तीस साल बाद भिड़े पाकिस्तान और अफगानिस्तान

  • 20 अगस्त 2013

अफ़गानिस्तान ने पाकिस्तान को एक दोस्ताना फ़ुटबॉल मैच में 3-0 से हरा दिया. ये मैच इसलिए ख़ास था कि क्योंकि करीब एक दशक के अंतराल पर अफ़गानिस्तान में कोई अंतरराष्ट्रीय मैच खेला गया.

इतना ही नहीं, दोनों पड़ोसी देशों के बीच तीस साल में पहली बार कोई फ़ुटबॉल मैच खेला गया.

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इस मैच से इस बात के संकेत भी मिले हैं कि कई दशकों से संघर्ष झेल रहे अफ़गानिस्तान में जनजीवन अब पटरी पर लौट रहा है.

इस फ़ुटबॉल मैच के दौरान दोनों देशों के लोग राष्ट्रीय जज़्बे से भरे थे. टीवी पर मैच का सीधा प्रसारण होने के चलते इसे लाखों लोगों ने घर बैठे हुए भी देखा.

काबुल स्थित बीबीसी संवाददाता केरेन एलन के मुताबिक इस दोस्ताना मैच को अफ़गानिस्तान में बदलाव का बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

खचाखच भरा हुआ स्टेडियम

काबुल के गाज़ी स्टेडियम का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस था. इस गर्मी में भी हज़ारों लोग फ़ुटबॉल मैच देखने पहुंचे थे. ये दर्शक अपनी अपनी टीमों का उत्साह बढ़ा रहे थे.

टीम के खिलाड़ियों ने पोलियो उन्मूलन अभियान के लोगो वाली टीशर्ट पहनी हुई थीं.

कई स्थानीय दर्शकों ने अपने चेहरे को अफ़गानिस्तान के झंडे के अंदाज़ में रंग लिया था. पूरी तरह से पैक होने के बाद भी स्टेडियम में दर्शक काफी अनुशासित दिखे.

इन दर्शकों में अधिकांश की राय में दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए खेल अहम भूमिका निभा सकता है.

काबुल के रेस्टोरेंट और कॉफी शॉप में भी हज़ारों फैंस ने टीवी सेट पर बैठ कर मैच देखा. इसमें दुकानदार, छात्र और कामकाजी लोगों की जमात शामिल थी.

अफ़गानिस्तान की ओर से तीसरा गोल होने के बाद टीवी कमेंटेटर भी अपने जोश पर काबू नहीं रख सके और कमेंट्री के दौरान कहा, “काश मेरे पंख होते तो मैं मैदान के ऊपर उड़ान भर आता. मुझे एक अफ़गान होने पर गर्व है.”

फ़ुटबॉल से नई शुरुआत

अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के राजनीतिक नेता अगले सप्ताह बेहद अहम शांति वार्ता के सिलसिले में मिल रहे हैं.

अफ़गानिस्तान फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन के महासचिव जेनरल सैयद अगाज़ादा ने फ़ीफ़ा डॉट कॉम से कहा है, “यह बताता है कि हम लोग काफी मुश्किल समय से सामान्य जन जीवन की ओर बढ़ रहे हैं.”

अगाजाद ने कहा, “फ़ुटबॉल के नज़रिए से अफ़गानिस्तान में संस्थागत और आधारभूत ढांचे विकसित हुआ है और हम मानते हैं कि यह खेल हमारे देश में कहीं बड़ी भूमिका निभा सकता है.”

वहीं पाकिस्तान फ़ुटबॉल फेडरेशन के महासचिव जनरल अहमद यार ख़ान लोधी ने उम्मीद जताई है कि फ़ुटबॉल के जरिए दोनों देशों के बीच रिश्ते सहज होंगे.

पाकिस्तान के प्रमुख कोच जाविसा मिलोसावलजेव ने बीबीसी से बताया कि उनका उद्देश्य अपने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव दिलाना था. उन्होंने बीबीसी से कहा, “पाकिस्तान में भी मुश्किल का दौर है. हमने पाकिस्तान में एक भी मैच नहीं खेला है.”

1996 से 2001 के तालिबानी शासन के दौरान अफ़गानिस्तान में फ़ुटबॉल पर पाबंदी नहीं थी लेकिन तालिबानी गाजी स्टेडियम का इस्तेमाल लोगों को सजाएं देने और पत्थर मारकर मौत देने जैसी घटनाओं के लिए करते थे.

अफ़गानिस्तान की विश्व रैंकिंग 139 है और इससे पहले 2003 में तुर्केमेनिस्तान के ख़िलाफ़ उसने अपना अंतिम मैच खेला था.

पाकिस्तान की रैंकिंग अफ़गानिस्तान से भी 28 स्थान नीचे है और इसने 1977 के बाद पहली बार काबुल में मैच में हिस्सा लिया है.

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