26/11 के बाद पहली बार भारत में पाक क्रिकेट टीम

 शनिवार, 22 दिसंबर, 2012 को 11:03 IST तक के समाचार

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट को उपमहाद्वीप में ऐशेज़ से भी बड़ा माना जाता है. फाइल फोटो

भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी क्रिकेट की बात होती है तो बहस का दायरा 22 गज की पिच और क्रिकेट के मैदान से काफी बड़ा हो जाता है.

इस बार भी पांच साल के अंतराल के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम भारत में खेलने आ रही है तो चर्चा खेल से लेकर राजनीति और दोनों देशों के आपसी संबंधों पर हो रही है.

पाकिस्तानी टीम भारत में दो टी-20 और तीन एकदिवसीय मैच खेलेगी. पहला मैच 25 दिसंबर को बेंगलुरू में खेला जाएगा और जिसके लिए मेहमान टीम शनिवार को बेंगलुरू पंहुचेगी.

26/11 के मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम का भारतीय दौरा सुरक्षा के दृष्टिकोण से रद्द कर दिया गया था.

यहां तक कि साल 2009 के पहले आईपीएल में भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेने में किसी भी टीम ने दिलचस्पी नहीं दिखाई थी.

पाकिस्तान में भी विदेशी टीम का दौरा साल 2008 में श्रीलंका की टीम पर हुए चरमपंथियों के हमले के बाद थम गया था. नतीजा ये कि दोनों ही देशों के दर्शक अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के साथ मैच देखने से कई साल महरूम रहे.

बातचीत

हालांकि परदे के पीछे दोनों देशों में क्रिकेट संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने की बातचीत होती रही.

तमाम कोशिशों के बाद इस साल अक्तूबर अंत में भारत की केंद्रीय सरकार ने पाकिस्तानी टीम के दौरे को मंज़ूरी दे दी.

कब कब होंगे मैच

  • 25 दिसंबर, बेंगलुरू में पहला टी-20 मैच
  • 28 दिसंबर, अहमदाबाद में दूसरा टी-20 मैच
  • 30 दिसंबर, चेन्नई में पहला वनडे मैच
  • 03 जनवरी, कोलकाता में दूसरा वनडे मैच
  • 06 जनवरी, दिल्ली में तीसरा वनडे मैच

पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक हाल ही में जब भारत आए थे तो उनके कुछ बयानों को लेकर भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा था कि ये श्रंखला रद्द कर देनी चाहिए.

यशवंत सिन्हा के साथ साथ कई और लोग भी दौरे की विरोध कर रहे होंगे लेकिन क्रिकेट के ज़रिए आपसी रिश्ते सुधारने के कई दीवाने भी हैं.

मुझे याद है साल 2004 में जब भारतीय टीम 25 साल के अंतराल के बाद पाकिस्तान में टेस्ट सिरीज़ खेलने गई थी तो उसे कवर करने मैं भी पाकिस्तान गया था.

तब भी रिपोर्टिंग क्रिकेट के अलावा दूसरी खबरों की खूब हुई कि किस तरह भारतीय टीम और यहां से पाकिस्तान गए हुए दर्शकों और मीडिया का लाहौर से लेकर इस्लामाबाद तक और मुल्तान से लेकर पेशावर तक हरेक शहर में ज़ोरदार स्वागत हुआ.

इसी तरह जब एक साल बाद पाकिस्तान की टीम भारत आई तो लोगों ने दिलों के दरवाज़े खोल दिए थे.

इन दो दौरों ने सीमा के दोनों तरफ कई लोगों के गुबार को निकालने का काम किया था.

दोनों देशों के दर्शक रंग-बिरंगी वेशभूषाओं में मैदान में आते हैं. फाइल तस्वीर

लोगों के एक दूसरे से मिलने भर से दोनों देशों के बीच के मसले तो हल नहीं हो जाते लेकिन कड़वाहट जरूर थोड़ी बहुत कम हो जाती है और बातचीत का रास्ता भी खुलता है.

इस बार भी पाकिस्तानी टीम के साथ कई पूर्व खिलाड़ी, आम दर्शक, जाने माने चेहरे और राजनेता भी भारत आएंगे.

कड़ी टक्कर

वैसे क्रिकेट के मैदान पर दोनों ही टीमें जीतने के लिए खेलेंगी.

पाकिस्तान के नवनियुक्त बल्लेबाज़ी कोच इंजमाम-उल हक़ ने ये कह कर ज़हनी टक्कर का रास्ता खोल दिया है कि उनकी टीम मज़बूत है और जीत की उम्मीद की जा सकती है.

पिछले कुछ समय से हार का दंश झेल रहे भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी जानते हैं कि अपने चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी से हारने का मतलब ताबूत में आखिरी कील ठुकना हो सकता है.

वैसे इमरान खान और कपिल देव के ज़माने से दोनों ही टीमें आगे आ चुकी हैं और समझने लगी है कि जीतना तो ज़रूरी है लेकिन क्रिकेट जंग का मैदान नहीं है.

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