काउंटी क्रिकेट पर आईपीएल भारी?

Image caption आईपीएल कै मौजूदा सीज़न में 200 से ज्यादा खिलाड़ी खेल रहे हैं.

साल 1992 में जब सचिन तेंदुलकर ने इंग्लिश काउंटी क्लब यॉर्कशायर के साथ करार किया था तो दुनिया भर की मीडिया में ये खबर छाई रही.

यार्कशायर अपने इतिहास में पहली बार किसी विदेशी खिलाड़ी को टीम में ले रहा था और किसी भी प्रतिभावान युवा खिलाड़ी के लिए इंग्लिश काउंटी में खेलने से बेहतर और क्या हो सकता था!

लेकिन आज 20 साल बाद बाज़ी पलट गई है.

(ये रिपोर्ट आप हमारे टीवी कार्यक्रम ग्लोबल इंडिया में शुक्रवार शाम देख सकते हैं)

अब सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली जैसे खिलाड़ी काउंटी में नहीं खेल रहे हैं बल्कि पीटरसन सरीखे इंग्लैंड के खिलाड़ी भी ऑफ सीज़न में भारत की उड़ान भर रहे हैं.

मोटी रकम

वजह है इंडियन प्रीमियर लीग.

पूर्व भारतीय खिलाड़ी फारुख इंजीनियर भारत के पहले खिलाड़ी थे जिन्हें काउंटी क्रिकेट खेलने का मौका मिला था.

इंजीनियर कहते हैं, "हमारे ज़माने में दिन के सिर्फ 50 रुपए मिलते थे, आज खिलाड़ियों को लाखों-करोड़ों मिलते हैं. आईपीएल का मतलब ही है क्रिकेट का व्यवसायीकरण और वो इसमें बेहद सफल रहे हैं. आईपीएल जितना पैसा काउंटी क्रिकेट में भी नहीं मिलता."

आईपीएल में इस बार नौ टीमें हैं और उनमें 200 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं. खिलाड़ियों को मोटी रकम पर साइन किया गया है.

आईपीएल-6 के बड़े पैसे वाले खिलाड़ियों पर नज़र डाले तो ग्लैन मैक्सवेल को पांच करोड़ 39 लाख रुपए पर साइन किया गया है.

वहीं अंजता मेंडिस को तीन करोड़ 90 लाख रुपए और केन रिचर्डसन को तीन करोड़ 77 लाख रुपए का करार मिला है.

इसके विपरीत अगर ये खिलाड़ी भारत या इंग्लैंड के घरेलू लीग में खेल रहे होते तो उनकी कमाई आईपीएल के मुकाबले काफी कम होती है.

कोचिंग पर असर

Image caption आईपीएल में क्रिकेट और बॉलिवुड का सफल मिश्रण है.

आईपीएल का असर भारत के छोट बड़े शहरों में साफ देखा जा सकता है.

नए कोचिंग सेंटर खुल रहे हैं और वहां बड़ी तादाद में बच्चे क्रिकेट सीखने के लिए एडमिशन ले रहे हैं.

एक ज़माना था जब युवा खिलाड़ी के लिए सिर्फ राष्ट्रीय टीम में खेलने का रास्ता होता था लेकिन आईपीएल ने उनके लिए नए दरवाज़े खोल दिए हैं.

पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गुरशरण सिंह दिल्ली के एक स्कूल में सफल कोचिंग केंद्र चलाते हैं.

वह कहते हैं, "हमारे पास बच्चे भिवाणी और रामगढ़ जैसे छोटे शहरों से भी आने लगे हैं. आईपीएल में खेलने वाले इन खिलाड़ियों का सपना होता है और वो कई बार टीवी पर खिलाड़ियों को देखकर रिवर्स स्वीप जैसे शॉट खेलने लगते हैं जो 20-20 क्रिकेट का अहम शॉट बन गया है."

काउंटी पर हावी

उन्होंने कहा, "आईपीएल में खिलाड़ियों को पैसा तो मिलता है और एक अच्छा करियर भी लेकिन कुछ खिलाड़ी इस बात पर भी चिंतित हैं कि क्रिकेट का ये फटाफट ब्रांड काउंटी क्रिकेट पर तो छा ही गया है, कहीं ये टेस्ट क्रिकेट के लिए भी खतरा न बन जाए."

फारूख इंजीनियर कहते हैं, "मुझे डर है कि कहीं ये टेस्ट क्रिकेट पर हावी न हो जाए. खिलाड़ी की असली पहचान टेस्ट में ही होती है और लोग टेस्ट क्रिकेट के रिकॉर्ड को ही याद रखते हैं."

लेकिन आइपीएल के अधिकारी इस बात से चिंतित नहीं है.

पूर्व टेस्ट खिलाड़ी औऱ हैदराबाद सनराइजर्स के साथ जुड़े कृष्णमाचारी श्रीकांत कहते हैं कि नए दर्शक लगातार मैदान पर आ रहे हैं.

श्रीकांत कहते है, "काउंटी क्रिकेट में अलग अलग कंडीशन में खेलने का मौका मिलता है और दोनों की तुलना नहीं कर सकते. लेकिन आईपीएल में खिलाड़ियों को जो अनुभव मिलता है वो अतुल्यनीय है. मिसाल के तौर पर अगर कोई युवा खिलाड़ी डेल स्टेन जैसे गेंदबाज़ को खेलता है तो समझ लीजिए उसे कितना बड़ा अनुभव मिलेगा."

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