महेंद्र सिंह धोनी के पास आखिर कौन सी जादू की छड़ी है?

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी

पिछले दिनो इंग्लैंड में आखिरी बार आयोजित की गई आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी और वेस्टइंडीज़ में खेली गई त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट सीरीज़ जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्यों ने वतन वापस लौटना शुरू कर दिया है.

ख़बर यह भी है कि भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अभी इंग्लैंड में ही हैं और कुछ दिनों की छुट्टियाँ बिताकर वे स्वदेश लौटेगे.

वैसे भी उन्हें छुट्टियाँ मनाने का पूरा हक़ है क्योंकि वह ज़िम्बाबवे का दौरा करने वाली भारतीय टीम में शामिल नहीं किए गए हैं.

धुरंधर धोनी

भारत जिम्बाबवे में पाँच एकदिवसीय क्रिकेट मैच खेलेगा जिसकी शुरूआत हरारे में 24 जुलाई को होने वाले पहले मैच से होगी जबकि सीरीज़ का पाँचवा और आखिरी एकदिवसीय मैच बुलावायो में तीन अगस्त को खेला जाएगा.

इसी दौरान भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की चर्चा चारों तरफ है.

कुछ समय पहले जब इंग्लैंड ने भारत को टेस्ट सीरीज़ में मात दी थी तब तमाम क्रिकेट पंडितो ने विकेट को लेकर उनकी ज़िद और मनमाने आधार पर लिए गऐ फ़ैसलों की जमकर आलोचना की थी.

सकारात्मक परिणाम

यहाँ तक कि उन्हें कप्तानी से हटाए जाने की मांग भी की गई लेकिन अब आखिरकार धोनी की कप्तानी में ऐसा क्या परिवर्तन आ गया कि सभी उनके मुरीद हो गए है? धोनी ने चैम्पियंस ट्रॉफी और वेस्टइंडीज़ में क्या कुछ ख़ास किया जो उन्हे दूसरे कप्तानों से अलग करता है?

धोनी का धमाका

इस सवाल के जवाब में भारत के पूर्व फिरकी गेंदबाज मनिंदर सिंह कहते हैं, "धोनी भाग्य के तो धनी हैं ही लेकिन उनमें गुण भी बहुत है. वो बेफ़िक्र होकर बल्लेबाज़ी, विकेटकीपिंग और कप्तानी भी करते हैं और कुछ ऐसे फ़ैसले लेते है जो लोगो को चौंकाते है. उनकी सोच है कि जब तक मैं सौ प्रतिशत दे रहा हूँ तब तक चाहे कोई भी मेरी कितनी ही आलोचना करे मुझे कोई डर नही है. जब किसी खिलाड़ी का रवैया इस तरह का हो जाए तो परिणाम भी सकारात्मक या फिर मनमुताबिक़ आने शुरु हो जाते है."

उन्होंने कहा, "वही कुछ हो रहा है और सबसे अच्छी बात है कि युवा खिलाड़ियों को जिस अंदाज़ में वह साथ लेकर चलते है या मैदान में उनका उपयोग करते हैं. वह एक क़ाबिले तारीफ बात है क्योंकि युवा खिलाड़ियों को एक ऐसा कप्तान चाहिए जो उन पर भरोसा कर सके, उन पर दबाव न आने दे और जब कप्तान निडर होगा तो टीम भी वैसी ही होगी जैसी इस समय भारतीय टीम दिख रही है."

त्रिकोणीय सीरीज़

इसके अलावा जब भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैचों में हार रही थी तब उनकी उंगलियों में चोट थी. ऐसे में कोई और होता तो शायद वह आराम का बहाना लेकर टीम से बाहर बैठ जाता. अभी पिछले दिनों वेस्टइंडीज़ में वो चोटिल हो गए थे लेकिन उसके बाद फ़ाइनल खेल कर अपने दम पर उन्होंने भारत को जिताया.

जिम्बाबवे दौरे के लिए टीम

सबसे बडी बात ये है कि पहले मैच में घायल होने के बाद भी वो वेस्टइंडीज़ में ही टिके रहे जबकि उनकी जगह अंबाती रायडू को वहाँ भेजा जा चुका था. जब कोई हार या जीत की परवाह किये बिना हर परिस्थिति का सामना करता है तो फिर ऊपर वाला भी उस पर मेहरबान होना शुरू हो जाता है.

वहीं दूसरी तरफ भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन कहते हैं, "इन दिनो धोनी ने अपने खेल और कप्तानी में निरंतरता दिखाई है. पहले तो ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सीरीज़ में भारत में ही मात दी. उसके बाद चैम्पियंस ट्रॉफी में दुनिया की बडी-बडी टीमों को हराया. हालांकि इंग्लैंड पहुंचने से पहले कोई भारतीय टीम को भाव नही दे रहा था फिर वेस्टइंडीज़ में त्रिकोणीय सीरीज़ में जो कुछ उन्होने किया, वह सभी ने देखा ही है."

उन्होंने कहा, "इस समय भारतीय क्रिकेट टीम का अच्छा समय चल रहा है लेकिन पूरे विश्व में हम सबसे अच्छे और बेहतर है अभी कहना जल्दबाज़ी होगी. भारतीय क्रिकेट टीम को अभी दक्षिण अफ्रीका का दौरा करना है जहॉ दूध का दूध और पानी का पानी होगा लेकिन फ़िलहाल तो धोनी का कोई जवाब नही है."

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