कई समस्याएँ हैं टीम इंडिया के सामने

 मंगलवार, 22 जनवरी, 2013 को 17:17 IST तक के समाचार

भारतीय टीम के कोच डंकन फ़्लेचर की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं

आखिरकार भारतीय क्रिकेट टीम लगातार हार और आलोचनाओं के घेरे से निकलकर जीत और प्रशंसा की राह पर लौट चुकी है.

पिछले दिनों पहले तो पाकिस्तान के ख़िलाफ तीसरे और आखिरी एक दिवसीय मैच में कम स्कोर वाले मैच में जीतना और उसके बाद इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहला मैच नौ रन से हारने के बाद लगातार दो मैच बेहद आसानी से अपने नाम करने के साथ ही भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे भी जैसे बदल गए है.

कहा जा रहा है कि भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का 'मिडास टच' भी वापस लौट आया, लेकिन इसके कई सवाल अभी भी टीम का पीछा नही छोड़ रहे हैं.

खराब फ़ार्म में सलामी जोड़ी

सबसे बडा सवाल तो भारतीय टीम की सलामी जोडी को लेकर है, जो पिछले एक साल से लगातार लड़खड़ाती रही है. बीते 21 एक दिवसीय मैचों में केवल तीन अवसरों पर भारत की सलामी बल्लेबाज़ी अर्धशतकीय साझेदारी निभा सकी.

"कोच का काम खिलाड़ियों को प्रेरणा देना होता है, जिससे उनके प्रदर्शन में निरंतरता आती है जिसमें फ्लेचर नाकाम रहे है, और इसी वजह से हमारे प्रतिभावान खिलाड़ी भी लगातार अच्छा नही खेल पा रहे है"

मनिंदर सिंह, पूर्व स्पिनर

इस दौरान भारत ने गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर और अजिंक्य रहाणे को सलामी बल्लेबाज़ के रूप में उतारा. इस बीच सचिन एक दिवसीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं तो चयनकर्ता वीरेंद्र सहवाग को टीम से बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं.

अब इस समस्या का समाधान बताते हुए पूर्व चयनकर्ता और जाने माने बल्लेबाज़ मोहिंदर अमरनाथ कहते हैं कि नए खिलाड़ियों पर भरोसा तो रखना ही होगा, हो सकता है इस कोशिश में कुछ मैचो में हार हाथ लगे लेकिन भविष्य की टीम बनाने के लिए इतना जोखिम तो उठाना ही होगा.

भारत के पूर्व विकेट कीपर बल्लेबाज़ नयन मोंगिया कहते हैं कि रहाणे की तकनीकी कमज़ोरी इंग्लैंड के गेंदबाज़ों के सामने उभरकर सामने आई है तो गंभीर भी तीस-चालीस रन बनाकर आउट हो रहे हैं.

उनका कहना है कि अब जबकि सहवाग भी टीम से बाहर है तो उन्हे अपनी ज़िम्मेदारी को समझना होगा और लम्बी पारियॉ खेलनी होगी, वह बेहद अनुभवी बल्लेबाज हैं.

इसके अलावा रविंद्र जडेजा, विराट कोहली, इशांत शर्मा भी लगातार अच्छा प्रदर्शन नही कर पा रहे है, जिसे लेकर पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते है, "चयनकर्त्ताओ को बधाई देनी चाहिए कि उन्होने इनमें भरोसा दिखाया और अब यह कुछ अच्छा कर रहे हैं, लेकिन अब ज़िम्मेदारी कोच डंकन फ्लेचर की बनती है."

कोच पर सवाल

वे कहते हैं कि अब देखिए इशांत शर्मा ने तीन मैचों में अच्छी गेंदबाज़ी की लेकिन बाद के दो मैचो में वैसा नही कर सके. रविंद्र जडेजा एक दो मैचों में अच्छा खेलने के बाद अचानक फार्म खो बैठते हैं.

गौतम गंभीर

गौतम गंभीर भी कई मैचों से अपने फार्म में नहीं दिख रहे हैं

मनिंदर कहते हैं, "कोच का काम खिलाड़ियों को प्रेरणा देना होता है, जिससे उनके प्रदर्शन में निरंतरता आती है जिसमें फ्लेचर नाकाम रहे है, और इसी वजह से हमारे प्रतिभावान खिलाड़ी भी लगातार अच्छा नही खेल पा रहे है."

गौतम गंभीर और अजिंक्य रहाणे की फार्म की बात चलने पर मनिंदर कहते है कि अब बात एक बार फिर कोच पर आ जाती है जिन्हें तकनीकी रूप से बेहद अच्छा माना जाता है लेकिन यहाँ पर भी कोच क्या कर रहे हैं, देखिए इन दोनो बल्लेबाज़ो के पैर ही नही चल रहे यानी फ़ुटवर्क बिलकुल नहीं है.

अब इस तकनीकी कमी को तो कोच ही दूर कर सकता है, क्योंकि कई बार खिलाड़ी ख़ुद अपने आप अपनी कमियों के बारे में नहीं जान पाते. इसमें भी कोच डंकन फ्लेचर फेल हो गए हैं.

लेकिन अगर इन दोनों बल्लेबाज़ों ने आने वाले मैचो में रन नही बनाए तो चयनकर्ताओं को बहुत सोच-विचार करना होगा कि क्या इन्हें और मौक़े देने हैं या फिर इनकी जगह युवा बल्लेबाज़ लाए जाएं.

भुवनेश्वर और शमी प्रतिभावान

धोनी

धोनी को कई कड़े फ़ैसले करने होंगे

वहीं नए तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार और शमी अहमद को लेकर मनिंदर सिंह कहते है कि अभी इनके बारे में कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी.

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले मैच में उन्होंने बहुत अच्छी गेंदबाज़ी की लेकिन उसके बाद दबाव में बिखर गए, पर उनमें प्रतिभा है.

भुवनेश्वर का इस्तेमाल धोनी को सोच-समझकर करना होगा क्योंकि अभी उनके पास इतनी गति नहीं है कि वह अंतिम ओवरों में बल्लेबाज़ों को परेशान कर सकें.

फिलहाल धोनी उनसे लगातार सात-आठ ओवर करवा रहे है जो सही है. इससे उनका उत्साह बढ़ेगा और धीरे-धीरे वह अंतिम ओवरो में यॉर्कर या स्लोवर डिलिवरी या कुछ और अलग तरह की गेंद करना सीख जाएंगें जो भविष्य में उनके बेहद काम आएंगीं.

अब देखना है कि भारतीय क्रिकेट टीम इन सवालों के घेरे से कब तक निकलती है और जीत की यह राह कितनी लंबी साबित होती है.

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