धोनी की अगली परीक्षा अब वेस्ट इंडीज में

  • 25 जून 2013
क्रिकेट
Image caption भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर दिखाया कि चारों तरफ से पड़ने वाले दबाव का सामना कैसे किया जाए.

भारत ने इंग्लैंड को हराकर आईसीसी चैंम्पियंस ट्रॉफी अपने नाम कर ली है. टीम ने यह ट्रॉफी जीत कर ना सिर्फ क्रिकेट की दुनिया में अपना लोहा मनवाया, बल्कि यह संदेश देने में भी कामयाब रही कि उसमें किसी भी हालात में किसी भी टीम का सामना करने का दम है.

कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी और भारतीय टीम का आज सभी गुणगान कर रहे है और इस कहावत को भी सही साबित कर रहे है कि चढ़ते सूरज को सभी सलाम करते है.

यह वही टीम है जिसके कप्तान पर आईपीएल के दौरान कई आरोप लगे. कप्तान धोनी की टीम, चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक और बीसीसीआई के अध्यक्ष एन.श्रीनिवासन भी सवालों के घेरे में रहे.

सवाल शेष हैं

वास्तव में उन सवालो के जवाब धोनी ने ना तो तब दिए थे और ना ही इंग्लैंड पहुँचने के बाद. अब ऐसा तो नही है कि भारत की इतनी बडी जीत से उस समय उठे सवालो का कोई महत्व नही रह जाएगा या उन सवालो के जवाब नही मिलने चाहिए.

बस हुआ इतना है कि इस टीम ने दिखाया है कि चारों तरफ से पडने वाले दबाव का सामना किस तरह से किया जाना चाहिए.

अब भारत के सामने विदेशी पिचों पर शानदार प्रदर्शन करने का दबाव होगा. फिलहाल उनके सामने पहली चुनौती वेस्टइंडीज़ में शुक्रवार से शुरु होने वाली त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट सीरीज़ है. इसमें वेस्टइंडीज़ के अतिरिक्त भारत और श्रीलंका की टीमें भी भाग ले रही हैं.

11 जुलाई को फाइनल

Image caption वेस्टइंडीज़ की टीम में बड़े दिनों बाद क्रिस गेल अपनी ही ज़मीन पर खेलेंगे

त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट सीरीज़ का फाइनल 11 जुलाई को खेला जाएगा. फाइनल से पहले तीनो टीमें आपस में दो-दो मैच खेलेंगी.

वैसे तो भारत ने आईसीसी चैंम्पियंस ट्रॉफी में बेहद आसानी से ग्रुप मैच में वेस्टइंडीज़ को और उसके बाद सेमीफाइनल में श्रीलंका को भी मात दी. लेकिन क्रिकेट जानकारो और पूर्व क्रिकेट खिलाडियो की मानें तो पूरा भरोसा पाने के लिए भारत के सामने कडी परीक्षा की असली घड़ी अब आई है.

भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते है कि वाकई अब इस टीम के लिए एसिड टेस्ट जैसी स्थिति है. अब उस पर अच्छा खासा दबाव भी होगा. क्योंकि इन्होंने इतना शानदार प्रदर्शन किया है.

मनिंदर सिंह के अनुसार भारत के क्रिकेट प्रशंसक हमेशा टीम से इसी तरह की खुशिया देने की उम्मीद करते रहते है. ऐसा हमेशा कर पाना किसी भी टीम के लिए संभव नही है, और ना ही ऐसा हर समय होता है.

मनिंदर मानते हैं कि अब क्रिकेट जानकारो और प्रशंसको को चाहिए कि वह इन खिलाडियो के साथ तब भी धैर्य दिखाये जब वह अच्छा ना खेल सके, क्योंकि इस टीम में ज़्यादातर वे खिलाडी शामिल हैं जो 2015 के विश्वकप क्रिकेट टूर्नामेंट में नज़र आएंगे.

दमखम दिखाने का वक्त

लेकिन यह बात भी सही है कि अब वक्त आया है कि खिलाडी दिखाए कि उनमें कितना दमख़म है.

उदाहरण के लिए शिखर धवन ने अपने पहले टेस्ट मैच में 187 रन बनाए और उसके बाद चैंम्पियंस ट्रॉफी में भी दो शतक के साथ 'मैन ऑफ द सिरीज़' रहे.

अब शिखर पर उम्मीदों का दबाव होगा. वह एक-दो बार नाकाम भी होंगे, और तब पता चलेगा कि उनमें वास्तव में कितनी प्रतिभा है. अगर टीम कामयाबी के रास्ते से थोडा सा फिसलती है तो धैर्य रखे.

जहॉ तक त्रिकोणीय सीरीज़ की बात है तो वो तो अच्छी ही होगी. वेस्टइंडीज़ की पिचें भी भारत और श्रीलंका जैसी ही है. अपनी ही घरेलू पिचो से वेस्टइंडीज़ अच्छी तरह वाकिफ होगा और आम दर्शको और क्रिकेट प्रेमियो को भी आनंद आएगा, क्योंकि एक टीम तो विश्वकप और चैंम्पियंस ट्रॉफी की चैंम्पियन टीम है तो दूसरी विश्वकप फाइनल खेलने वाली टीम.

बोर्ड के साथ तनाव

Image caption शुक्रवार से शुरु होने वाली त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट सीरीज़ में मेंज़बान वेस्टइंडीज़ के अतिरिक्त भारत और श्रीलंका है.

इसके अलावा वेस्टइंडीज़ की टीम में बड़े दिनों बाद क्रिस गेल अपनी ही ज़मीन पर खेलेंगे क्योंकि इससे पहले अनुबंध को लेकर उनका बोर्ड से तनाव चल रहा था.

मनिंदर सिंह भारतीय क्रिकेट टीम की कामयाबी का श्रेय चयनकर्ताओं को भी देते हैं.

वे मानते हैं कि उन्होंने बडा ही ज़बरदस्त कदम उठाते हुए वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, ज़हीर खान, हरभजन सिंह और युवराज सिंह को बाहर का रास्ता दिखाया और युवा खिलाड़ियों पर भरोसा किया.

खिलाड़ियों ने भी अपनी ज़िम्मेदारी समझी. इसलिए पहली बधाई के हक़दार तो चयनकर्ता है.

पुराने खिलाड़ी

वहीं भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ नयन मोंगिया मानते है कि इस टीम ने जिस तरह का खेल दिखाया उससे किसी को भी पुराने खिलाडियों की याद तक नही आई. यह बडा ही सकारात्मक बदलाव है.

नयन मोंगिया के अनुसार जिस खिलाडी को जैसा भी मौक़ा मिला उसने उसका भरपूर फायदा उठाया. लगातार पॉच मैच उन्होने बेहद आसानी से जीते यह बहुत बडी बात है, और जहॉ तक कप्तान की बात है तो वह उतना ही अच्छा होता है जितनी अच्छी टीम होती है.

बीच में उन्होने कुछ सही निर्णय नही लिए लेकिन अब चयन में उनकी चलती है और वह खिलाडियो को पूरा समर्थन देते है, और जब ऐसा होता है तो खिलाडी का आत्मविश्वास भी बढ़ता है.

चैंम्पियंस ट्रॉफी जीतने से टीम जोश में है, लम्बे समय बाद गेंदबाज़ी में भी दम दिखा है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत वेस्टइंडीज़ में होने त्रिकोणीय सीरीज़ भी जीतेगा.

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