'भारत-पाक के बीच क्रिकेट रिश्ते भी मज़बूत हों'

  • 4 जून 2014
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भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी आज भी जावेद मिंयादाद का चेतन शर्मा की आख़िरी गेंद पर लगाया गया छक्का नहीं भूलते है जिसकी मदद से पाकिस्तान ने भारत को शारजाह में मात दी थी.

और न ही क्रिकेट प्रेमी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान वेंकटेश प्रसाद और आमिर सोहेल के बीच हुई झड़प को भूले हैं जिसके बाद आमिर सोहेल अगली ही गेंद पर बोल्ड हो गए थे और पाकिस्तान के हाथ से जीत फिसल गई थी.

ऐसे ढेरों क़िस्से आम क्रिकेट प्रेमी की ज़ुबान पर हमेशा रहते हैं और आज भी दोनों देश जब भी दुनिया के किसी भी मैदान में आमने-सामने होते हैं तो क्रिकेट का रोमांच अपने चरम पर होता है. अब क्रिकेट प्रेमी ही नहीं बल्कि दोनों देशों के धुरंधर खिलाड़ी भी चाहते हैं कि तमाम बातें भूलकर दोनों देश एक बार फिर आपस में क्रिकेट रिश्ते शुरू करें.

बीते सोमवार को मुंबई में सिएट क्रिकेट रेटिंग समारोह का आयोजन हुआ जहां भारत के पूर्व बल्लेबाज़ वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि जब पाकिस्तान साल 2012-13 में तीन एकदिवसीय और दो ट्वेंटी-ट्वेंटी मैचों की सिरीज़ खेलने के लिए भारत आया था तो दर्शकों ने वास्तव में इसका आनन्द उठाया.

उनका मानना है कि भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता भी एशेज के समान है और भारत की मेज़बानी में उन्हें कोई समस्या नज़र नहीं आती.

किरमानी को लाइफ़टाइम अचीवमैंट

इसी समारोह में साल 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के जाने-माने विकेटकीपर सैयद किरमानी को लाइफटाइम अचीवमैंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

किरमानी का भी मानना था कि इन दोनों देशों के बीच एशिया के किसी तटस्थ स्थान पर सिरीज़ कराकर क्रिकेट रिश्तों को बहाल किया जाना चाहिए.

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Image caption भारत और पाकिस्तान के बीच मैच दर्शकों को खूब खींचते हैं

दूसरी तरफ पाकिस्तान के पूर्व कप्तान रमीज़ राजा ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिरीज़ होना खेल के लिए अच्छी बात होगी.

दोनों देशों के बीच क्रिकेट रिश्तों की बहाली को लेकर जब पाकिस्तान के पूर्व विकेटककीपर बल्लेबाज़ वसीम बारी से बातचीत की गई तो उन्होंने इन तमाम क्रिकेटरों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के 90 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि दोनों देश आपस में खेलें और मिलकर रहे.

वसीम बारी का कहना था कि यही एक रास्ता है जिससे दोनों देशों के लोगों में भरोसा पैदा होगा और एक दूसरे से संबंध बढेंगे. इससे फ़ायदा ही फ़ायदा है कोई नुकसान नहीं है.

वो कहते हैं कि यह कदम जितना जल्दी उठाया जाए उतना ही सही है. इसके अलावा वसीम बारी कहते हैं कि आईसीसी ने भी इंडो-पाक सिरीज़ को आइकन सिरीज़ माना है और यह सिरीज़ तो एशेज़ सिरीज़ से भी अधिक देखी जाती है, इसमें खिलाड़ियों पर उससे भी अधिक दबाव होता है.

अब रास्ता तो यही है चाहे अभी हो या देर से हो. अब समय आ गया है कि दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड आपस मे बात करें. दोनों देशों की सिरीज़ से नए तेंदुलकर, नए कपिल देव, नए रोल मॉडल्स बनेंगे, नए इमरान खान आएंगे.

निकलेंगे स्टार, बढ़ेगी दोस्ती

बातचीत के दौरान ही वसीम बारी ने नेल्सन मंडेला की बात को याद करते हुए कहा कि पूरी दुनिया स्पोर्ट्स से बदल सकती है. भारत और पाकिस्तान में सबसे अधिक लोकप्रिय खेल क्रिकेट है. दोनों देशों की क्रिकेट दोनों देशों के लोगों की ज़िंदगी बदल सकती है, इसे इस अंदाज़ से भी देखना चाहिए.

Image caption कई बार प्रशंसक मैच के जरिए सद्भावना का संदेश भी देते हैं

वसीम बारी ने पुराने दिनों की याद ताज़ा करते हुए बताया कि उनके समय में क्रिकेट अपनी जगह होती थी, दोस्ती अपनी जगह होती थी. सैयद किरमानी, सुनील गावस्कर, कपिल देव और बिशन सिंह बेदी से उनकी बेहद दोस्ती है. कपिल देव तो मैदान से बाहर आकर कहते भी थे कि आप विकेट के पीछे बहुत शोर करते हैं लेकिन मैदान के बाहर कुछ नहीं कहते.

बारी बताते हैं कि इसके अलावा दोनों देशों के बीच जो क्रिकेट खेली जाती है उसका स्तर बहुत ऊंचा होता है. अभी पिछले दिनों आईपीएल अबुधाबी, दुबई और शारज़ाह में हुआ तब दोनों देशों के कितने ही क्रिकेट प्रेमी वहां मौजूद थे.

वे कहते हैं कि अब अगर दोनों देश वहां भी क्रिकेट खेलते हैं तो भी अच्छा ही होगा और यह सकारात्मक कदम होगा.

वसीम इससे आगे बढ़कर कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान सिरीज़ से एक से एक बढकर स्टार निकलते हैं. दबाव में सीखने का भी मौक़ा होता है और हीरे की तरह खिलाड़ी चमकते हैं, लेकिन अब इसकी रफ्तार सुस्त हो गई है.

वह कहते हैं कि अब न तो भारत के पास पहले जैसे स्पिनर हैं और न ही पाकिस्तान के पास पहले जैसे तेज़ गेंदबाज़. अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेलकर ही अच्छे खिलाड़ी पैदा होते है.

आखिर में वसीम बारी कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान में बहुत ग़रीबी है. यह ग़रीबी तभी दूर हो सकती है जब दोनों देश मिलकर रहें. यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ का अच्छा कदम था कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समारोह में मुबारकबाद देने आए.

वह कहते हैं कि ख़ुद नवाज़ साहब क्रिकेटर रहे हैं, क्रिकेट से प्यार करते हैं, उम्मीद है कि वह जल्दी ही भारत सरकार से बातचीत करेंगे और यह सिलसिला शुरू होगा.

अब देखना है कि दोनों देशों के क्रिकेट रिश्तों पर जमी बर्फ कब पिघलती है और कब दोनों देश बडे क्रिकेट टूर्नामेंट के अलावा भी आपस में क्रिकेट सिरीज़ खेलने को राज़ी होते है?

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