क्या ज़हीर को टेस्ट क्रिकेट छोड़ देना चाहिए?

  • 21 फरवरी 2014
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"ज़हीर ख़ान को अब अपने भविष्य के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए क्योंकि इस साल के आख़िर में जब भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड का दौरा करेगी तब पांच दिवसीय क्रिकेट खेलना उनके लिए मुश्किल होगा."

यह कहना है भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ का और जब दुनिया भर के विकेटों पर तेज़ गेंदबाज़ों का बखूबी सामना करने वाले द्रविड़ जैसे बल्लेबाज़ अगर ज़हीर ख़ान के बारे में ऐसा कहते हैं तो उनकी बात को खारिज करना थोड़ा मुश्किल ज़रूर है.

(क्रिकेट के सितारे)

जाने माने क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली ज़हीर ख़ान को लेकर कहते हैं, "अगर द्रविड़ ने ऐसा कहा है तो ठीक ही कहा है क्योंकि वह ज़हीर के कप्तान रह चुके हैं. वह ज़हीर की काबिलियत को भली भांति जानते हैं. यहां पर मुद्दा उनकी क्षमता का नहीं बल्कि उनकी फिटनेस का है. उम्र के साथ-साथ खिलाड़ी के प्रदर्शन का स्तर भी गिरता है."

विशेषकर जब कोई गेंदबाज़ हो और तेज़ गेंदबाज़ को तो अधिक मेहनत करनी पड़ती है. ज़हीर ख़ान एक अंतराल के बाद टीम में आए थे. उन्हें चोट लगी थी. उन्होंने कोशिश की. उनके साथियों का कहना था कि ज़हीर की मौजूदगी से मैदान में बहुत मदद मिलती है. उनकी सलाह से फायदा होता है."

युवाओं को अवसर

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"अब यह चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है कि वह ज़हीर को ज़हीर ख़ान के रूप में खिलाते हैं या फिर बाक़ी तीन-चार गेंदबाज़ उनसे सीखकर मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करें."

दूसरी तरफ भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ आकाश चोपड़ा कहते हैं, "मै द्रविड़ की बात से पूरी तरह सहमत हूं. ज़हीर ख़ान 90 से ऊपर टेस्ट मैच खेल चुके हैं. एक तेज़ गेंदबाज़ इतने टेस्ट मैच खेलने के बाद अगर टीम में सफल वापसी करे तो यह किसी चमत्कार से कम नही है."

(टीम इंडिया टेस्ट में दिखाएगी दम?)

चोपड़ा आगे कहते हैं, "पिछली सात पारियों में उन्होंने जैसी गेंदबाज़ी की है, उसे देखते हुए यह चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है कि वह ज़हीर के साथ टेस्ट टीम चुनेंगे या फिर उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार, वरूण ऐरोन या ईश्वर पांडेय जैसे युवा गेंदबाज़ों को अवसर देंगे."

ज़हीर ख़ान की हालिया गेंदबाज़ी को लेकर विजय लोकपल्ली कहते हैं. "उनका पहला स्पेल अच्छा निकलता था, थोड़ी स्पीड कम थी. पहले ज़हीर की गेंदों को अच्छा मूवमेंट मिलता था, रिवर्स बेहतरीन था, अंदर गेंद लाते थे, राइट हैंड बैट्समैन के लिए आउट स्विंग शानदार था लेकिन जैसा राहुल द्रविड़ ने कहा कि यह अब उन्हें सोचना पड़ेगा कि क्या वह इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकेंगे?"

शानदार गेंदबाज़ी

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"वैसे तो पूरी गेंदबाज़ी ही भारत के लिए चिंता का कारण रही है. गेंदबाज़ी कोच फेल हो रहे हैं, ऐसे में ज़हीर को एक गेंदबाज़ के तौर पर ना सही तो गेंदबाज़ी कोच के रूप में टीम के साथ ले जाइए."

वहीं आकाश चोपड़ा कहते हैं, "आज से 13 साल पहले जब ज़हीर ख़ान टीम में आए थे तब वह 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंद करते थे. उनके इतने लंबे सफर में उनकी गति में काफी कमी आई है. ज़हीर ख़ान ने इससे पहले साल 2007 के इंग्लैड दौरे पर कम गति के साथ भी शानदार गेंदबाज़ी की थी लेकिन अब उनकी गेंदबाज़ी में वह धार, वह पैनापन नही है."

('जीत क्रिकेट की हुई')

चोपड़ा का कहना है, "इन दिनों जितनी गेंदबाज़ी भारतीय गेंदबाज़ कर रहे हैं, उसे देखते हुए मैच दर मैच, इनिंग दर इनिंग उतनी ताक़त से गेंदबाज़ी करना शायद ज़हीर ख़ान के लिए मुमकिन नहीं है. अब शायद उनके करियर में वह समय, वह मोड़ आ गया है जब उन्हें टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहना पड़े. आख़िरी बार उन्हें शानदार गेंदबाज़ी करते हुए हमने साल 2011 के विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में देखा था."

वो कहते हैं, "उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण किरदार निभाया था. हम हमेशा युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर की बात करते हैं लेकिन भारत का परचम फहराने में ज़हीर का ज़बरदस्त योगदान रहा. पर अब वह दौर बीत चुका है और भारत को भविष्य की तरफ देखने की ज़रूरत है."

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