आख़िर टोकियो ने कैसे मारी बाज़ी?

  • 10 सितंबर 2013
टोकियो ओलंपिक

टोकियो ने आख़िरकार इस्तानबुल को आसानी के पछाड़ते हुए 2020 ओलंपिक की मेजबानी हासिल कर ली.

जापान की राजधानी को दूसरे दौर में 60 वोट मिले जबकि इस्तानबुल 36 वोट ही ले पाया.

लेकिन चार साल पहले मामला बिल्कुल अलग था. तब टोकियो ने 2016 ओलंपिक की मेजबानी के लिए अपना दावा पेश किया था मगर उसे दूसरे दौर में महज 20 वोट मिले थे और वह ब्राज़ील को शहर रियो डी जनेरो से हार गया था.

टोकियो ने पिछले अनुभव से सबक लेते हुए इस बार पूरी तैयारी के साथ अपना दावा पेश किया. उसकी समझ में आ गया था कि तकनीकी रूप से सुदृढ़ बोली लगाना ही काफी नहीं है बल्कि आपको दूसरों को प्रेरित भी करना होता है.

टोकियो करेगा 2020 ओलंपिक खेलों की मेजबानी

प्रस्तुति

शनिवार रात टोकियो की प्रस्तुति अपने इस मकसद को पूरा किया. इसमें न केवल आर्थिक और राजनीतिक ताक़त पर ज़ोर दिया गया था बल्कि खेलों के लिए एक व्यापक योजना का भी उल्लेख किया गया था.

जापान के राजकुमार हिसाको की म़ौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्यों को प्रेरित किया लेकिन टोकियो की जीत से असली नायक रहे प्रधानमंत्री शिंजो आबे.

फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से रेडियोधर्मी जल के रिसाव का मुद्दा टोकियो की राह को रोड़ा बन सकता था लेकिन आबे ने अपनी गरिमामयी भाषण से आईओसी के सदस्यों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

उन्होंने कहा कि फुकुशिमा में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. उनके इस ऐलान ने टोकियो पर से संदेह के बादलों को हटा दिया.

लेकिन दूसरी क्या वजहें थी जो टोकियो के पक्ष में गईं?

दावेदारी

इसमें कोई संदेह नहीं है कि सॉची और रियो के अनुभवों को देखते हुए आईओसी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी. आईओसी के मूल्यांकन आयोग द्वारा जून में किए गए तकनीकी आकलन में टोकियो की दावेदारी को नंबर वन रखा गया था.

जापान में ओलंपिक मेजबानी मिलने का जश्न

जापान के स्थापित स्पोर्ट्स और मीडिया मार्केट ने भी टोकियो के पक्ष में काम किया और इससे इस बात को आसानी से समझा जा सकता है कि टोकियो कैसे सबसे पसंदीदा विकल्प बना.

कुवैत के शाही घराने से ताल्लुक रखने वाले शेख अहमद अल फहद अल सबाह का समर्थन भी टोकियो के काम आया. अल सबाह 1992 से आईओसी का सदस्य होने के साथ-साथ शक्तिशाली एसोसिएशन ऑफ़ नेशनल ओलंपिक कमेटीज़ और एशिया ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष हैं.

माना जा रहा है कि आईओसी में उनका रुतबा लगातार बढ़ता जा रहा है और उनके समर्थन के कारण ही जर्मनी के थॉमस बाख को मंगलवार को होने वाले आईओसी अध्यक्ष चुनाव में जीत का दावेदार माना जा रहा है.

अल सबाह टोकियो की जीत की खुशी में ब्यूनस आयर्स के शेरेटन होटल में हुई पार्टी में शामिल थे.

कमज़ोरी

टोकियो की जीत का एक कारण मेड्रिड की नाकामी भी रही. मेड्रिड आईओसी सदस्यों को यह समझाने में नाकाम रहा कि स्पेन की अर्थव्यवस्था ओलंपिक का खर्च वहन करने की स्थिति में है.

यूरोजोन संकट के कारण स्पेन पर भारी क़र्ज चढ़ा हुआ है. मेड्रिड ने ओलंपिक का बजट घटाकर दो अरब डॉलर कर दिया था लेकिन यह शहर आईओसी को नहीं लुभा पाया.

मेड्रिड को इस बात का भी नुकसान हुआ क्योंकि 2024 ओलंपिक के लिए यूरोप के कई शहर मेजबानी पाने की होड़ में हैं. इनमें पेरिस और रोम सबसे आगे हैं.

ऐसे में यूरोप से आने वाले कई सदस्यों ने अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मेड्रिड से किनारा कर लिया.

जहां तक तुर्की के शहर इस्तानबुल का सवाल है तो हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों और डोपिंग के कारण उसकी दावेदारी को झटका लगा.

तु्र्की की दलील थी कि उसे ओलंपिक की मेजबानी मिलने से दो महाद्वीपों यूरोप और एशिया का मिलन होगा. लेकिन उसे दोनों तरफ का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला.

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