बारतोली या लिसिकी, कौन बनेगी विंबलडन की मलिका

  • 6 जुलाई 2013
बारतोली बनाम लिसिकी

विंबलडन को शनिवार को नई चैंपियन मिलने वाली है. महिला एकल फाइनल में आमने-सामने हैं जर्मनी की सबाइन लिसिकी और फ्रांस की मेरियन बारतोली.

(मरे बनाम जोकोविच: कौन बनेगा विजेता)

मैच भारतीय समयानुसार शाम 6.30 बजे शुरू होगा.

लिसिकी 23वीं वरीयता प्राप्त हैं. ये उनका पहला ग्रैंड स्लेम फाइनल है.

फाइनल तक के रास्ते में उन्होंने चौथे दौर में पांच बार की चैंपियन सरीना विलियम्स को हराया और सेमीफाइनल में चौथी वरीयता प्राप्त अग्नियेस्का रदवांस्का को हराया.

15वीं वरीयता प्राप्त बारतोली इससे पहले 2007 में विंबल़डन फाइनल में पहुंच चुकी हैं लेकिन तब उन्हें वीनस विलियम्स ने हरा दिया था.

(पिंकी उछालेगी सिक्का)

23 साल की लिसिकी और बारतोली चार बार भिड़ चुकी हैं जिसमें लिसिकी को तीन बार जीत हासिल हुई है.

लिसिकी, 1999 में सात बार की विजेता स्टेफी ग्राफ के फाइनल में पहुंचने के बाद, विंबलडन फाइनल में पहुंचने वाली पहली जर्मन महिला हैं.

लिसिकी ने कहा, "स्टेफी ग्राफ ने सेमीफाइनल से पहले मुझे शुभकामनाएं दी थीं. उन्होंने मुझसे कहा, जाओ और कर दिखाओ. मैं इस बात से बेहद खुश हूं."

लिसिकी की ताकत है उनका जोरदार खेल और विंबलडन का ग्रास कोर्ट इसके लिए उपयुक्त है. वैसे भी आमतौर पर जर्मन खिलाड़ियों का विंबलडन में अब तक काफी अच्छा प्रदर्शन रहा है.

लिसिकी कहती हैं कि वो विंबलडन चैंपियन बनने का सपना बचपन से देख रही हैं.

वो कहती हैं, "ये मेरे करियर का पहला फाइनल है. और इसके लिए विंबलडन से बेहतर कोई जगह हो ही नहीं सकती थी. मुझसे मैच का इंतज़ार ही नहीं हो पा रहा है."

दूसरी ओर 28 साल की बारतोली अपने पिछले फाइनल को याद करते हुए कहती हैं, "मैं 2007 में बिलकुल नई थी. उस वक्त किसी को भी मुझसे ज़्यादा उम्मीदें नहीं थीं. लेकिन इस बार मामला बिलकुल उलटा है."

(विंबलडन की इनामी राशि)

टूर्नामेंट में अपने अब तक के खेल के बारे में वो कहती हैं, "मुझे लगता है मैंने दबाव में अच्छा खेल दिखाया. और मैच दर मैच मेरे खेल में निखार आता चला गया."

सेंटर कोर्ट पर उनका उत्साह बढ़ाने के लिए उनके पिता भी मौजूद होंगे जो पहले उनके कोच थे.

विंबलडन से पहले बारतोली कठिन दौर से गुज़र रही थीं. वो फॉर्म में नहीं चल रही थीं और एड़ी की चोट से भी परेशान थीं.

फिर उन्हें वायरल से भी जूझना पड़ा था.

बारतोली मैच के दौरान बेहद उत्साही अंदाज़ में अपने प्वाइंट्स की खुशी मनाने के लिए दर्शकों के बीच मशहूर हैं.

उनके कोर्ट में नाचने और कूदने की अदा ने दर्शकों के बीच उन्हें खासा लोकप्रिय बना दिया है.

वो अपने इस अंदाज़ पर कहती हैं, "जब मैं छह या सात साल की थी, तब से ऐसी ही हूं. ऐसा करके मेरा मकसद अपने प्रतिद्वंद्वी को नाराज़ करना कतई नहीं होता. नाचना, कूदना ये मेरी फितरत है. मैं ऐसी ही रहूंगी. "

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