क्या होती है 'स्पॉट फ़िक्सिंग'?

'मैच फ़िक्सिंग' किसी ख़ास मैच का परिणाम (हार-जीत-ड्रा) पहले से तय करने को कहते हैं.

वहीं 'स्पॉट फ़िक्सिंग' मैच के किसी एक चरण या हिस्से में किसी एक या ज़्यादा खिलाड़ियों के प्रदर्शन को पहले से तय करने को कहते हैं.

पूरे मैच का परिणाम तय करने के बजाय स्पॉट फ़िक्सिंग में सट्टेबाज़ खेल के किसी एक ख़ास टुकड़े को पहले से तय करते हैं.

यह एक बॉल भी हो सकती है. जैसे कि कोई ख़ास गेंद 'नो बॉल' फेंकी जाएगी या 'वाइड'.

बाउंसर या यॉर्कर की भी स्पॉट फ़िक्सिंग की जा सकती है.

तरीके

यह भी तय किया जा सकता है किसी ख़ास गेंद पर या ओवर में बल्लेबाज़ कितने रन बनाएगा या गेंदबाज़ कितने रन देगा.

स्पॉट फ़िक्सिंग इस पर भी केंद्रित हो सकती है कि कोई ख़ास बल्लेबाज़ एक गेंदबाज़ द्वारा उसे फेंकी गई गेंदों पर कितने रन बनाता है.

बल्लेबाज़ के निश्चित रन बनाने, बोल्ड, कैच या रन आउट होने को भी पहले से तय किया जा सकता है.

सिर्फ़ इतना ही नहीं स्पॉट फ़िक्सिंग मैच के टॉस, टॉस के बाद बल्लेबाज़ी या गेंदबाज़ी के चयन, बल्लेबाज़ी-गेंदबाज़ी के लिए खिलाड़ियों के क्रम और पिच की जानकारी जैसी चीज़ों पर भी की जाती है.

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