यौन शोषण: खिलाड़ियों को बचाने वालों से ख़तरा

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एशियाई मैराथन की पूर्व चैंपियन सुनीता गोदारा का कहना है कि खेल संघों में जिन लोगों पर महिला खिलाड़ियों को यौन शोषण से बचाने की ज़िम्मेदारी है, वही संदिग्ध चाल चरित्र के लोग हैं, और वो आमतौर पर दोषियों का साथ ज़्यादा देते हैं.

लंबी दूरी की चैंपियन धाविका रही सुनीता गोदारा कहती हैं, ''खेल संघों में विशाखा गाइडलाइंस लागू होने की बात तो मैंने नहीं सुनी. अगर ऐसा हो भी रहा है तो इक्का-दुक्का ही. भारतीय खेल प्राधिकरण में ऐसा एक प्रकोष्ठ बनाया गया है. लेकिन इसमें जिन लोगों को रखा गया, वो ख़ुद पीछे विवादों में रहे हैं. वहां कुछ समय पहले नंदिता केस सामने आया था, जिन्होंने जब आवाज़ उठाने की कोशिश की तो प्रकोष्ठ के लोगों ने उन्हीं को फंसा दिया."

खेलों के राष्ट्रीय कैंपों, हॉस्टलों में ऐसी शिकायतें दशकों से भारतीय खेलों में चर्चा का विषय बनती रही हैं. बतौर गोदारा, ''खेल संघों और खेलों से जुड़े महकमों में इस तरह की शिकायतों पर पयार्प्त जांच तक की ओर ध्यान नहीं दिया जाता. ज़्यादातर मामलों में संदिग्ध बच निकलते हैं.''

वह बताती हैं, ''एक-डेढ़ साल पहले पूर्वोत्तर के शिलारू में एक कोच को लेकर शिकायतें सामने आईं थीं, मामला गंभीर था लेकिन लिखित शिकायत के बावजूद कोच को सस्पेंड नहीं किया गया बल्कि बस दिल्ली ट्रांसफ़र कर दिया गया. ये थी सज़ा.''

सुनीता कई सालों से खेलों में महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती रही हैं. इसके लिए उन्होंने तमाम सार्वजनिक मंचों का भी इस्तेमाल किया. उनका कहना है कि खेलों में छोटी लड़कियां यौन शोषण का ज्यादा शिकार होती हैं, क्योंकि वो अमूमन आवाज़ नहीं उठा पातीं.

बदल रही है तस्वीर

वह कहती हैं, ''अब तस्वीर बदल रही है. मीडिया की ताक़त और पहुंच बढ़ने से महिला खिलाड़ियों की हिम्मत भी बढ़ रही है. मेरे पास अब लगातार इस बारे में सलाह लेने के लिए फ़ोन आते हैं.''

पिछले कुछ बरसों में महिला खिलाड़ियों के शोषण की ख़बरें लगातार सुर्ख़ियां बनी हैं. भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों ने जहां खुलेआम राष्ट्रीय कोच पर यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया था. वहीं कुछ साल पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम के साथ विदेश दौरे पर गए मैनेजर को इसलिए बर्ख़ास्त कर दिया गया क्योंकि महिला क्रिकेटरों ने उनके आचरण को लेकर शिकायतें की थीं.

गोदरा कहती हैं, ''अमूमन महिला खिलाड़ियों आवाज़ उठाने से इसलिए बचती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने पर उन्हें कैंप से बाहर कर दिया जाएगा. टीम में उनका चयन नहीं किया जाएगा.''

तुरंत बर्ख़ास्तगी हो

भारतीय तीरंदाज़ी संघ के उपाध्यक्ष अजय गुप्ता कहते हैं कि खेलों में सबसे बड़ी चिंता की वजह यही है. उनके अनुसार ऐसे लोगों को तुरंत बर्ख़ास्त कर देना चाहिए.

वह कहते हैं कि आप कैसी भी गाइडलाइंस बना दें लेकिन अगर ग़लत आदमियों को दूर नहीं रखेंगे तो कड़ा क़ानून भी क्या कर लेगा. लिहाज़ा पहली ज़रूरत खेलों के प्रशासन को साफ़सुथरा करने का है.

भारतीय टीम के साथ कई बार मैनेजर के तौर पर विदेश जा चुके अजय गुप्ता ख़ुद मेरठ में तीरंदाज़ी को प्राचीन गुरुकुल से जोड़कर तीरंदाज़ी अकादमी चला रहे हैं.

वह दावा करते हैं कि भारतीय तीरंदाज़ी संघ अब तक इस तरह की अनैतिक बातों से दूर रहा है, क्योंकि संघ में ऊपर की स्थितियों पर बैठे लोग कड़ाई से अनुशासन और स्वच्छता पर ज़ोर देते हैं

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