कैसे निपटेगी टीम इंडिया कमज़ोर गेंदबाज़ी से?

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भारतीय क्रिकेट टीम में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तान के रूप में वापसी हो चुकी है.

विराट कोहली ने एशिया कप में शानदार प्रदर्शन किया है और इसके अलावा ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट को वैसे भी बल्लेबाज़ों का खेल कहा जाता है.

भारत के बल्लेबाज़ दुनिया के किसी भी आक्रमण का सामना कर सकते हैं. किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं.

बांग्लादेश का विकेट बल्लेबाज़ों के अनुकूल है और इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भारतीय टीम बांग्लादेश में होने जा रहे विश्व ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करेगी.

(भारत का दबदबा बढ़ा)

यह कहना है भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ वैंकटेश प्रसाद का. दरअसल वैंकटेश प्रसाद एक कार्यक्रम के सिलसिले में दिल्ली में खेल पत्रकारों से रूबरू थे और भारतीय क्रिकेट टीम से जुड़े सवालों का बेबाकी से जवाब दे रहे थे.

'बदले की भावना'

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जब उनसे पूछा गया कि पिछले दिनों भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था तो उन्होंने कहा, "पुराने आंकड़ों को छोड़ दिया जाए तो भारतीय टीम में विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह और सुरेश रैना के होने से बल्लेबाज़ी में काफ़ी दम-ख़म है. वैसे भी ट्वेंटी-20 क्रिकेट में किसी भी टीम को आप अपनी पसंदीदा टीम नहीं मान सकते हैं."

(भारतीय क्रिकेट की उम्मीद)

वैंकटेश प्रसाद कहते हैं, "हर टीम में अच्छे बल्लेबाज़ हैं और 10 बल्लेबाज़ों को केवल 20 ओवर खेलने होते हैं." भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुक़ाबले को लेकर जब सवाल उठा कि क्या एशिया कप में पाकिस्तान से हार का असर भारत के प्रदर्शन पर पड़ेगा तो वैंकटेश प्रसाद ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों परंपरागत प्रतिद्वंदी रहे हैं.

उन्होंने कहा, "लेकिन इसे बदले की भावना वाला मैच न समझा जाए. यह अच्छा और समझदारी भरी क्रिकेट खेलने का मामला है. ट्वेंटी-20 क्रिकेट केवल चौक्के-छक्के लगाने वाला खेल नहीं है. इसमें भी पारी को जमाना महत्वपूर्ण होता है. खासकर नम्बर तीन और चार पर खेलने आए बल्लेबाज़ के लिए."

क्रिकेट और कोचिंग

भारतीय टीम की गेंदबाज़ी को लेकर वैंकटेश प्रसाद का मानना है कि भारतीय गेंदबाज़ों को उद्देश्य के साथ सही अभ्यास की ज़रूरत है. भारतीय गेंदबाज़ों को यॉर्कर, धीमी गेंद और बॉलिंग की विविधता को सीखना होगा. यह सब ना तो एक दिन में और न ही सीधे मैच में खेलकर सीखा जा सकता है. इसके लिए केवल अभ्यास और अभ्यास की ही ज़रूरत है."

(कोच, देसी या विदेशी?)

वे बोले, "मुझे नहीं लगता कि अभ्यास के बिना यह मुमकिन है." जब उनसे सवाल किया गया कि साल 2007 में पहला ट्वेंटी-20 विश्व कप जीतने वाली टीम के गेंदबाज़ी कोच आप ही थे तो क्या अब भी आप कोच बनना चाहेंगे, इस पर उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात होगी.

उन्होंने कहा, "वैसे भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद मैने कोचिंग पर ही अधिक काम किया है लेकिन यह सब तो बीसीसीआई के हाथ में है."

भारत के तेज़ गेंदबाज़ कहाँ ग़लती कर रहे हैं, इस सवाल पर उनका कहना था कि उनके सोचने का तरीक़ा तो ठीक है लेकिन दबाव के क्षणों में जब क्रियान्वयन का समय आता है तो वे चूक जाते हैं.

भारत के पास अनुभव

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उन्होंने आगे कहा, "इसके हल के लिए उन्हें नेट में ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गेंदबाज़ी करनी चाहिए. रही बात एशिया कप की तो वहां भारत के अनुभवी खिलाड़ी टीम में नहीं थे, इसके बावजूद टीम नज़दीकी मुक़ाबले में हारी. विराट कोहली की कप्तानी में खिलाड़ियों को बांग्लादेश की विकेट और परिस्थितियों को समझने का मौक़ा मिला."

(टेस्ट रैंकिंग में भारत तीसरे स्थान पर)

अब भारत के पास अनुभव है, योग्य खिलाड़ी हैं, महेंद्र सिंह धोनी और सुरेश रैना जैसे मैच जीताऊ खिलाड़ी हैं, युवराज की वापसी हुई है. ट्वेंटी-20 का इन्हें लम्बा अनुभव है, जबकि भारत ने जब साल 2007 में पहला ट्वेंटी-20 विश्व कप जीता था और वह भी दक्षिण अफ्रीका में तब टीम को क्रिकेट के इस फॉर्मेट में शून्य अनुभव था.

उल्लेखनीय है कि तब भारतीय टीम के मैनेजर पूर्व बल्लेबाज़ लालचंद राजपूत और वैंकटेश प्रसाद गेंदबाज़ी कोच थे. वैसे भारत इस ट्वेंटी-ट्वेंटी विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत 21 मार्च को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेलकर करेगा.

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