प्रीमियर लीग में लागू होगी गोल लाइन तकनीक

Image caption गोल लाइन तकनीक को काफी सही माना जा रहा है

प्रीमियर लीग फुटबाल टूर्नामेंट में साल से यानी 2013-14 से गोल-लाइन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.

लीग ने इस बारे में हुए मतदान के बाद इसके पक्ष में मत दिया है.

साथ ही इस तकनीक को उपलब्ध कराने का ठेका ब्रिटेन स्थित हॉक आई कंपनी को दिया गया है.

हॉक आई अपनी तकनीक में हर गोल पर सात कैमरे के जरिए गेंद की निगरानी करती है और उसका दावा है कि परिणाम मिलीमीटर तक की दूरी तक सही होते हैं. कंपनी का ये भी दावा है कि आज तक किसी भी प्रसारण के दौरान दिखाए जाने वाले रीप्ले में उनके फ़ैसले को ग़लत नहीं ठहराया गया है.

अगस्त में होने वाले टूर्नामेंट के लिए फुटबॉल असोसिएशन वेंब्ले स्टेडियम में समय रहते इस तकनीक को वहां लगा लेगा.

गुरुवार को हुई इस बैठक में पांच बड़े क्लबों ने इस प्रणाली को अपनाने के पक्ष में मतदान किया.

कंपन्न गोल की जानकारी

हॉक आई कंपनी टेनिस और क्रिकेट में भी ये तकनीक उपलब्ध कराती है. इसके फुटबॉल सिस्टम में यदि गेंद गोल लाइन को पार कर गई है तो रेफरी के पास मौजूद घड़ी में तरंगे उत्पन्न होने लगेंगी और साथ ही उसमें एक ऑप्टिकल सिगनल लगा रहेगा जो कि एक सेकंड के भीतर इसकी सूचना दे देगा.

इस तकनीक की खोज करने वाले पॉल हॉकिन्स कहते हैं, “ये तकनीक खेल को धीमा नहीं करेगी और इसे ये कतई न समझा जाए कि इस तकनीक के लागू होने से फुटबॉल रगबी बन जाएगा.”

वो कहते हैं, “एक सेकंड के भीतर घड़ी को गोल होने की सूचना मिल जाएगी और उसके बाद हम टीवी स्क्रीन पर इसका रीप्ले देख लेंगे. इससे ये बात साबित हो जाएगा कि हमने रेफ्री को जो बताया था वो सही था.

फुटबॉल में गोल-लाइन तकनीक शुरू करने की मांग साल 2012 के यूरो कप के बाद से बढ़ गई है जब यूक्रेन को इंग्लैंड ने 1-0 से हरा दिया था. इस मैच में गेंद सीमारेखा को पार करती प्रतीत हुई थी लेकिन यूक्रेन की इक्वेलाइजर की मांग को ठुकरा दिया गया था.

संबंधित समाचार