भारत और मलेशिया का अहम मुक़ाबला

भारतीय हॉकी टीम

भारतीय हॉकी टीम ने मलेशिया में खेले जा रहे एशिया कप के सेमीफ़ाइनल में अपनी जगह बनाने के बाद अगले साल होने वाले विश्वकप हॉकी टूर्नामेंट की तरफ़ एक और क़दम बढ़ा दिया है.

सेमीफ़ाइनल में भारत का सामना मेज़बान मलेशिया से होगा. दूसरा सेमीफ़ाइनल पाकिस्तान और पहले ही विश्वकप का टिकट हासिल कर चुकी दक्षिण कोरिया से होगा.

दोनों सेमीफ़ाइनल मैच शुक्रवार को खेले जाएंगे.

ध्यानचंद की तकरार

उल्लेखनीय है कि भारत के सामने अगले साल हॉलैंड में होने वाले विश्वकप हॉकी टूर्नामेंट में जगह बनाने की चुनौती है और उसे हर हाल में यह टूर्नामेंट जीतना होगा. पाकिस्तान के साथ भी मामला कुछ ऐसा ही है.

एशियाई हॉकी के दो महारथी आज इस हालत में पहुँच चुके हैं कि उन्हें विश्व कप टूर्नामेंट में जगह बनाने के लिए नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं.

भारत ने सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले ओमान को 8-0, पूर्व विजेता दक्षिण कोरिया को 2-0 और बांग्लादेश को 9-1 से हराया.

पहली परीक्षा

भारतीय हॉकी टीम जब कुछ सीनियर खिलाड़ियों की ग़ैरमौजूदगी में मलेशिया पहुंची थी तब शायद ही टीम पर किसी को इतना भरोसा रहा होगा. लेकिन जैसे ही भारत ने दक्षिण कोरिया को मात दी लोगों का भरोसा टीम पर जमने लगा.

भारत सेमीफाइनल में

भारतीय टीम ने अभी तक केवल एक गोल खाया है. इसमें यकीनन टीम के गोलरक्षक और उपकप्तान पीआर श्रीजेश की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है क्योंकि उन्होंने कई अवसरों पर शानदार बचाव किए.

सेमीफाइनल तक की राह में भारत को विशेष कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा. भारतीय टीम के लिए सबसे अच्छी बात यह रही कि उसके युवा खिलाड़ी पहली परीक्षा में कामयाब रहे.

मालक सिंह पिछले दिनों हॉकी इंडिया लीग में उभरकर सामने आए थे और उन्हें इसके बाद सुल्तान अज़लान शाह कप हॉकी टूर्नामेंट में खेलने का अवसर भी मिला था.

उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम की कप्तानी का भार दानिश मुज्तबा के कंधों पर था. तब चयनकर्ताओं की सोच यही थी कि इनके साथ-साथ कुछ और खिलाड़ियों को मलेशिया का अनुभव मिल सके.

टीम की समस्या

हालांकि यह बात और है कि एशिया कप शुरू होने से पहले ही दानिश मुज्तबा, एसवी सुनील, गुरविंदर सिंह चांदी और आकाशदीप घायल हो गए जिसकी वजह से टीम की आक्रामक पंक्ति बेहद कमज़ोर हो गई.

एशिया कप में जीत...

ऐसे नाज़ुक समय में भारतीय टीम की समस्या तब और बढ़ गई जब मलेशिया पहुंचते-पहुंचते टीम के कप्तान सरदार सिंह भी बीमार हो गए और वह पहला मैच खेलने मैदान पर नहीं उतर पाए.

भारतीय टीम ने उस वक्त राहत की सांस ली जब अगले मैचों में वे फिट होकर मैदान पर उतरे और उन्हें पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ रुपिंदर पाल सिंह और अनुभवी वीआर रघुनाथ का साथ मिला जिन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ गोल करने का कोई भी अवसर नहीं गंवाया.

लेकिन अब मुक़ाबला मेज़बान मलेशिया से है जो अपने घरेलू मैदान पर अपने ही लोगों के सामने जीत हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगी. मलेशिया के सामने भी विश्वकप में जगह बनाने का दबाव है इसलिए इस मुक़ाबले में दोनों टीमों के बीच ज़ोरदार संघर्ष होगा.

वहीं दूसरे सेमीफाइनल में कोरिया और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे जहाँ पाकिस्तान के लिए भी बहुत कुछ दांव पर है.

इसके बाद ही पता चलेगा कि एक सितंबर को होने वाले फाइनल में कौन सी दो टीमें जगह बना पाती हैं.

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