ओलंपिक में कुश्ती बरकरार रहने की उम्मीद:योगश्वर

  • 13 फरवरी 2013
Image caption योगेश्वर दत्त कहते हैं कि कुश्ती सबसे पुराना खेल है और इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है.

ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले पहलवान योगेश्वर दत्त का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि कुश्ती ओलंपिक से बाहर नहीं होगी.

बीबीसी से बात करते हुए योगेश्वर ने कहा, “ये जानकर बहुत दुख हुआ और हमें हड़ा झटका लगा है. लेकिन मुझे उम्मीद है कि कुश्ती 2020 ओलंपिक में भी होगी और लोग देखेंगे भी.”

योगोश्वर कहते हैं, “ये अभी प्रस्ताव भर है. कुश्ती का खेल पूरे विश्व में खेला जाता है और सबसे प्राचीन खेल भी है.”

योगेश्वर कहते हैं कि 2016 ओलंपकि का मकसद अभी उनके पास है और वो उसी पर ध्यान लगाना चाहते हैं.

योगेश्वर के अनुसार भारतीय कुश्ती का विश्व स्तर पर अभी आगाज़ हुआ है और ऐसे समय में ये खबर दिल तोड़ देती है. अगर 2020 में ये नहीं होगी तो हमारे पास कोई मकसद नहीं होगा.

योगेश्वर कहते हैं कि जिन युवा पहलवानों ने 2020 ओलंपिक को अपना मकसद बनाया है उनको मकसद की कमी पड़ जाएगी. ये सोचना भी मुश्किल है कि वो क्या करेंगें.

योगेश्वर को डर है कि अगर असल में कुश्ति ओलंपिक से बाहर हो जाएगी तो भारतीय कुश्ती का स्तर और नीचे गिरेगा.

योगेश्वर भरोसा जताते हैं कि सभी देखों के खेल संघ इस प्रस्ताव के विरोध में आवाज़ उठाएंगे.

क्या है प्रस्ताव

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के कार्यकारी बोर्ड ने वर्ष 2020 के ओलंपिक खेलों से कुश्ती को हटाने की सिफ़ारिश की है.

स्विट्ज़रलैंड के लुज़ैन में हुई बैठक में यह फ़ैसला किया गया है. आईओसी का यह फ़ैसला नए खेलों को ओलंपिक में शामिल करने के लिए है.

इस ख़बर को भारत के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि लंदन में हुए पिछले ओलंपिक में भारतीय पहलवानों ने अच्छा प्रदर्शन किया था.

भारत ने लंदन ओलंपिक में कुश्ती में दो पदक जीते थे. भारत की ओर से सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त ने दो पदक जीते थे. वैसे अभी तक ओलंपिक में भारत ने कुश्ती में चार पदक जीते हैं.

आईओसी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि कार्यकारी बोर्ड ने 25 नए खेलों को 2020 के ओलंपिक खेलों में शामिल करने का प्रस्ताव आईओसी के 125वें सत्र में रखा जाएगा.

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