क्या ये स्मार्ट रैकेट, टेनिस में लाएगा क्रांति ?

  • 28 जनवरी 2014
रैकेट इमेज कॉपीरइट Reuters

कल्पना कीजिए एक ऐसे आभासी टेनिस कोच की जिसे यह ठीक-ठीक पता होगा कि आपने गेंद को अपने रैकेट के किस हिस्से से मारा है.

यह कोच आपके फोरहैंड, बैकहैंड, स्मैश और सर्विस का पूरा हिसाब रखेगा और खेल खत्म होने के बाद मौजूदा टेनिस डेटा के साथ आँकड़ों की तुलना भी करेगा.

लेकिन यह कोच ट्रैकसूट और ट्रेनर्स जूतों वाला कोच नहीं है. बल्कि यह सेंसर और चिप्स पर निर्भर एक कोच होगा.

यह भविष्य की किसी कल्पना की तरह लगता है लेकिन इस तरह की तकनीक बाजार में नए टेनिस रैकेट बेबोलैट प्ले प्योर ड्राइव के रूप में उपलब्ध है.

इस रैकेट में तारों की कंपन और गति को मापने वाला सेंसर है और यह ब्लूटूथ के माध्यम से स्मार्टफ़ोन और यूएसबी के ज़रिए कंप्यूटर से जुड़ सकता है.

इसको बनाने वाली कंपनी का कहना है कि यह दुनिया का पहला कनेक्टेड रैकेट है.

कंप्यूटरीकृत रैकेट

Image caption नए रैकेट को स्मार्टफ़ोन और कंप्यूटर की मदद से चलाया जा सकता है.

फ़्रांस के लिओन शहर में बेबोलेट के मुख्यालय में रैकेट के प्रोडक्ट मैनेजर गेल मॉरेक्स ने बीबीसी को बताया, "हमने रैकेट के हैंडल में सेंसर लगाए हैं लेकिन इससे उसके आकार-भार में कोई फ़र्क नहीं पड़ता. यह सेंसर आपके खेल का विश्लेषण करते हैं. इसलिए आपके रैकेट घुमाने और उसकी गति जैसी सारी जानकारियां रैकेट में रिकॉर्ड कर ली जाती हैं."

वह कहते हैं, "रैकेट विकसित करने की प्रक्रिया के दौरान हमने दुनिया भर के खिलाड़ियों के साथ बहुत सारे परीक्षण किए ताकि आंकड़े एकदम सटीक हों और खिलाड़ी को सही आंकड़े मिल सकें."

बेबोलेट का व्यक्तिगत खेल विश्लेषक पेशेवर टेनिस की दुनिया को काफ़ी हद तक प्रभावित कर सकता है.

यह इसलिए भी क्योंकि यह पहली कंपनी है जिसने अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ (आईटीएफ) के अनुमोदन के लिए ये कनेक्टेड रैकेट पेश किया है.

अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ ने टेनिस में उच्च-तकनीक के उपकरणों के इस्तेमाल को देखते हुए बेबोलेट रैकेट जैसे "आभासी कोचों" को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम, प्लेयर एनालिसिस टेक्नॉलॉजी शुरू किया है.

आईटीएफ़ से अनुमति मिलने का मतलब है कि नामचीन खिलाड़ी इन रैकेटों का इस्तेमाल ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में भी कर सकेंगे. अनुमति मिलने की स्थिति में इस साल होने वाले फ्रेंच ओपन में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

प्रतिबंध

Image caption नई तकनीक के लैस रैकेट बहुत जल्द ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में देखे जा सकते हैं.

टेनिस के इतिहास में तकनीक के नए प्रयोगों ने इस खेल का स्वरूप काफी हद तक बदल दिया है. 50 सालों में लकड़ी के रैकेट की जगह धातु और कार्बन फाइबर के रैकेट से लेकर अब कंप्यूटरीकृत रैकेट ने ले ली है.

इस बार टेनिस की अधिकृत संस्थाओं ने नई तकनीक के प्रति लचीला रूख अपनाया है नहीं तो इससे पहले बाजार में उपलब्ध दो धागों वाले रैकेट पर रोक लगा दी गई थी.

नए रैकेट के परीक्षण में इस बात का ख्याल रखा गया है कि हर खिलाड़ी के पास जीतने के बराबर मौके हों.

अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ दक्षिण-पश्चिम लंदन स्थित उच्च तकनीकी क्षमता वाले अपने लैब में रैकेटों या गेंदों का परीक्षण करता है.

अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ के स्टुअर्ट मिलर ने कहा, "टेनिस की दुनिया में यह बहुत बड़ी क्रांति थी जब लकड़ी के बने रैकेट की जगह पर धातु के बने बड़े आकार वाले रैकेट को बनाने में सफलता प्राप्त की गई."

नियम-31

धातु का रैकेट उपयोग करने वाले खिलाड़ियों का खेल लकड़ी के रैकेट उपयोग करने वाले खिलाड़ियों की तुलना में बेहतर होता है.

Image caption नई तकनीक के प्रयोग ने रैकेट के स्वरूप को काफी कुछ बदल दिया है.

इसकी वजह धातु के रैकेट का बड़ा आकार का होना होता है जिससे गेंद को मारने के लिए अधिक जगह मिलती है.

मिलर कहते है "इसके कारण रैकेट का भार हल्का होता चला गया और खेल में और गति आ गई. यह कदम इस खेल की गुणवत्ता में परिवर्तन लाने वाला था. यह कोई मायने नहीं रखता कि कुछ लोग आज भी लकड़ी वाले रैकेट की जगह टेनिस में मानते हैं."

अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ ने इस रैकेट के उपयोग के संदर्भ में नियम-31 लाया है ताकि इसके उपयोग को आगामी टूर्नामेंट में संभव बनाया जा सके.

मौजूदा नियम खेल के दौरान किसी भी तरह के उच्च तकनीक वाले कोचिंग और सहायता पर प्रतिबंध लगाता है लेकिन नए नियम के तहत तकनीक की सहायता से एकत्रित किए गए स्ट्रोक के आकड़ों का इस्तेमाल खिलाड़ी अपने प्रदर्शन को सुधारने में कर सकता है.

इसके अनुसार खेल के दौरान तो इसकी सहायता नहीं ली जा सकती लेकिन जब खेल स्थगित या कोचिंग की अनुमति हो तो उस दौरान इसकी सहायता ली जा सकती है.

इस नए तरह के प्रयोग के बावजूद प्रशिक्षक अपने लिए कोई खतरा महसूस नहीं कर रहे हैं.

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