टीम इंडिया सिरीज़ पर कब्ज़ा जमाना चाहेगी

  • 24 नवंबर 2013

भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच तीन एकदिवसीय मैचों की सिरीज़ का दूसरा मैच रविवार को विशाखापत्तनम में खेला जाएगा. इससे पहले भारत ने गुरूवार के खेले गए पहले मैच में वेस्टइंडीज़ को बेहद आसानी से 6 विकेट से मात दी थी.

जीत के रथ पर सवार भारतीय क्रिकेट टीम रविवार को ही जीत के साथ सिरीज़ पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश करेगी.

दरअसल भारतीय टीम इन दिनों ज़बरदस्त फार्म में है. रोहित शर्मा और विराट कोहली का कोई तोड़ विपक्षी गेंदबाज़ो को नहीं सूझ रहा है.

विराट कोहली का बल्ला तो यहां इससे पहले भी दो बार जमकर बोला है. उन्होंने यहां ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ लगातार दो शतक लगाए हैं.

वेस्टइंडीज़ की मुश्किल

वेस्टइंडीज़ की टीम का प्रदर्शन ना तो टेस्ट में अच्छा रहा और ना ही पहले वनडे में. पहले मैच में वेस्टइंडीज़ की टीम महज़ 211 रनों पर ढेर हो गई.

वेस्टइंडीज़ के लिए कोढ में खाज जैसी हालत तब हो गई जब उसके सबसे ख़तरनाक बल्लेबाज़ क्रिस गेल भी चोटिल होकर बचे हुए दोनो मैचों से भी बाहर हो गए. इससे पहले कीरोन पोलार्ड भी चोट के कारण बाहर हो गए थे, यानि वेस्टइंडीज़ पर दोहरी मार.

कोच्चि में खेले गए पिछले मुक़ाबले में वेस्टइंडीज़ के डेरेन ब्रावो ने 59 और विकेटकीपर बल्लेबाज़ जॉनसन चार्ल्स ने 42 रन बनाकर कुछ संघर्ष क्षमता दिखाई जबकि बाकी बल्लेबाज़ रवींद्र जडेजा की फिरकी में फंस गए.

कभी-कभार गेंदबाज़ी करने वाले सुरेश रैना का भी सामना वेस्टइंडीज़ के बल्लेबाज़ नहीं कर पाए. जडेजा और रैना ने तीन-तीन विकेट आपस में बांटे.

सुरेश रैना का यह एकदिवसीय क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन है. इत्तेफाक़ से उन्होने दो बार तीन-तीन विकेट 24 रन देकर लिए है. अब गेंदबाज़ी में तो रैना चल गए लेकिन बल्लेबाज़ी में उनकी नाकामी का सिलसिला जारी है.

रैना-युवराज पर सवाल

सुरेश रैना ने साल 2013 में अभी तक 29 एकदिवसीय मैच खेले हैं. उनके बल्ले से इस साल अभी तक कोई शतक नहीं निकला है बस 5 अर्धशतक निकले हैं. कोच्चि में तो वह खाता भी नहीं खोल सके.

उनके अलावा युवराज सिंह का बल्ला भी खामोश ही है. कोच्चि में वेस्टइंडीज़ के सुनील नारायण की गेंदों ने उन्हें बेहद परेशान किया.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ खेली गई 6 पारियों में दो में उनकी बारी नही आई तो बाकि चार मैचों में उनके बल्ले से एक मैच में 7 रन निकले तो 2 मैचों में वह अपना खाता भी नही खोल सके और एक मैच में उन्होंने 12 रन बनाए.

भारतीय टीम की लगातार जीत के कारण शायद सुरेश रैना और युवराज सिंह पर किसी का ध्यान अधिक नहीं जा रहा लेकिन अगर वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ बचे हुए 2 मैचों में भी इनका प्रदर्शन ऐसा ही रहा तो फिर चयनकर्ताओं के लिए उन्हे आगामी दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर ले जाना मुशकिल हो सकता है.

इसे लेकर पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह का मानना है, "जब सुरेश रैना चलते हैं तो लगातार तीन-चार मैचों में शानदार खेल दिखाते हैं. मैच जीताते भी हैं, लेकिन जब नहीं चलते तो ऐसा ही होता है. तीन चार मैचों में लगातार नाकाम होते हैं. रैना कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के चहेते खिलाडी हैं, ऐसे में उन्हे और अधिक मेहनत करनी चाहिए. चयनकर्ताओं को इन्हें लेकर कुछ सख्त कदम उठाने चाहिए क्योंकि अब आने वाले समय में सब कुछ पता चल जाएगा. आगामी सिरीज़ विदेशों में है. दक्षिण अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैड में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, उन खिलाडियों के लिए जो लगातार नाकाम होने के बावजूद टीम में बने हुए हैं."

वैसे सिरीज़ के दूसरे मैच में वेस्टइंडीज़ की साख भी दांव पर है जो शायद इतनी कमज़ोर नही है जितना लग रही है.

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