क्रिकेट को अलविदा कह बॉक्सर बने फ्लिंटॉफ

Image caption एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने 2010 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.

इंगलैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एंड्रयू फ्लिंटॉफ अपनी ज़िंदगी की दूसरी पारी शुरु कर चुके हैं. फ्लिंटॉफ की ये दूसरी पारी क्रिकेट के मैदान में नहीं बल्कि मुक्केबाज़ी की रिंग में शुरु हुई है.

मुक्केबाज़ी की रिंग में भी उनकी शानदार एंट्री हुई है. अपने पहले पेशेवर मुक्केबाज़ी मुकाबले में फ्लिंटॉफ ने प्वाइंट्स के आधार पर अमरीका के हेविवेट मुक्केबाज़ रिचर्ड डॉसन को हराया.

हालांकि फ्लिंटॉफ की ये जीत इतनी आसान नहीं रही. 34 वर्षीय फ्लिंटॉफ दूसरे राउंड में नॉकआउट हो गए थे लेकिन चार दौर तक चले मुकाबले में अंत में प्वाइंट्स के आधार पर 39-38 अंको से जीतने में कामयाब रहे.

फ्लिंटॉफ ने 2010 में क्रिकेट से सन्यास ले लिया था.

फ्लिंटॉफ ने इस जीत के बाद कहा, “अक्सर एशेज सिरीज की बात होती है और भी बहुत सी बातें होती हैं लेकिन ये जीत मेरे लिए एक निजी उपलब्धि है. ये मेरे लिए सबसे बेहतर जीत रही.”

हालांकि इशारों ही इशारों में फ्लिंटॉफ ने कहा कि उनकी पहली फाइट ही उनकी अंतिम फाइट हो सकती है, “ देखते हैं मैं कहां तक कर पाता हूं. मेरे लिए ये स्वाभाविक नहीं था, मुझे इस जीत के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा है.”

फ्लिंटॉफ कहते हैं, “रिंग में होना और आखिरकार वहां पर जीत हासिल करना. मेरे लिए ये भरोसा करना मुश्किल है. मैं वो बनने की कोशिश नहीं कर रहा हूं जो मैं नहीं हूं.”

गौरतलब है कि क्रिकेट के ऑलराउंडर रहे फ्लिंटॉफ ने 2005 की एशेज़ सिरीज़ की जीत में इंग्लैंड के लिए अहम भूमिका निभाई थी.

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