22 गज पर 100 बवाल

ईडन गार्डन स्टेडियम
Image caption ईडन गार्डन की पिच को लेकर बवाल

परंपरागत तौर पर ईडन गार्डेन स्टेडियम की धीमी पिच को स्पिन गेंदबाज़ों के लिए सहायक बनाने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने पूर्वी क्षेत्र के मैदान और पिच समिति के सदस्य आशीष भौमिक को कोलकाता बुलाया.

कोलकाता पहुंचे आशीष फ़िलहाल मीडिया के सामने मुंह नहीं खोल रहे हैं. मगर उनकी नियुक्ति कुछ विवाद भी लेकर आई है क्योंकि स्पिनरों को मदद करने वाली पिच से जुड़ी भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की माँग से असहमत पुराने क्यूरेटर प्रबीर मुखर्जी को इसी चक्कर में किनारे कर दिया गया.

वैसे मुखर्जी इससे परेशान नहीं हैं और कहते हैं कि ईडन की पिच का चरित्र एक सप्ताह में बदलना मुश्किल है. ईडन की पिच पर विवाद का यह पहला मौक़ा है.

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मुंबई में भारत की करारी हार के बावजूद ईडन में भी टर्निंग यानी स्पिन गेंदबाज़ों को सहायता देने वाली पिच की मांग की थी.

लेकिन क्यूरेटर प्रबीर मुखर्जी ने साफ़ कह दिया है कि यहां मुंबई की तरह पिच बनाना संभव नहीं है.

धोनी बनाम क्यूरेटर

मुखर्जी कहते हैं, ''धोनी को भी यह बात समझनी चाहिए कि ईडन में वानखेड़े जैसी पिच बनाना संभव नहीं है. मुंबई में पिच बनाने में लाल मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यहां काली मिट्टी का इस्तेमाल होता है. दोनों शहरों की आबोहवा भी अलग है. ऐसे में धोनी की यह मांग व्यावहारिक नहीं है.''

पिच पर लगातार बढ़ते विवाद के बीच प्रबीर कहते हैं कि क्रिकेट की दुनिया में ईडन गार्डेन के पिच की अपनी पहचान है.

प्रबीर के अनुसार वो हमेशा उस छवि को ध्यान में रख कर ही पिच बनाते हैं.

मुखर्जी नहीं चाहते कि ख़राब पिच की वजह से ईडन को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का कोपभाजन बनना पड़े.

दूसरी ओर, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल(सीएबी) के संयुक्त सचिव सुजन मुखर्जी कहते हैं, ''आशीष यहां प्रबीर मुखर्जी की सहायता करेंगे. मैदान और पिच समिति के पूर्वी ज़ोन के सदस्य होने के नाते आशीष का यह दौरा एक रूटीन है.''

सीएबी भले ही आशीष के सहायक क्यूरेटर के तौर पर कोलकाता आने की दलील दे, प्रबीर साफ़ कहते हैं, ''अब आशीष ही यहां मेरे बॉस हैं. सीएबी जैसा कहेगा, मैं वैसा ही करूंगा. उनके निर्देश पर ही पिच तैयार होगी.''

मौजूदा घटनाक्रम से नाख़ुश लग रहे प्रबीर कहते हैं कि अब वे अपना काम छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. उनकी उम्र (83 साल) भी हो गई है और शारीरिक स्थिति भी ठीक नहीं है. प्रबीर ईडन में पिछले 14 वर्षों से पिच बनाते रहे हैं.

वैसे, भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और ईडन के पिच क्यूरेटर प्रबीर मुखर्जी के बीच छत्तीस का ही आंकड़ा रहा है.

Image caption ईडन गार्डेन पिच के क्यूरेटर प्रबीर मुखर्जी

पिछले साल 25 अक्तूबर को इंग्लैंड के साथ एक दिवसीय मैच जीतने के बावजूद धोनी ने यहां के विकेट को ख़राब और बदसूरत क़रार दिया था.

धीमी पिच

ईडन में इस साल रणजी ट्रॉफ़ी के दो मैच खेले गए हैं और दोनों ड्रॉ हुए थे. ईडन की पिच धीमी समझी जाती है और यह तीसरे दिन से स्पिनरों की सहायता करती हैं.

लेकिन अब धोनी के बयान और बीसीसीआई के निर्देश के बाद पिच को बदलने की क़वायद भी शुरू हो गई है.

सीएबी के संयुक्त सचिव सुजन मुखर्जी कहते हैं, ''तीसरे टेस्ट के दौरान हम घरेलू मैदान पर खेलने से मिलने वाले लाभ का निश्चित तौर पर ध्यान रखेंगे. यह एक बेहतर विकेट होगा जो पांच दिनों तक बढ़िया खेलेगा.''

टिकटों की बिक्री धीमी

मुंबई में भारतीय टीम की पराजय का ईडन मैच के टिकटों की बिक्री पर काफ़ी असर हुआ है.

सीएबी को उम्मीद है कि उसे इस बार पिछले साल की तरह शर्मनाक हालत का सामना नहीं करना पड़ेगा.

पिछले साल नवंबर में भारत और वेस्ट इंडीज़ के बीच आयोजित टेस्ट मैच के पहले दिन 67 हज़ार क्षमता वाले इस विशाल स्टेडियम में महज़ दस हज़ार दर्शक मौजूद थे. सीएबी को उम्मीद है कि इस बार की तस्वीर बदलेगी.

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