राजनीतिक सवाल और 'परवेज़ रसूल का क्रिकेट'

  • 9 जुलाई 2013
parvez rasool
Image caption रसूल ने इस सत्र में जम्मू कश्मीर के लिए सर्वाधिक विकेट लिए

परवेज़ रसूल भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने वाले भारत प्रशासित कश्मीर के पहले मुसलमान क्रिकेटर हैं. उन्हें 26 जुलाई से शुरू हो रहे जिम्बाब्वे के वनडे दौरे के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया है.

24 साल के स्पिनर ऑलराउंडर रसूल भारतीय टीम में चयन के बाद से ही अपना मोबाइल अक्सर बंद रखते हैं क्योंकि लोग उनसे फ़ोन करके उनके राजनीतिक विश्वास, विचारधारा और भारत के लिए खेलने के बारे में सवाल पूछते हैं.

उन्होंने कहा, “जब लोग मुझसे राजनीतिक सवाल पूछते हैं तो मेरे लिए जवाब देना मुश्किल हो जाता है. इन सवालों का मेरे क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं है.”

कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान दोनों दावा करते हैं और यहां 1989 से भारतीय शासन के ख़िलाफ़ सशस्त्र संघर्ष चल रहा है.

भारत प्रशासित कश्मीर में केवल दो अंतरराष्ट्रीय मैच हुए हैं. 1983 में वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ दूसरे मैच के दौरान कुछ गुस्साए स्थानीय लोगों ने पिच खोद डाली थी. अलगाववादियों के समर्थकों ने भारतीय टीम के ख़िलाफ़ नारेबाजी की थी और टीम इंडिया वह मैच हार गई थी.

सपोर्ट

मुसलमान बहुल कश्मीर घाटी के क्रिकेट प्रशंसक भारत के ख़िलाफ़ खेलने वाली टीम का समर्थन करते हैं.

श्रीनगर से क़रीब 44 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित रसूल के गांव बिजबेहड़ा के एक दुकानदार तारिक़ कहते हैं, “हम चाहते हैं कि रसूल अच्छा खेले लेकिन उनकी टीम हार जाए खासकर पाकिस्तान के साथ मैच में."

1983 के उस मैच में भारतीय टीम के कप्तान रहे कपिल देव का मानना है कि राष्ट्रीय टीम में रसूल के चयन से कश्मीर में क्रिकेट को बढ़ावा मिल सकता है.

Image caption राष्ट्रीय टीम में चयन के बाद उन्हें सभी से शुभकामनाएं मिल रही हैं

उन्होंने बीबीसी से कहा, “पिछले 20 सालों में कश्मीर को बहुत कुछ सहना पड़ा है और उम्मीद है कि रसूल की कहानी आने वाले सुनहरे भविष्य की शुरुआत है.”

उन्होंने कहा, “छोटे शहरों से आए क्रिकेटर पिछले एक दशक से भारतीय क्रिकेट में छाए हुए हैं. जैसे महेंद्र सिंह धोनी राष्ट्रीय टीम में खेलने और कप्तानी संभालने वाले रांची के पहले खिलाड़ी हैं. मुझे उम्मीद है कि रसूल जम्मू कश्मीर के लिए यही उपलब्धि दोहराएंगे.”

रसूल पहले ही अपनी पहचान बना चुके हैं. 2012-13 के घरेलू सत्र में उन्होंने 33 विकेट लिए और दो शतकों के साथ 549 रन बनाए. वो जम्मू कश्मीर की तरफ से सबसे ज़्यादा विकेट लेने और रन बनाने वाले खिलाड़ी थे. रसूल पिछले सीज़न में सर्वाधिक विकेट लेने वाले स्पिन गेंदबाज़ो की सूची में तीसरे थे.

सफर

उन्होंने फरवरी में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक अभ्यास मैच में सात विकेट लिए थे. वो आईपीएल में खेलने वाले पहले कश्मीरी मुसलमान थे और इस साल पुणे वारियर्स की टीम में शामिल थे.

67 टेस्टों में 266 लेने वाले दिग्गज स्पिनर बिशन सिंह बेदी कहते हैं, “ऑर्थोडॉक्स ऑफ़ स्पिन करने की उनकी क्षमता ही उनकी असली ताक़त है. वो अच्छे ऑलराउंडर हैं. उन्होंने जिम्बाब्वे दौरे पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा मौका मिला है.”

लेकिन राष्ट्रीय टीम में चयन तक का उनका सफर आसान नहीं रहा.

इस साल की शुरुआत में जब उन्हें भारत ए टीम में चुना गया था तो कुछ मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया था कि कश्मीरियों को भारत के क़रीब लाने की राजनीतिक मंशा से ऐसा किया गया है.

भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसके जवाब में ट्विटर पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी रिपोर्ट परवेज़ और उनके संघर्ष की बेइज्जती है. साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह की रिपोर्ट कश्मीर के लोगों की भी तौहीन है जिन्हें जबरदस्ती थोपे गए आइकंस की ज़रूरत नहीं है.

साल 2009 में अंडर-22 टीम के साथ यात्रा करते हुए उन्हें बंगलौर हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था. उन पर आरोप था कि वो अपने किटबैग में विस्फोटक ले जा रहे थे.

कोच

Image caption रसूल ऑलराउंडर हैं

टीम के कोच अब्दुल क़यूम बागो ने कहा कि रसूल और टीम के एक दूसरे खिलाड़ी ने खो़जी कुत्तों के उनके किट की जांच करने पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ी अपने बैग में पवित्र क़ुरान ले जा रहे थे. पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

बागो का कहना है कि 11 साल की उम्र में रसूल बल्लेबाज़ और विकेटकीपर बनना चाहते थे. उन्होंने कहा, “उन्होंने गेंदबाज़ी करते देखने के बाद मैंने उन्हें स्पिनर बनने की सलाह दी थी. उनके बारे में सबसे अच्छी बात ये है कि वो हमेशा दूसरों की सलाह को ध्यान से सुनते हैं.”

सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके रसूल के पिता ग़ुलाम रसूल कहते हैं कि उन्होंने कभा नहीं सोचा था कि उनका बेटा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनेगा. वो अपने बेटे को कश्मीर घाटी की हिंसक राजनीति से दूर रखना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “मैं राजनीति पर बात नहीं करना चाहता हूं. कुछ लोग राजनीति करते हैं, कुछ लोग क़िताबें पढ़ते हैं और कुछ खेलों में हिस्सा लेते हैं. मेरा बेटा क्रिकेटर है कोई राजनेता नहीं. मैं चाहता हूं कि लोग इस बात को समझें.”

रसूल का कहना है कि वो टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “भारत के लिए खेलना मेरे लिए गर्व की बात है.”

(नसरून मीर श्रीनगर के स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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