...तो ऐसे किया गावस्कर ने ज़हीर अब्बास को आउट

 रविवार, 6 जनवरी, 2013 को 03:29 IST तक के समाचार
सुनिल गावस्कर

शुक्रवार को सिएट पुरस्कार समारोह में क्रिकेट खिलाड़ियों को पुरस्कार के नवाजा गया

शुक्रवार की शाम दिल्ली के लिए बेहद ख़ास थी, क्योकिं एक पांच सितारा होटल में भारत और पाकिस्तान के कई पूर्व दिग्गज और कई युवा क्रिकेटर मौजूद थे.

मौका था सिएट क्रिकेट अवॉर्ड समारोह का. समारोह की शोभा में चार चांद लगा रहे थे, भारत के पूर्व कप्तान सुनील मनोहर गावस्कर, कपिल देव, पाकिस्तान के पूर्व कप्तान ज़हीर अब्बास, वसीम अकरम, रमीज़ राजा और भारत को अंडर 19 विश्व कप में विजेता बनाने वाले कप्तान उन्मुक्त चंद.

इनके अलावा भारत और पाकिस्तान की और से भी कई क्रिकेट हस्तियां वहां मौजूद थी. इन हस्तियों ने अपने नए-पुराने किस्से सुनाकर अपने चाहने वालों का दिल खुश कर दिया.

सबसे युवा भारतीय क्रिकेटर के लिए उन्मुक्त चंद को पुरस्कार देते समय जब सुनील गावस्कर ने उनसे उनके नाम का अर्थ पूछा तो उन्मुक्त ने कहा, ''यह एक कविता के अर्थ की तरह है, हम पंछी उन्मुक्त गगन के, यानी जिनके लिए कोई बाउंड्री नहीं है." गावस्कर ने भी चुटकी लेते हुए कहा, तभी तुम छक्के ज़्यादा लगाते हो बाउंड्री कम.''

हंसी के फव्वारे

वैसे गावस्कर के लिए भी एक पल ऐसा आया जब समारोह में हंसी के फव्वारे छूट गए.

दरअसल जब पाकिस्तान के पूर्व कप्तान ज़हीर अब्बास को लाइफटाइम अवॉर्ड के लिए स्टेज पर बुलाया गया तो रमीज़ राजा ने गावस्कर से कहा कि आपने ज़हीर अब्बास का विकेट लेने के लिए कौन सी गेंद की थी, तेज़, बाउंसर या गुगली.

जवाब में गावस्कर ने कहा कि मैने तो कुछ नही किया, हमारी दोस्ती तो बहुत पुरानी है 1971 से. यह तो ज़हीर ने ही सोचा कि चलो इसे विकेट दे देते है वर्ना रिटायर होने तक इन्हें तो विकेट मिलने से रही.

इस अवसर पर जब ज़हीर अब्बास से उनकी बेहतरीन बल्लेबाज़ी का राज़ पूछा गया तो उन्होने रहस्य से पर्दा उठाते हुए कहा कि वह अभ्यास करते समय विकेट कीपर वसीम बारी को कहते थे कि वह उनकी कमियों के बारे में बताए.

ऐसे ही एक अवसर पर उन्होंने बारी को ज़िम्मेदारी दी और संभाला अपना बल्ला. थोड़ी देर उन्होंने पीछे मुडकर देखा तो बारी वहां से हट चुके थे. उन्होंने बारी से पूछा कि क्या हुआ भाई तुम हट क्यों गए? तब बारी ने प्यार से गाली देते हुए कहा की .....'' तू कोई बॉल छड्डेगा ता ई तो दस्सेगा कित्थे गल्ती की.''

इसके अलावा जब ज़हीर अब्बास से पूछा गया कि आपने तो बहुत सी डबल सेंचुरी मारी है, किसे सबसे ज़्यादा याद करते हैं? तो उन्होंने गावस्कर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसने तो मेरा विकेट लेकर मेरा जीना हराम कर दिया है, विकेट ले भी ली और यह सबको बताता भी है.

मेरी सारी डबल सेंचुरी एक तरफ और इसका विकेट एक तरफ.

यादों का झरना

उन्मुक्त चांद

उन्मुक्त अंडर-19 के कप्तान हैं

वैसे तो इस समारोह में बहुत सी यादों के झरने भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के दिल से झरे, लेकिन रमीज़ राजा और पूर्व कप्तान इंज़माम-उल-हक़ के बीच हुई चुहल ने तो हंसी के फव्वारे फोड़ दिए.

रमीज़ ने कहा कि मेरी क़िताब के हिसाब से पाकिस्तान ने कभी इतना ठंडा प्लेयर पैदा नहीं किया है. जितने बडे तनाव वाला माहौल उतना ही आप शांत, क्या है राज़, इंज़माम ने कहा, ''दबाव तो मुझ पर भी होता था शायद दिखाई नही देता था. दरअसल 1992 में विश्व कप के फाइनल में जब मैं कप्तान इमरान खान के साथ खेल रहा था तो उन्होंने कहा कि यह जो 90,000 लोगो की भीड यहां आई है इनके सामने यह सोचकर खेलो कि यह आपको ही देखने आई है. अपने ऊपर भरोसा रखो, बस यह दो अल्फ़ाज़ मैंने याद रखे. इसके बाद रमीज़ ने पूछा यादगार रन आउट—इंज़माम ने कहा—बहुत सारे.''

इसके बाद रमीज़ राजा ने उनसे कहा कि 2004-05 में अहमदाबाद में खेले गए वन-डे में आखिरी ओवर में चार या पांच रन जीतने के लिए चाहिए थे लेकिन आपने सचिन की तीन-चार गेंद रोककर सबके दिलों की धडकने बढ़ा दी थी. इंज़माम ने भी भोलेपन से कहा कि लोग भी कह रहे थे कि शायद इसे तो पता भी नहीं चल रहा.

इस समारोह में किस्से कहानियां तो बहुत थी, लेकिन बातों-बातों में विदेशी कोचों को लेकर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तेज़ गेंदबाज़ वसीम अकरम अपने दिल की बात कह गए.

उन्होंने कहा कि जब वह पाकिस्तान के लिए खेल रहे थे, उस समय पाकिस्तान ने इंग्लैंड के जैफ्री बायकॉट को बहुत सारे पैसे देकर दो हफ्ते के लिए कोचिंग के लिए रखा.

यह तब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन का फैसला था जो समझते थे कि उन्हें क्रिकेट की बड़ी समझ है. बायकॉट आए और युवा खिलाडियों को ट्रेनिंग देनी शुरू की. मैं दूर से देख रहा था कि गद्दाफी स्टेडियम में बिलकुल बीचोंबीच युवा क्रिकेटर इमरान नज़ीर मैदान के पांच चक्कर लगाने के बाद बॉयकाट के सामने हां-हां में सिर हिला रहा था.

ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद मैंने उससे पंजाबी में पूछा-तू क्या कर रहा था, कुछ समझ में आया, इमरान बोला –नही. मैने कहा तो तू हां-हां में सिर क्यों हिला रहा था, तो इमरान बोला—अगर ना-ना करता तो वो दो घंटे और बोलता.

तो इस तरह हँसी मज़ाक के बीच एक शाम क्रिकेट सितारों के साथ बीत गई जो जाते-जाते सुनहरी यादों की सौगा़त भी दे गई.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.