वेस्टइंडीज़ से भिड़ेगा भारत, गेल को झेल पाएँगे भारतीय गेंदबाज़?

  • 30 जून 2013
क्रिकेट
Image caption भारत ने हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की है

भारत ने इंग्लैंड को हराकर आईसीसी चैंम्पियंस ट्रॉफी अपने नाम कर ली है. अब भारतीय क्रिकेट टीम वेस्ट इंडीज में त्रिकोणीय एक दिवसीय क्रिकेट सीरीज खेल रही है. आज मुकाबला भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच है.

वेस्टइंडीज़ ने अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका को छह विकेट से हरा दिया है. क्रिस गेल ने 100 गेंदों में 109 रन जड़े हैं.

भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी जीत कर ना सिर्फ क्रिकेट की दुनिया में अपना लोहा मनवाया है, बल्कि वो यह संदेश देने में भी कामयाब रही कि उसमें किसी भी हालात में किसी भी टीम का सामना करने का दम है.

भारत के बारे में माना जाता रहा है कि वो विदेशी पिचों पर अच्छा नहीं करती. ऐसे में त्रिकोणीय सीरीज में भारत के सामने विदेशी पिचों पर शानदार प्रदर्शन करने का दबाव होगा.

चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय गेंदबाजों ने सधा हुआ प्रदर्शन किया है लेकिन क्रिस गेल जैसे तूफानी बल्लेबाज को हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

11 जुलाई को फाइनल

Image caption क्रिस गेल ने श्रीलंका के खिलाफ मैच में शतक जड़ा है

त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट सीरीज का फाइनल 11 जुलाई को खेला जाएगा. फाइनल से पहले तीनो टीमें आपस में दो-दो मैच खेलेंगी.

वैसे तो भारत ने आईसीसी चैंम्पियंस ट्रॉफी में बेहद आसानी से ग्रुप मैच में वेस्टइंडीज़ को और उसके बाद सेमीफाइनल में श्रीलंका को भी मात दी थी. लेकिन क्रिकेट जानकारों और पूर्व क्रिकेट खिलाडियों की मानें तो पूरा भरोसा पाने के लिए भारत के सामने कड़ी परीक्षा की असली घड़ी अब आई है.

भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते है कि वाकई अब इस टीम के लिए एसिड टेस्ट जैसी स्थिति है. अब उस पर अच्छा खासा दबाव भी होगा. क्योंकि इन्होंने इतना शानदार प्रदर्शन किया है.

मनिंदर सिंह के अनुसार भारत के क्रिकेट प्रेमी हमेशा टीम से इसी तरह की खुशियाँ देने की उम्मीद करते रहते हैं. ऐसा हमेशा कर पाना किसी भी टीम के लिए संभव नही है, और ना ही ऐसा हर समय होता है.

मनिंदर मानते हैं कि अब क्रिकेट जानकारों और प्रशंसको को चाहिए कि वह इन खिलाडियों के साथ तब भी धैर्य दिखाएं जब वह अच्छा ना खेल सकें, क्योंकि इस टीम में ज़्यादातर ऐसे खिलाडी हैं जो 2015 के विश्वकप क्रिकेट टूर्नामेंट में नज़र आएंगे.

दमखम दिखाने का वक्त

लेकिन यह बात भी सही है कि अब वक्त आया है कि खिलाड़ी दिखाएं कि उनमें कितना दमख़म है.

उदाहरण के लिए शिखर धवन ने अपने पहले टेस्ट मैच में 187 रन बनाए और उसके बाद चैंम्पियंस ट्रॉफी में भी दो शतक के साथ 'मैन ऑफ द सिरीज़' रहे.

अब शिखर पर उम्मीदों का दबाव होगा. वह एक-दो बार नाकाम भी होंगे, और तब पता चलेगा कि उनमें वास्तव में कितनी प्रतिभा है.

जहॉ तक त्रिकोणीय सीरीज की बात है तो वो तो अच्छी ही होगी. वेस्टइंडीज़ की पिचें भी भारत और श्रीलंका जैसी ही है. अपनी ही घरेलू पिचों से वेस्टइंडीज़ अच्छी तरह वाकिफ होगा और आम दर्शकों और क्रिकेट प्रेमियों को भी आनंद आएगा, क्योंकि एक टीम तो विश्वकप और चैंम्पियंस ट्रॉफी की चैंम्पियन टीम है तो दूसरी विश्वकप फाइनल खेलने वाली टीम.

पुराने खिलाड़ी

वहीं भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ नयन मोंगिया मानते है कि इस टीम ने जिस तरह का खेल दिखाया उससे किसी को भी पुराने खिलाडियों की याद तक नही आई. यह बडा ही सकारात्मक बदलाव है.

नयन मोंगिया के अनुसार जिस खिलाड़ी को जैसा भी मौक़ा मिला उसने उसका भरपूर फायदा उठाया. लगातार पॉच मैच उन्होने बेहद आसानी से जीते यह बहुत बड़ी बात है, और जहाँ तक कप्तान की बात है तो वह उतना ही अच्छा होता है जितनी अच्छी टीम होती है.

बीच में उन्होंने कुछ सही निर्णय नही लिए लेकिन अब चयन में उनकी चलती है और वह खिलाड़ियों को पूरा समर्थन देते है, और जब ऐसा होता है तो खिलाडी का आत्मविश्वास भी बढ़ता है.

चैंम्पियंस ट्रॉफी जीतने से टीम जोश में है, लम्बे समय बाद गेंदबाज़ी में भी दम दिखा है. भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद है कि भारत वेस्टइंडीज़ में होने वाली त्रिकोणीय सीरीज भी जीतेगा.

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