श्रीनिवासन चुनाव लड़ सकते हैं, पदभार नहीं संभाल सकते: सुप्रीम कोर्ट

Image caption श्रीनिवासन के अध्यक्ष बनने पर अदालती रुकावट

सुप्रीम कोर्ट ने एन. श्रीनिवासन से साफ कर दिया कि वे बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन अगर वे जीत भी जाएँगे तो भी तुरंत पदभार ग्रहण नहीं कर सकेंगे.

क्रिकेट एसोसिएशऩ ऑफ बिहार ने सुप्रीम कोर्ट में श्रीनिवासन के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी, क्योंकि उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन के ख़िलाफ़ कथित तौर पर आईपीएल में फिक्सिंग करने का मामला है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, '' चुनाव हो सकते हैं, लेकिन वह कार्यभार ग्रहण नहीं कर सकते, जब तक कि मामले का फ़ैसला नहीं हो जाता.''

श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन उन तमाम अधिकारियों, खिलाड़ियों और बुकीज़ में शामिल हैं, जिनके खिलाफ़ आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं. बीसीसीआई द्वारा संचालित आईपीएल में इस कांड के उज़ागर होने के बाद देशभर में सनसनी फैल गई थी.

तब श्रीनिवासन ने अस्थायी तौर पर खुद को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से अलग कर लिया था और जगमोहन डालमिया काम संभाल रहे थे.

पर्दे के पीछे सक्रिय रहे श्रीनिवासन

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस व्यवस्था के बावजूद पर्दे के पीछे श्रीनिवासन ने बोर्ड की सत्ता की डोर कमोवेश अपने हाथ में रखनी जारी रखी.

68 वर्षीय श्रीनिवासन वर्ष 2011 में बीसीसीआई के प्रमुख बने थे.

Image caption बीसीसीआई की एजीएम पर हैं सबकी नज़रें

श्रीनिवासन का कहना है कि कथित फिक्सिंग कांड के लिए उन पर आरोप नहीं लगाया जा सकता.

मयप्पन के ख़िलाफ़ जब फिक्सिंग के आरोप लगे थे तब वह चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाइजी के टीम प्रिंसिपल थे, जिसकी मालिक श्रीनिवासन द्वारा चलाई जाने वाली इंडियन सीमेंट्स कंपनी है.

बिहार एसोसिएशन, जो बीसीसीआई का हिस्सा नहीं है, श्रीनिवासन की दोबारा वापसी का विरोध कर रही है.

वर्ल्ड क्रिकेट के राजस्व में 70 फीसदी का हिस्सा होने के कारण बीसीसीआई दुनिया का सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड है और उसके अध्यक्ष को सबसे ताकतवर माना जाता है. वर्ल्ड क्रिकेट के तमाम फैसले बिना उसकी मर्जी के नहीं लिये नहीं जा सकते.

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