मंत्रालय आरटीआई में तो बीसीसीआई क्यों नहीं?

 गुरुवार, 29 नवंबर, 2012 को 08:36 IST तक के समाचार
 जितेंदर सिंह

आरटीआई के मसले पर सरकार और क्रिकेट बोर्ड में लंबे समय से विवाद है.

बेशक मंत्री बदल गए हों लेकिन युवा मामले और खेल मंत्रालय भारतीय क्रिकेट बोर्ड को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने की कोशिशें जारी रखेगा.

अजय माकन के स्थान पर यह मंत्रालय संभालने वाले जितेंदर सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि खुद उनका मंत्रालय भी आरटीआई के दायरे में आता है. ऐसे में बीसीसीआई की इस बारे में सोच उनकी समझ से परे है.

पूर्व राष्ट्रीय ट्रैप शूटर जितेंदर सिंह ने कहा, "मुझे नहीं मालूम कि बीसीसीआई इस बारे में क्या सोचता है. लेकिन हमारी राय है कि हर संस्था को आरटीआई के दायरे में आना चाहिए. सामरिक महत्व और देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इसकी छूट दी जा सकती है. लेकिन बीसीसीआई का इससे कोई लेना-देना नहीं है. खुद मेरा मंत्रालय भी सूचना के अधिकार के दायरे में आता है."

लंबा विवाद

आरटीआई के मसले पर सरकार और क्रिकेट बोर्ड पिछले लंबे अर्से से एक दूसरे के सामने हैं.

देश की अधिकतर खेल संस्थाओं ने सूचना अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है और कई इसे लागू करने का वादा कर चुकी हैं. लेकिन बीसीसीआई ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.

हालांकि 41 साल के जिंतेंदर सिंह ने साफ किया कि, "हम बीसीसीआई से आरटीआई के दायरे में लाने की गुजारिश करने के अलावा जरुरी कदम उठाना जारी रखेंगे. लेकिन बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाने का काम केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का है. मंत्रालय सीआईसी पर जबरन दबाव नहीं बना सकता."

खेल बिल

"मुझे नहीं मालूम कि बीसीसीआई इस बारे में क्या सोचता है. लेकिन हमारी राय है कि हर संस्था को आरटीआई के दायरे में आना चाहिए."

जितेंदर सिंह

आरटीआई के अलावा प्रस्तावित खेल बिल को लेकर सबसे अधिक दबाव बीसीसीआई के अधिकारियों की तरफ से है.

ये सरकार और विपक्षी पार्टियों से जुड़े हैं क्योंकि इसके कई प्रावधान बोर्ड की कार्यप्रणाली पर व्यापक असर डालेंगे.

मणिशंकर अय्यर, एमएस गिल और अजय माकन की तरह जिंतेदर सिंह के लिए भी इस पर अपने ही साथियों की सहमति सबसे बड़ी चुनौती होगी.

उन्होंने कहा, "मेरी कोशिश सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद बनाने की होगी. यकीनन कई पक्षों की ओर से इसका विरोध है. लेकिन इन सभी को लगातार बातचीत करके उन्हें समझाना होगा कि स्पोर्टस बिल देश और खिलाड़ियों और खेलों के हित में है. संसद का सत्र शुरु हो चुका है और मैं बिल का विरोध कर रहे पक्षों से बातचीत करुगा."

सरकार में बोर्ड अधिकारी

मौजूदा सरकार और विपक्ष में बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों की भरमार है. बड़े नामों में कैबिनेट मंत्री शरद पवार आईसीसी से जुड़े रहे हैं.

बीसीसीआई

बीसीसीआई से देश के कई प्रमुख राजनेता जुड़े हुए हैं

योजना राज्य मंत्री राजीव शुक्ला उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के सचिव होने के अलावा आईपीएल के चेयरमैन भी हैं. फारुख अब्दुला जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघ पर काबिज हैं.

गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात क्रिकेट संघ के भी अध्यक्ष हैं. दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष अरुण जेटली राज्य सभा में विपक्ष के नेता हैं.

आरटीआई और खेल बिल पर इन सभी ने एक होकर पूर्व खेल मंत्रियों को अपनी योजना टालने को मजबूर कर दिया.

जिंतेंदर सिंह ने माना कि यह सब उनके लिए चुनौती होगा लेकिन इस सब में उनकी कोशिश खेलों पर ज़्यादा ध्यान देने की रहेगी.

राजस्थान के लोकसभा सदस्य जिंतेंदर सिंह ने कहा, "मैं कोशिश करुंगा कि युवा खेल को एक पेशे की तरह लें. पिछले कुछ सालों में भारतीय खेलों ने काफी तरक्की की है. इसे आगे बढ़ाने के लिए हम रोडमैप तैयार करेंगे. मेरे मंत्रालय ने इस पर काम करना शुरु कर दिया है. जल्द ही हम एक व्यापक योजना तैयार करेंगे ताकि अगले रिओ ओलंपिक खेलों में भारत और बेहतर प्रदर्शन करे."

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