न्यूज़ीलैंड को कमज़ोर समझना तो नहीं पड़ा भारी?

  • 4 फरवरी 2014
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भारतीय क्रिकेट टीम न्यूज़ीलैंड से पांच एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ में 4-0 की करारी मात खाने के बाद अब छह फरवरी से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैच की सिरीज़ पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है.

ऑकलैंड में गुरुवार से शुरू हो रहे पहले टेस्ट मैच से पहले भारत ने न्यूज़ीलैंड इलेवन के ख़िलाफ़ दो दिवसीय अभ्यास मैच खेला जो ड्रॉ समाप्त हुआ. इस मैच में न्यूज़ीलैंड ने एक बड़ा दांव खेलते हुए अपने उन खिलाड़ियों को मैदान में नहीं उतारा जो पहले टेस्ट मैच में खेलेंगे जबकि भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली ने भी आराम करना ही बेहतर समझा.

(भारत को मिली करारी हार)

न्यूज़ीलैंड इलेवन ने अपनी पहली पारी नौ विकेट पर 262 रन के स्कोर पर समाप्त घोषित की तो जवाब में भारत ने छह विकेट पर 313 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की.

भारत की सलामी जोड़ी शिखर धवन और मुरली विजय एक बार फिर बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने में नाकाम रहे. रोहित शर्मा ने 59 और अजिंक्य रहाणे ने 60 रन बनाकर कुछ हद तक अपनी खोई फॉर्म हासिल की.

अभ्यास मैच

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लेकिन क्या इस अभ्यास मैच में कुछ ठीक-ठाक खेल लेने से भारतीय टीम का खोया भरोसा लौट आएगा? इस बारे में जाने माने क्रिकेट विश्लेषक अयाज़ मेमन कहते हैं, "इस मैच को इतना गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है. हांलाकि अभ्यास हमेशा अच्छा होता है. न्यूज़ीलैंड का केवल एक अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी इसमें शामिल था यानी विरोधी मज़बूत नहीं था."

(क्या भारत का खाता खुलेगा?)

उन्होंने कहा, "इसके बावजूद उम्मीद है कि भारत टेस्ट मैचों में एकदिवसीय सिरीज़ के मुक़ाबले बेहतर खेलेगा. दक्षिण अफ्रीका में भी ऐसा ही देखने को मिला था. एक मैच भारत हारा लेकिन एक मैच भारत जीत भी सकता था."

अब एकदिवसीय सिरीज़ में जो होना था, सो हुआ. लेकिन क्यों हुआ, यह सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण है.

इस पर मेमन का मानना है, "एक तो सभी ने न्यूज़ीलैंड की टीम को बेहद कमतर आंका. सबका सोचना था कि आठवीं रैंकिंग वाली न्यूज़ीलैंड जो बांग्लादेश से भी हारी थी, वह भला भारत का सामना क्या करेगी?"

उन्होंने कहा, "न्यूज़ीलैंड ने इसे पूरी तरह ग़लत साबित करते हुए ख़ासकर कोरी एंडरसन और केन विलियमसन जैसे नए खिलाड़ियों के दम पर दिखा दिया कि आने वाले विश्वकप के लिए भी उसकी तैयारी अच्छी है और वह मज़बूत टीम है."

टीम का चयन

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मेनन ने कहा, "इससे अलावा भारतीय टीम का चयन भी सही नहीं था. जब भारत सिरीज़ हार ही चुका था तो पांचवें और आख़िरी मैच में कुछ नए खिलाड़ियों को मौक़ा देकर आजमाया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सलामी जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा लगातार नाकाम होते रहे, इससे भी टीम को बड़ा धक्का लगा. इसके अलावा ऐसा लगा जैसे कप्तान धोनी एक ही सोची-समझी रणनीति के तहत खेलते रहे."

(जीत का इंतजार?)

उन्होंने कहा, "धोनी ने हर बार टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का निर्णय लेकर जैसे अपने गेंदबाज़ो को कह दिया कि मेरा भरोसा बल्लेबाज़ो पर है लेकिन बल्लेबाज़ दगा दे गए."

अब टेस्ट मैच में भारत किस तरह की गेदबाज़ी के साथ उतरे, इस पर मेमन का कहना है, "भारत को ज़हीर खान और मोहम्मद शमी को तो टीम में रखना चाहिए. शमी में शुरुआत में विकेट निकालने की क्षमता है."

उन्होंने कहा, "हालांकि शमी काफ़ी महंगे साबित हो रहे हैं. तीसरे तेज़ गेंदबाज़ के रूप में भुवनेश्वर कुमार या फिर ईश्वर पांडेय हो सकते हैं लेकिन मेरी पसंद ईश्वर पांडेय है. वह पिछले रणजी सीज़न में अच्छी फॉर्म में थे, लम्बे क़द के गेंदबाज़ हैं. गेंद को पिच पर हिट करते हैं हालांकि उनकी रफ़्तार इतनी अधिक नहीं है लेकिन घरेलू स्तर पर जितना भी उनको देखा है, उनका प्रदर्शन अच्छा है."

ईशांत से निराशा

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मेमन ने कहा, "भुवनेश्वर कुमार लगता है कि अपनी लय कहीं ना कहीं खो बैठे हैं. स्पिनर के तौर पर रवींद्र जडेजा को अहमियत दी जानी चाहिए. पार्ट टाईम बॉलर के रूप में विराट कोहली और रोहित शर्मा को आजमाया जा सकता है."

(घर में शेर, क्या न्यूज़ीलैंड में होंगे ढेर?)

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि धोनी शायद सात बल्लेबाज़ो के साथ टेस्ट मैच में उतरें. ईशांत शर्मा ने सबसे अधिक निराश किया है. पिछले पांच-छह साल से उन्हें जितने अवसर मिले और जितना भरोसा उनमें दिखाया गया उसका कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है."

मेमन ने कहा, "तीन साल पहले कहा जा सकता था ईशांत युवा हैं, उन्हें तजुर्बा नहीं है लेकिन अब तो ऐसा नहीं है."

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