भारतीय गेंदबाज़ी की हालत पतली क्यों ?

मोहाली में भारत के तेज़ गेंदबाज ईशांत शर्मा ने पारी के 48वें ओवर में 30 रन क्या लुटाए कि वह पूरे भारतवर्ष के क्रिकेट प्रेमियों की नज़र में मानो खलनायक बन गए.

ईशांत शर्मा पर चारों तरफ़ से हो रही आलोचनाओं की मार के बीच उनके कोच श्रवण कुमार का कहना है कि अभ्यास में कमी के कारण उनके आत्मविश्वास पर फर्क पड़ा है.

कोच के मुताबिक, "ईशांत की तन्मयता में भी कमी आई है. उनकी गेंदबाज़ी एक्शन में थोडा परिवर्तन हुआ है. टेक्निकल रूप से देखे तो ईशांत इन दिनों ओपन चेस्ट गेंदबाज़ी कर रहे हैं, यानि गेंदबाज़ी करते समय उनका सीना बल्लेबाज़ के सामने होता है. इस वजह से उनकी कलाई भी थोडा घूम जाती है."

श्रवण कुमार कहते हैं कि इसका नुकसान उन्हें यह हुआ है कि गेंद सीम यानि सिलाई से पिच नहीं हो रही है और घूमती हुई जा रही है.

मोहाली में अपने बल्ले से धुंआधार 139 रन बनाकर वहाँ शतक बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज़ बनने वाले भारत के महेंद्र सिंह धोनी की कप्तान की पारी भी गेंदबाज़ो की नाकामी के नीचे दबकर रह गई थी.

उन्होंने बाद में शिकायती लहज़े में कहा था कि हमारे गेंदबाज़ो के पास यॉर्कर फेंकने का हुनर नहीं है.इसे लेकर श्रवण कुमार कहते हैं किईशांत शर्मा को यॉर्कर करने के लिए अपने गेंदबाज़ी रनअप की रफ़्तार को थोडा कम करना पड़ेगा.

ईशांत के कोच का मानना है, "ऐसा करने से उन्हें यह सोचने का समय भी मिलेगा कि वह बल्लेबाज़ को कहाँ गेंद फ़ेंके. बहुत ज़्यादा तेज़ भागने से शरीर का कंट्रोल समाप्त हो जाता है. इससे पहले भी ईशांत शर्मा को ऐसी ही समस्या थी और पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ इमरान खान से लेकर भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ मनोज प्रभाकर ने तब कहा था कि इन्हें अपने कोच के पास जाना चाहिए. तब हमने इनके गेंदबाज़ी एक्शन को सुधारा था."

'टवेन्टी-20 का असर'

दूसरी तरफ श्रवण कुमार यह भी कहते हैं कि हाल तो सभी गेंदबाज़ो का ही ऐसा है ऑस्ट्रेलिया के आलराउंडर जेम्स फॉक्नर ने जिस तरह से उनकी गेंदों की बघिया उधेडी उसे लेकर क्रिकेट विशेषज्ञ भी हैरान है.

ऐसा नहीं है कि ईशांत शर्मा दुनिया के ऐसे पहले गेंदबाज़ है जिनके एक ओवर में इतने रन बने, दरअसल जिस तरह से उनकी लाइन और लैंथ थी उसने सबको हैरान किया.

भारत दौरे पर आई इस ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बड़े ही निष्पक्ष रूप से क्या तेज़ क्या स्पिन यानि ईशांत शर्मा, आर विनय कुमार, भुवनेश्वर कुमार, आर अश्विन, रविंद्र जडेजा और कभी कभार गेंदबाज़ी में हाथ खोलने वाले विराट कोहली की गेंदो पर जमकर रन बनाए है.

भारतीय गेंदबाज़ी को लेकर पूर्व तेज़ गेंदबाज़ करसन घावरी कहते

हैं कि यह सब टवेंटी-टवेंटी का असर है.

करसन घावरी कहते हैं, "गेंदबाज़ो को सोचना होगा कि वहाँ उन्हें सिर्फ चार ओवर गेंदबाज़ी करनी होती है जबकि पचास ओवर के मैच में 10 ओवर करने होते है. अगर भारतीय गेंदबाज़ 300 से अधिक रनों का बचाव भी नहीं कर सकते तो बल्लेबाज़ भी क्या करेंगे."

'जितने कोच उतनी सलाह'

Image caption ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों ने भारतीय गेंदबाज़ों की खूब धुनाई की है

भारतीय टीम में गेंदबाज़ी कोच की बात चलने पर ईशांत शर्मा के कोच श्रवण कुमार का विचार है कि जितने कोच उतनी सलाह. वे मानते हैं कि शुरूआती कोच तो फैमिली डॉक्टर की तरह होता है सही सलाह वही दे सकता है.

भुवनेश्वर कुमार को लेकर श्रवण कुमार कहते है कि उनकी गेंद शुरूआत में थोडी स्विंग होती है जिसे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ संभलकर खेलते है बाद में वह भी महंगे साबित हो रहे है.

भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह का भी मानना है कि बल्लेबाज़ों के लिए इतने शानदार विकेट पर गेंदबाज़ो के लिए किफायती गेंदबाज़ी करना आसान नहीं है.

मनिंदर सिंह कहते हैं कि टवेंटी-टवेंटी का असर भी है और बल्लेबाज़ आजकल रन देखकर अपना लक्ष्य निर्धारित करते है.

इसके बावजूद करसन घावरी कहते है कि बल्लेबाज़ों को अगर सही जगह गेंद की जाए और यह जो क्रिकेट के नए नियम है गेंदबाज़ भी उसके अनुरूप अपनी गेंदबाज़ी को ढाल ले तो ऐसा नहीं है कि अच्छी गेंदबाज़ी नही की जा सकती.

अब देखना है कि पिछले तीनो मैचों से सबक़ लेकर भारतीय गेंदबाज़ कैसी गेंदबाज़ी बाकी बचे हुए मैचो में करते है. वह तो भला हो विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी का जिन्होंने दो बार ऑस्ट्रेलिया के शिकंजे से भारत को निकाला, यानि ख़तरे की घंटी दोनो तरफ़ बज रही है, थोडी बल्लेबाज़ी में ज़्यादा गेंदबाज़ी में.

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