जिसने सचिन के लिए न शादी की, न नौकरी

  • 25 अप्रैल 2013
Image caption वर्ल्ड कप जीतने के बाद सचिन ने सुधीर को ड्रेसिंग रूम बुलाया था

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर अपना 40वां जन्मदिन मना रहे हैं. भारत और भारत से बाहर उनके लाखों फ़ैन हैं. एक झलक के लिए सचिन के दीवाने उनका घंटों इतंज़ार करते हैं.

लेकिन सचिन के एक फ़ैन ऐसे भी हैं जिन्हें सचिन ख़ुद भीड़ में से मिलने के लिए बुलाते हैं, उन्हें अपने मैच के टिकट देते हैं. यहाँ तक कि जब भारत ने 2011 में वर्ल्ड कप जीता तो सचिन ने उन्हें बुलाया और वर्ल्ड कप थमा दिया. इनका नाम है सुधीर कुमार गौतम.

सचिन के इस सुपरफ़ैन को आपने भारत के तक़रीबन हर बड़े क्रिकेट मैच में स्टेडियम में या टीवी पर देखा होगा. बदन तिरंगे में रंगा हुआ, सीने पर तेंदुलकर और 10 लिखा रहता है.

मैच चाहे मुंबई में हो या कोलकाता में, बिहार के रहने वाले सुधीर साइकिल पर सफ़र कर वहाँ पहुँच ही जाते हैं. पाकिस्तान और बांग्लादेश भी वे मैच देखने साइकिल पर जाते हैं. सचिन और भारतीय क्रिकेट के प्रति समर्पण ऐसा है कि उन्होंने कभी शादी न करने का फ़ैसला किया है.

सचिन से पहली मुलाक़ात की तारीख़ और साल सुधीर को आज भी याद है.

सुधीर बताते हैं, ''वो 28 अक्तूबर 2003 का दिन था. सचिन किसी पार्टी के लिए शाम को एक होटल में अपनी पत्नी के साथ आए थे. तब मैं साइकिल से मुंबई आया हुआ था. जैसे ही हल्ला हुआ कि सचिन आ गए हैं, मैने साइकिल वहीं पटकी और उनके पैरों में जा गिरा. तब उन्होंने मुझे घर पर आने का न्यौता दिया. दूसरी मुलाक़ात उनके घर पर ही हुई.''

सचिन, क्रिकेट के लिए शादी नहीं

लेकिन एक मुलाक़ात फिर सचिन के लिए जुनून में कैसे बदल गई?

सुधीर बताते हैं, "शुरुआत 2002 में हुई. सचिन तो पहले से ही पसंद थे. सोचा था क्यों न उनसे मिला जाए. इसलिए साइकिल से मुंबई के लिए निकल गया. छह नवंबर 2003 को मैच था. सचिन तो चोट की वजह से नहीं खेल पाए लेकिन मैने मैच देखा. बस मेरे मन में बात बैठ गई कि अब जब भी मैच होगा मैं साइकिल से आउँगा, मैच देखूँगा, सचिन का ऑटोग्राफ़ लूँगा और फ़ोटो खिचवाऊँगा. तब मुझे नहीं पता था कि मैं इस क़दर क्रिकेट क्रेज़ी हो जाउँगा.''

सचिन के शतकों का ब्यौरा

सचिन के जन्मदिन के मौक़े पर वे कोलकाता में हैं और चाहते हैं कि सचिन शतक लगाकर इसका जश्न मनाए.

सचिन से जुड़ा कौन सा पल उनके लिए सबसे यागदार है. सुधीर बड़े गर्व से बताते हैं, ''विश्व कप जीतना सचिन का सपना था. मैंने भी विश्व कप के मैच देखे. बांग्लादेश में हुए मैच देखने के लिए मैं साइकिल से जाता था. वापसी में गांगुली जी के घर पर साइकिल रख भारत के दूसरे शहरों में गया. फिर जब भारत वर्ल्ड कप जीत गया तो सचिन ने मुझे ड्रेसिंग रूम में बुलाया. इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा कि मैने विश्व कप उठाया और क्रिकेट के भगवान ने तालियाँ बजाईं.''

पाकिस्तान चाचा से दोस्ती

Image caption सचिन के साथ-साथ सुधीर भारतीय टीम के अन्य सदस्यों से भी मिलते हैं.

ये सब तो ठीक है लेकिन आख़िर सुधीर काम क्या करते हैं और उनका ख़र्चा-पानी कैसे चलता है.

सुधीर कहते हैं, ''मैच का टिकट तो सचिन की ओर से मिल जाता है. किसी भी शहर में रहने की कभी दिक़्क़ नहीं हुई. भारत हो, ढाका हो, लाहौर हो, हर जगह मुझे जानने वाले लोग हैं जो अपने यहाँ ठहराते हैं. पाकिस्तान साइकिल से गया तो पाकिस्तान के क्रिकेट चाचा के यहाँ रुकता था. खाना-पीना यही चाहने वालों के यहाँ हो जाता है. जिन महीनों में भारत के मैच नहीं होते तो मैं कोई न कोई काम करता रहता हूँ ताकि थोड़ा बहुत ख़र्चा पानी निकाल सकूँ. जब साइकिल से सफ़र करता हूँ तो रात को पुलिस स्टेशन में सोता हूँ, उन्हें बताकर कि मैं कौन हूँ.''

सुधीर पहले नौकरी किया करते थे लेकिन सचिन और क्रिकेट के लिए दोनों नौकरियाँ छोड़ दी. वे बिहार में शिक्षक थे लेकिन पाकिस्तान जाकर मैच देखने के लिए जब छुट्टी नहीं मिली तो उन्होंने हमेशा के लिए नौकरी से छुट्टी कर ली.

'मिस यू तेंदुलकर लिख कर आउँगा'

उनके इस जुनून के बारे में सुधीर के परिवार वाले क्या सोचते हैं? कुछ हिचकिचाते हुए वे कहते हैं, ''घर तो बहुत कम जाना होता है. वे लोग नाराज़ ही रहते हैं. शादी के बारे में तो मैं सोच भी नहीं सकता.''

सुधीर कहते हैं कि सचिन का नाम जुड़ने के बाद से उन्हें एक ख़ास तरह की ज़िम्मेदारी का एहसास होता है. मसलन पहले सुधीर रेलवे में बिना टिकट भी सफ़र कर लिया करते थे लेकिन अब उन्हें लगता है कि उनके साथ सचिन का नाम जुड़ गया है और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. सचिन की आलोचना पर पहले वो लोगों से लड़ जाया करते थे पर अब वे नज़रअंदाज़ करना ही बेहतर समझते हैं.

सुधीर की ज़िंदगी सचिन के इर्द गिर्द घूमती है. लेकिन सचिन जब क्रिकेट से पूरी तरह संन्यास ले लेगें तो सुधीर की ज़िंदगी का क्या मक़सद रह जाएगा.

सुधीर दृढ़ आवाज़ में कहते हैं, ''इससे क्या फ़र्क पड़ता है. मैं हमेशा उनका समर्थन करता रहूँगा. आज मैं तेंदुलकर और 10 सीने पर और पीठ पर लिखकर आता हूँ, बाद में मिस यू तेंदुलकर लिखकर आऊँगा.''

सुधीर के इस सचिन प्रेम का एक नियम है- वो सचिन से सिर्फ़ मैच के टिकट लेते हैं लेकिन कभी उनसे पैसे नहीं लेते.

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