'भारतीय गेंदबाज़ी, आधा तीतर-आधा बटेर'

 शनिवार, 5 जनवरी, 2013 को 00:07 IST तक के समाचार
इशांत शर्मा

इन दिनों भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे गर्दिश में हैं और भारतीय बल्लेबाज़ी के साथ-साथ गेंदबाज़ी भी चर्चा के केन्द्र में है.

भारत दौरे पर आई पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने पहले तो ट्वेंटी-ट्वेंटी में ज़ोरदार खेल दिखाया, फिर उसके बाद तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला के पहले दो मैच जीतकर अजेय बढ़त हासिल कर ली.

पाकिस्तान और भारत के बीच सबसे बड़ा अंतर गेंदबाज़ों ने पैदा किया. पाकिस्तान के नए तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद इरफान और जुनैद खान के सामने भारतीय दिग्गज नौसिखिए साबित हुए.

"इशांत शर्मा, अशोक डिंडा और भुवनेश्वर तीनों ही बेहद साधारण नज़र आए. दूसरी तरफ पाकिस्तान में कोई क्रिकेट एकेडमी है या नहीं, कोई वहां की क्रिकेट पर ध्यान देता है या नहीं इसका पता नहीं. लेकिन फिर भी वहां से लगातार नए तेज़ गेंदबाज़ आते रहते हैं."

अतुल वासन, पूर्व क्रिकेटर

ऑफ स्पिनर सईद अजमल भी पीछे नहीं रहे. कोलकाता में खेले गए एकदिवसीय मैच में भारतीय गेंदबाज़ी कितनी लचर थी इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान ने पहले विकेट के लिए 141 रन जोड़ने के साथ ही मैच भी भारत के हाथ से छीन लिया.

पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन कहते है, “इशांत शर्मा, अशोक डिंडा और भुवनेश्वर तीनों ही बेहद साधारण नज़र आए. दूसरी तरफ पाकिस्तान में टैलेंट की कमी नहीं है. वहां कोई क्रिकेट एकेडमी है या नहीं, कोई वहां की क्रिकेट पर ध्यान देता है या नहीं इसका पता नहीं. लेकिन फिर भी वहां से लगातार नए तेज़ गेंदबाज़ आते रहते हैं. अब चाहे सात फुट से ज़्यादा लंबाई वाले इरफान हों या जुनैद.”

पिछले एक साल में भारत इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया से वहां जाकर टेस्ट और एकदिवसीय सीरीज़ हारा तो अपनी ही ज़मीन पर इंग्लैंड से 28 साल बाद टेस्ट श्रृंखला भी हार गया.

स्पिन गेंदबाज़ी भी चिंताजनक

हरभजन सिंह

विशेषज्ञों का मानना है कि हरभजन सिंह की जगह लेने वाला कोई माकूल स्पिनर टीम में नहीं है.

अनिल कुंबले के संन्यास के बाद अब हरभजन सिंह भी अपने क्रिकेट करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं. आर अश्विन, अमित मिश्रा, प्रज्ञान ओझा और पीयूष चावला फिलहाल स्पिन में भारत का वर्तमान और भविष्य हैं तो इशांत शर्मा, भुवनेश्वर कुमार, अशोक डिंडा, शमी अहमद तेज़ गेंदबाज़ी में. अब ज़रा इनके बारे में क्रिकेट विशेषज्ञों की राय भी जान लें.

पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ और रिवर्स स्विंग के माहिर सरफराज़ नवाज़ ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, “अमूमन कोई भी टीम अपने पांच विशेषज्ञ गेंदबाज़ो के साथ मैदान में उतरती है, लेकिन भारत चार मुख्य गेंदबाज़ो के साथ खेलता है. हालत यह है कि पार्ट टाइम गेंदबाज़ उतने कारगर नहीं हैं. ऐसे में भारतीय गेंदबाज़ी आधे तीतर आधे बटेर की तरह है.”

सरफराज़ के मुताबिक़ मैच हमेशा गेंदबाज़ जिताते हैं, अगर भारत के बल्लेबाज़ मैच जिताने वाले होते तो पहले वन-डे में उसके पांच खिलाडी 29 रन पर आउट नहीं होते.

फिटनेस की समस्या

"भारत चार मुख्य गेंदबाज़ो के साथ खेलता है. हालत यह है कि पार्ट टाइम गेंदबाज़ उतने कारगर नहीं है. ऐसे में भारतीय गेंदबाज़ी आधे तीतर आधे बटेर की तरह है."

सरफराज़ नवाज़, पूर्व पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़

भारत के तेज़ गेंदबाज़ टीम में आते ही क्यों चोटिल हो जाते है, या फिर उनकी रफ्तार में अचानक कमी क्यों आ जाती है, इस सवाल का जवाब सीधा-सीधा देते हैं इशांत शर्मा के कोच श्रवण कुमार.

“आज के तेज़ गेंदबाज़ टीम में आते ही स्टार बन जाते हैं और अभ्यास करना छोड़ देते हैं, नतीजा मैच खेलते ही थकान और चोट.”

वहीं भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ करसन घावरी कहते हैं कि आज के गेंदबाज़ जिम में फिटनेस करते हैं जबकि मैच फिटनेस मैदान में खेलने से आती है.

स्पिन को लेकर भारत के पूर्व महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी का हमेशा मानना रहा है कि जब तक खिलाड़ी का पसीना मैदान में नहीं निकलेगा तब तक कुछ नहीं हासिल होगा.

उनके साथी स्पिनर इरापल्ली प्रसन्ना भी बीबीसी से खास बातचीत में कह चुके हैं कि आजकल के भारतीय स्पिनर्स में हुनर की कमी है. ना तो उनकी गेंदबाज़ी में फ्लाइट के साथ स्पिन है और ना ही उनके पास कोई ऐसा हथियार जो कभी-कभी ब्रहास्त्र साबित हो.

ऐसे में रह रहकर आज भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों या क्रिकेट विशेषज्ञों को अगर कपिल की यॉर्कर, श्रीनाथ की तेज़ी, वेंकटेश प्रसाद की स्विंग, प्रसन्ना की फ्लाइट याद आती है तो उनकी मजबूरी को आसानी से समझा जा सकता है.

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