श्रीनिवासन बीसीसीआई में वापस मगर जांच से रहेंगे दूर

  • 8 अक्तूबर 2013
एन श्रीनिवासन

सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन को बीसीसीआई अध्यक्ष का कामकाज संभालने की इजाज़त दे दी है लेकिन साथ ही निर्देश दिए हैं कि वो स्पॉट फ़िक्सिंग मामले की जांच से दूर रहें.

कोर्ट ने आईपीएल में स्पॉट फ़िक्सिंग की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है जिसकी अध्यक्षता एक पूर्व जज कर रहे हैं.

इससे पहले कोर्ट ने 27 सितंबर को कोर्ट ने कहा था कि श्रीनिवासन अध्यक्ष पद का चुनाव तो लड़ सकते हैं लेकिन पद नहीं संभाल सकते.

चेन्नई में 29 सितंबर को हुई बीसीसीआई की बैठक में श्रीनिवासन दोबारा अध्यक्ष चुने गए थे.

अलग चलेगी जांच

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता में मैच फ़िक्सिंग मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है.

कोर्ट ने इस समिति से चार महीने में रिपोर्ट सौंपने को कहा है.

बीसीसीआई के एक वकील ने बताया कि कोर्ट का ये फ़ैसला तब आया जब श्रीनिवासन ने जांच में दखल न देने का आश्वासन दिया.

मुद्गल समिति श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स के मालिकों की भूमिका की जांच करेगी.

समिति की जांच पुलिस की जांच से अलग चलेगी जिसने कई सटोरियों, खिलाड़ियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए हैं.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कमेटी से जांच करवाने के बीसीसीआई के सुझाव को ख़ारिज कर दिया था.

Image caption श्रीनिवासन के दामाद मयप्पन को मई में गिरफ़्तार किया गया था.

श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन उन तमाम अधिकारियों, खिलाड़ियों और सट्टेबाज़ों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ़ आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं.

आईपीएल में इस कांड के उज़ागर होने के बाद देश भर में सनसनी फैल गई थी.

मयप्पन के ख़िलाफ़ जब फिक्सिंग के आरोप लगे थे तब वह चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाइजी के टीम प्रिंसिपल थे. चेन्नई सुपरकिंग्स की मालिक श्रीनिवासन की कंपनी इंडियन सीमेंट्स है.

मयप्पन का नाम सामने आने के बाद एन श्रीनिवासन को अध्यक्ष के रूप में नियमित कामकाज से अलग होना पड़ा था. इस दौरान उनकी जगह जगमोहन डालमिया बोर्ड देख रहे थे.

हालांकि श्रीनिवासन का कहना है कि कथित फिक्सिंग कांड के लिए उन पर आरोप नहीं लगाया जा सकता.

बीसीसीआई के बनाए जांच पैनल के सदस्यों हाईकोर्ट जज टी जयराम छोटा और आर बालासुब्रह्मण्यम की रिपोर्ट में श्रीनिवासन को क्लीन चिट देते हुए कहा गया था कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया.

इसके बाद क्रिकेट एसोसिएशऩ ऑफ बिहार ने सुप्रीम कोर्ट में श्रीनिवासन के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी. हालांकि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बिहार को बीसीसीआई से मान्यता हासिल नहीं है.

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