क्रिकेट की छवि का ख़्याल रखते हैं सचिन

  • 12 नवंबर 2013
सचिन तेंडुलकर

सचिन तेंदुलकर जैसा दूसरा कोई नहीं है. सचिन जैसे लोग जिस भी क्षेत्र में काम करते हैं, झंडे गाड़ देते हैं. सचिन ने इतने रन बनाए, इतनी उपलब्धियां अपने नाम दर्ज कराईं, वो इसलिए अनूठे नहीं हैं, वो दूसरों से अलग इसलिए हैं क्योंकि उनमें साहस और अनुशासन है जिसे उन्होंने बरक़रार रखा.

जिस तरह चौदह साल की उम्र से ही उन्होंने क्रिकेट के मैदान में बल्ले से क़माल दिखाना शुरू किया, वही बात उन्हें दूसरों से अलग बना देती है. सचिन और कांबली ने जिस तरह शुरुआत की थी, तभी ये दोनों सबकी आंखों का तारा बन गए थे.

'सचिन ने बदला क्रिकेट'

इस देश में क्रिकेट दो वजहों से बदला है. पहला टेलीविज़न और दूसरा सचिन तेंदुलकर. मुंबई जैसा शहर सचिन के मैच के दिन थम जाता है. सचिन जब तक पिच पर बल्ला थामे रहते हैं या शतक पूरा नहीं कर लेते, पूरा शहर मानो सांस रोककर उन्हें देखता रहता है.

सचिन को लेकर यही माहौल मुंबई से भारत के और शहरों में फैलता चला गया और फिर सारी दुनिया में पहुंच गया. सचिन कहीं भी जाएं, विनम्रता उनके साथ चलती है. सचिन के साथ काम के दौरान मैंने यही पाया कि विनम्रता उनका स्थाई भाव है.

क्रिकेट के साथ न्याय

Image caption जानकार कहते हैं कि सचिन ने क्रिकेट को भारत में लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई

क्रिकेट को लेकर सचिन कितने गंभीर हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक विज्ञापन के लिए सचिन के हाथ में मक्खीमार रैकेट थमाया गया था और सामने से गेंद आ रही थी. लेकिन सचिन को लगा कि इससे ऐसा लगेगा कि वो क्रिकेट से भी बड़े हो गए हैं जो मक्खीमार बल्ले से गेंद को मार रहे हैं.

ये विज्ञापन शूट भी हो गया था लेकिन सचिन ने अपनी ओर से विनम्र निवेदन करके इसे दोबारा शूट करवाया ताकि क्रिकेट के साथ न्याय हो सके. उन्हें खेल और अपनी छवि दोनों का ख़्याल था. दुनिया में ऐसे खिलाड़ी बहुत कम होंगे.

सचिन कभी ये सोचते तक नहीं हैं कि वो क्रिकेट से भी बड़े हो गए हैं. यही उनकी ख़ासियत है. सचिन से पहले भी कई दिग्गज खिलाड़ी हुए, लेकिन सचिन जैसा कोई नहीं हो पाया.

(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)

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