भारतीय टीम अपनी गली की शेर पर बाहर ढेर?

टीम इंडिया
Image caption भारत ने ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सिरीज़ में 4-0 से हरा दिया था.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में मिली 4-0 की जीत ने भारत को अपने घर के शेर होने का स्टेटस दोबारा हासिल करा दिया है.

हालांकि ये तमगा देना थोड़ी जल्दबाज़ी होगी क्योंकि कुछ महीनों बाद भारत को दक्षिण अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड से भिड़ना है.

इंग्लैंड और भारत के बीच खेले गए टेस्ट मैच से ये जाहिर हो चुका है कि अच्छे स्पिनर जैसे मोंटी पनेसर या ग्रेम स्वॉम के सामने भारतीय टीम टिक नहीं पाती है. अगर ऑस्ट्रेलिया के पास भी ऐसा ही एक और अच्छा स्पिनर होता तो शायद भारत के लिए जीत हासिल करना मुश्किल हो जाता.

फार्मूला

Image caption इस सिरीज़ में चेतेश्वर पुजारा का प्रदर्शन भी बढ़िया रहा

अज़हरूद्दीन और अजीत वाडेकर जैसे लोगों ने स्लो लो बॉउंस वाली विकेट तैयार करने का फार्मूला निकाला.उसका नतीजा ये हुआ कि भारतीय टीम अपने घर में मैच जीत रही थी लेकिन उसका उलटा असर ये हुआ कि भारत बाहर जाकर कोई मैच नहीं जीत पा रहे थी.

वर्तमान टीम को भी यही खतरा है. अगर टीम इसी तरह से ही विकेट बनाती जाएंगी तो वो केवल अपने ही घर में मैच जीत पाएगी.

जब गांगुली कप्तान बने तो इस बात पर विचार किया गया कि घर में मैच जीतने और बाहर मैच हारने से काम नहीं चलेगा. इसी दौरान टीम में अच्छे बल्लेबाज़ों का दौर आया. इस दौर में गांगुली के अलावा राहुल द्रविड, वीवीएस लक्ष्मण और सचिन तेंदुलकर जैसे बल्लेबाज़ आए. ये भारत के इतिहास में शायद अंतरराष्ट्रीय स्तर के बल्लेबाज़ थे जिन्होंने बाहर जाकर भी रन बनाए. यहीं ज़माना था जब भारत नबंर वन टीम बन कर उभरी.

भारतीय टीम की जो टलाएन एट होम एंड लैंब अबरोडट यानि घर में शेर और बाहर गीदड़ वाली जो छवि थी वो बदली और इंग्लैंड के साथ खेली गई टेस्ट सिरीज़ और ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच हमने जीते.

रणनीति

लेकिन इसके बाद एक बदलाव का दौर आया और फिर आईपीएल भी आया. टेस्ट मैचों की अहमियत घटती गई फिर बल्लेबाज़ों की तकनीक भी बदलती चली गई. इन बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन सीमित ओवर में अच्छा था. लेकिन इसका विपरीत परिणाम ये हुआ की भारत की खराब स्थिति और बदतर हो गई.

भारत में ही टीम इंडिया इंग्लैंड से हार गई थी. हालांकि वेस्ट इंडिज़ से वो बहुत मुश्किल से जीती तो वहीं न्यूज़ीलैंड टीम ने भी भारतीय टीम को परेशान किया.

ऐसी स्थिति में भारत में तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करने वाली पिच भी बनाई जानी चाहिए वरना बल्लेबाज़ों को तेज़ गेंदबाज़ी की आदत नहीं रहेगी और इसका परिणाम ये होगा कि वो बाहर जाकर मैच हारने लगेंगे.

हालांकि भारत अपने घर का शेर तो बन गया है लेकिन उसे दक्षिण अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड सिरीज़ खेलने जाना है और अगर ऐसे में उसकी हार होती है तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ये जीत धरी की धरी रह जाएगी.

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