसमें किसी भी बल्लेबाज़ की काबिलियत का पता चलता है."

वीरेंद्र सहवाग

विरोधी गेंदबाज़ों को सम्मान देने के सवाल पर सहवाग का कहना है कि वैसे तो वो सभी गेंदबाज़ों का सम्मान करते है, लेकिन यह हालात पर भी निर्भर करता है.

वे बताते हैं कि मैकग्रा, ब्रेट ली, शोएब अख्तर और मुरलीधरन को खेलने का अनुभव शानदार रहा.

अपनी आक्रामक शैली के सवाल पर उनका सीधा सा जवाब था कि आक्रामक खिलाडी के लिए ये बेहद आवश्यक है कि टीम उसका साथ दे. अगर आक्रामक खिलाड़ी दो-तीन पारियों में जल्दी भी आउट हो जाए तो उसे भरोसा दिलाना ज़रूरी है कि वो एक पारी ऐसी भी खेल सकता है जो मैच जीता दे.

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में दिल्ली डेयर डेविल्स की कप्तानी कर चुके सहवाग अभी तक की अपनी क्रिकेट यात्रा का श्रेय अपने बचपन के कोच अमरनाथ शर्मा, सतीश शर्मा, जो अब नही रहे और अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने प्रायोजकों और अपनी कंपनी ओएनजीसी को देते है जिसके लिए आज भी वो मौक़ा मिलते ही, खेलते है.

एक दिवसीय क्रिकेट में दोहरा शतक जमा चुके वीरेन्द्र सहवाग की नज़र में टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है क्योंकि इसमें किसी भी बल्लेबाज़ की काबिलियत का पता चलता है.

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