आसान नहीं होगी सहवाग की वापसी....

वीरेंद्र सहवाग
Image caption सहवाग की वापसी उन्हीं पर निर्भर है.

भारतीय सलामी बल्लेबाज़ वीरेंदर सहवाग को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होने वाले अगले दो टेस्ट मैचो से बाहर किए जाने में कोई आश्चर्य नही है क्योंकि सहवाग मूलत: हैंड-आई कॉर्डिनेशन से खेलने वाले खिलाड़ी हैं.

जैसे-जैसे खिलाड़ी की उम्र बढ़ती जाती है वैसे-वैसे उसके रेफ़्लेक्सेज़ यानी गेंद को तेज़ी से देखने की क्षमता भी धीमी होती जाती है.

सहवाग जिस शैली में खेलते है उसमें परेशानी होती ही है. अच्छी पिचों पर तो सहवाग शायद अभी भी बल्लेबाज़ी कर लें लेकिन जहॉ भी गेंद मूव करेगी, स्विंग करेगी, बाउंस करेगी वहॉ उन्हे दिक़्क़तों का सामना करना पडेगा.

भारत के अगले तीन दौरे दक्षिण अफ़्रीक़ा, न्यूज़ीलैंड और 2014 में इंग्लैंड में है, तो मुझे लगता है कि चयनकर्ताओं ने भी सोच लिया था कि यह दौरे ऐसे है जहॉ सलामी साझेदारी अच्छी चाहिए होगी, अगर भारत को विदेशो में भी जीत हासिल करनी है.

यही सोचकर चयनकर्ताओं ने युवाओं को अवसर दिया है और उन्होंने जिस भी युवा को मौक़ा दिया है उसने शानदार प्रदर्शन किया है जिससे चयनकर्ताओं का हौसला भी बढ़ा हुआ है.

सहवाग ने जिस तरह का प्रदर्शन पिछले मैचो में किया है उसे देखते हुए उनकी जगह टीम में बनती भी नही थी.

'सही क़दम'

मुझे लगता है कि 2013 के दक्षिण अफ़्रीक़ी दौरे को देखते हुए भारतीय चयनकर्ता किसी युवा बल्लेबाज़ को परखना चाहते थे, जो एक सही क़दम है. इसी बहाने चयनकर्ताओं को मौक़ा भी मिल जाएगा, वह देख सकेंगे कि शिखर धवन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता है भी या नही.

जहॉ तक मोहाली में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच की बात है तो मुझे लगता है कि वहॉ शिखर धवन को ही अवसर मिलेगा क्योंकि अजिंक्य रहाणे मध्यम क्रम के बल्लेबाज़ है, हालांकि हाल ही में जो एकदिवसिय मैच हुए उसमें रहाणे सलामी बल्लेबाज़ की हैसियत से खेले थे लेकिन उनका फ़ुटवर्क उतना अच्छा नही लगा.

मेरी नज़र में धवन को मौक़ा दिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने पिछले दिनों ढेर सारे रन बनाए है, उनके आने से टीम में एक बाएं और एक दाएं हाथ से खेलने वाले बल्लेबाज़ का सम्मिश्रण बनता है.

मै यह भी नही चाहता कि रहाणे जो मध्यम क्रम के बल्लेबाज़ हैं, उन्हे सलामी बल्लेबाज़ बनाकर दो-तीन पारियों में असफल रहने पर टीम से निकाल दें और एक अच्छा खिलाड़ी हम खो दें. मध्यम क्रम में अभी जल्दी ही एक जगह बनने वाली है, इसलिए उन्हें अभी थोडा इंतज़ार करने दें.

जहॉ तक सहवाग की टीम में वापसी की बात है तो यह तो उन्ही पर निर्भर करेगा. हर खिलाड़ी को अंदर से आवाज़ आ जाती है कि उसे कब तक क्रिकेट खेलनी है, लेकिन सहवाग को अगर टीम में आना है तो उन्हे दस गुना ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, अब क्या सहवाग में इतना जज़्बा है, यह तो सहवाग को ख़ुद ही देखना होगा.

'धोनी कारण नहीं'

Image caption क्रिकेट के हर फ़ॉरमेट में सहवाग से ज्यादा तेज़ी से रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बहुत कम है.

सहवाग को टीम से बाहर किए जाने पर कुछ लोग यह भी कह रहे है कि उनके रिश्ते कप्तान धोनी के साथ सही नही थे, लेकिन यह धोनी ही थे जिनके कहने पर सहवाग को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले दो टेस्ट मैच खेलने का अवसर मिला क्योंकि तीन चयनकर्ता सहवाग को टीम में रखने के ख़िलाफ़ थे, तो इस बात में कोई सच्चाई नही है कि सहवाग को कप्तान धोनी से ख़राब रिश्तो के कारण टीम से बाहर जाना पडा.

जहॉ तक वीरेंदर सहवाग के भारतीय क्रिकेट टीम को दिए गए योगदान की बात है तो मेरे ख़्याल से बहुत कम सलामी बल्लेबाज़ ऐसे हुए हैं जिन्होंने इस तरह से भारतीय क्रिकेट की सेवा की है.

जब-जब उन्होने रन बनाए है, तब-तब भारत जीता है, क्योंकि गेंदबाज़ी कमज़ोर होने के बावजूद गेंदबाज़ों को लंबे समय तक गेंदबाज़ी करने का मौक़ा मिल जाता था, सहवाग न केवल तेज़ी से रन बनाते थे, बल्कि ज़्यादा रन भी बनाते थे, जिसकी वजह से भारतीय टीम बड़ा स्कोर खड़ा करती थी. भारतीय टीम की जीतों में सहवाग जैसा योगदान बहुत कम खिलाड़ियों का रहा है.

सहवाग की जगह को भरा नही जा सकता क्योंकि वह बहुत बड़े खिलाड़ी है, लेकिन युवा बल्लेबाज़ शिखर धवन में प्रतिभा है, अब देखना है वह कैसा खेल दिखाते है. गौतम गंभीर में अभी भी बहुत क्रिकेट बाक़ी है, ज़रूरत है धैर्य के साथ उन्हें अवसर दिए जाने की ताकि समय मिलने के साथ गंभीर भी सहवाग जैसे असाधारण खिलाड़ी बन सके.

जहॉ तक हरभजन सिंह को अवसर दिए जाने की बात है तो अगर चेन्नई टेस्ट की पहली पारी को छोड़ दिया जाए तो उन्होंने बाक़ी अवसर पर अच्छी गेंदबाज़ी की है. उन्हे विकेट तो बहुत ज़्यादा नही मिले हैं लेकिन उन्होंने एक भरोसा ज़रुर जगाया है.

जब वह अच्छी गेंदबाज़ी करेंगे तो उन्हे विकेट भी मिल ही जाएगे. हरभजन सिंह को जब विकेट मिलेंगे तो उनका खोया आत्मविश्वास भी वापस लौट आएगा, अभी टीम में उनकी जगह बनती है.

(बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए आदेश कुमार गुप्त से बातचीत पर आधारित)

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