भारतः टी-20 का फ़ाइनल भी गंवाया और नंबर वन की रैंकिंग भी

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बीते रविवार को बांग्लादेश में खेले गए वर्ल्ड ट्वेंटी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट के फ़ाइनल में श्रीलंका के हाथों छह विकेट से हारने के साथ ही भारत ने आईसीसीसी ट्वेंटी-20 में अपनी पहली रैंकिंग भी गंवा दी.

श्रीलंका चैंपियन तो बना ही साथ ही क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप की रैंकिंग में भी नम्बर एक बन गया जबकि भारत अब दूसरे स्थान पर ख़िसक गया है. वैसे इस टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले श्रीलंका ही नम्बर एक रैंकिंग पर था लेकिन विश्वकप के लीग चरण में लगातार चार जीत से भारत ने उसकी जगह ले ली थी.

(धोनी ने किया युवराज का बचाव)

इसके साथ ही श्रीलंका ने साल 2011 में एकदिवसीय क्रिकेट के विश्व कप में भारत के हाथो मिली हार की कड़वी यादों को भी मिटा दिया. इससे पहले श्रीलंका ने साल 1996 में एकदिवसीय विश्व कप जीता था जबकि पिछले ट्वेंटी-20 विश्व कप में वह उपविजेता था.

फ़ाइनल में हार के बावजूद भारत के विराट कोहली विश्वकप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए. इस टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने वाले वह पहले भारतीय क्रिकेटर हैं. उन्होने छह मैचों में चार अर्द्धशतकों की मदद से सर्वाधिक 319 रन बनाए.

हार का दुख

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विराट कोहली बल्लेबाज़ो की ट्वेंटी-20 रैंकिंग मे दूसरे स्थान पर पहुंच गए है. अब भारतीय टीम जिस एकतरफा रूप से श्रीलंका से फ़ाइनल हारी उससे टीम पर कई सवाल एक बार फिर उठने शुरू हो गए हैं.

(चैम्पियन का फ़ैसला)

पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते है कि श्रीलंकाई टीम पूरी तरह से प्रशंसा की हक़दार है क्योंकि एक समय ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम शायद 160 या 170 रन बना लेगी लेकिन पहले तो उसने भारत को केवल 130 रन तक रोका और उसके बाद 13 गेंद शेष रहते मैच जीत भी लिया.

उन्होंने कहा, "हार से इतना दुःख नहीं है क्योंकि जब दो टीमें खेलेंगी तो एक तो हारेगी ही लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि जब भारतीय टीम हारती है तो आत्मसमर्पण ही कर देती है. लड़ कर हारें तो परेशानी नहीं है लेकिन ऐसी हार तो दुखी करती है. जहां तक रैंकिंग की बात है तो उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता."

आँखों की किरकिरी

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उन्होंने कहा, "टीम ने इस टूर्नामेंट में लगातार पांच मैच जीते वो भी एकतरफ़ा अंदाज में लेकिन हारे भी तो एकतरफ़ा जो ठीक नहीं है. इससे पहले दक्षिण अफ्रीका गए वहां एकतरफ़ा हारे, फिर न्यूज़ीलैंड में भी यही हाल हुआ. उसके बाद एशिया कप के फाइनल में भी नहीं पहुंचे उसका अफ़सोस नहीं है क्योंकि वहां संघर्ष करते हुए तो हारे."

(भारत ने बांग्लादेश को हराया)

वहीं फ़ाइनल मुक़ाबले में 21 गेंदो पर 11 रन बनाकर सभी क्रिकेट प्रेमियों कि आंखों की किरकिरी बने युवराज सिंह को लेकर मनिंदर सिंह का कहना है कि जब शानदार खेल रहे थे तब सभी तारीफ़ भी कर रहे थे लेकिन रविवार को वह बहुत ख़राब खेले जिसके लिए उनकी आलोचना तो होगी ही.

मनिंदर सिंह कहते हैं, "ट्वेंटी-20 क्रिकेट का यह स्वभाव है कि कोई एक बल्लेबाज़ एक पारी से मैच जिता देता है या एक गेंदबाज़ एक ही ओवर में दो-तीन विकेट लेकर मैच का रुख़ बदल देता है. यहां तो एक बल्लेबाज़ ने मैच हरवा दिया तो कुछ तो लोग कहेंगे ही लेकिन इस आलोचना को सकारात्मक रूप से लिया जाना चाहिए."

आउट आफ़ फ़ॉर्म

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उन्होंने कहा, "जहां तक कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बात है तो उन्होंने तो उन्हें सही नम्बर पर बल्लेबाज़ी करने भेजा था क्योंकि इससे पहले युवराज सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी की थी लेकिन जब टीम फील्डिंग कर रही थी तब धोनी ने ग़लतिया की. वह कुछ होने का इंतज़ार करते रहे और मैच हाथ से निकल गया."

(बांग्लादेश में उत्साह की कमी)

उन्होंने कहा, "उदाहरण के लिए जब अमित मिश्रा ने अपने पहले ओवर में केवल एक रन दिया तो उसके बाद उन्हें हटा दिया. उसके बाद जब अश्विन ने विकेट लेकर दिया तो उन्हें भी हटा दिया. ऐसे में तो पूरी तरह आक्रमण करना चाहिए था क्योंकि लगातार विकेट लेकर ही तो भारत मैच जीत सकता था यहां उन्होने ज़रूर ग़लती की."

मनिंदर सिंह रोहित शर्मा और शिखर धवन को लेकर कहते हैं कि शिखर धवन का इस तरह आउट आफ़ फ़ार्म होना चिंताजनक है. लगता है कि वह मेहनत नहीं कर रहे हैं. ऐसा भारत के कई युवा खिलाड़ियों के साथ हो चुका है.

होनहार खिलाड़ी

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उन्होंने कहा, "तीन-चार शानदार पारियां खेलने के बाद वे हीरो बन जाते हैं लेकिन उन्हें समझना होगा कि रातोंरात शोहरत पाने के बाद दोगुनी मेहनत करनी चाहिए जैसे विराट कोहली करते हैं. शिखर धवन बड़े ही होनहार और दिलेर खिलाड़ी है, उन्हें समझाने की ज़रूरत है लेकिन रोहित शर्मा ने तो जैसे विकेट गंवाने में पीएचडी कर ली है."

(जो कानों से मारते हैं चोके-छक्के)

मनिंदर सिंह ने कहा, "अच्छी शुरूआत करते हैं लेकिन विकेट थ्रो कर आते हैं. यही हाल सुरेश रैना का है जो चार-पांच पारी अच्छी खेलने के बाद गेंद को मिड विकेट पर उड़ाते हुए आउट हो जाते हैं. अगर इन सब चीज़ो पर ध्यान दिया जाए तो बेहतर होगा क्योंकि ये सब होनहार खिलाड़ी हैं."

उन्होंने कहा, "विराट कोहली ख़ुद को आत्मप्रेरित करते हैं यही काम सचिन, राहुल द्रविड़ और लक्ष्मण किया करते थे जो हर कोई नहीं कर सकता. यह काम कोच का है जहां लगता है कि डंकन फ्लैचर ने कुछ नहीं किया है. वह केवल रबड़ी खा रहे हैं और ख़ुश हैं कि इतना ख़राब करने के बाद भी टीम के कोच हैं."

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