फ़ीफ़ा: जब रुक गई दिल की धड़कन!

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ब्राज़ील में खेले जा रहे फ़ुटबॉल विश्वकप में शुरुआती रोमांचक मुक़ाबलों के बाद टूर्नामेंट में कुछ ऐसे नाटकीय मोड़ देखने को मिले जिन्हें लंबे समय तक याद रखा जाएगा.

बीबीसी के स्पोर्ट्स प्रोड्यूसर स्टीफेन फॉट्रेल नॉक-आउट दौर के पांच ऐसे ही यादगार पलों के बारे में बता रहे हैं.

ब्राज़ील की शर्मनाक हार

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इस टूर्नामेंट में सबसे खुशी और सबसे हताशा का कोई पल था तो वो था ब्राज़ील की क़रारी हार.

जर्मनी ने ब्राज़ील को 7-1 से हराया और इसके साथ ही मेज़बान टीम इस टूर्नामेंट से बाहर हो गई.

टीम और टीम के समर्थक दोनों ही इस हश्र से सन्न रह गए.

ब्राज़ील के प्रशंसकों को इस बात का डर था कि कहीं उनकी टीम फ़ाइनल से पहले ही बाहर न हो जाए लेकिन उन्हें इतनी अपमानजनक हार की उम्मीद नहीं थी.

अब तक के तमाम फ़ुटबॉल विश्वकप टूर्नामेंट में ब्राज़ील की यह सबसे करारी हार रही.

नए कीर्तिमान बनाते क्लोज़

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जिस मैच में जर्मनी ने 7-1 से हराकर ब्राज़ील को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया, उसमें जर्मन स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज़ ने अपना 16वां गोल दाग़ा.

इसके साथ ही क्लोज़ ने वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल करने के ब्राज़ील के पूर्व स्ट्राइकर रोनाल्डो के कीर्तिमान को ध्वस्त कर दिया.

वह 36 मैचों में 71 गोल कर चुके हैं. चौथा वर्ल्ड कप खेलने वाले क्लोज़ ब्राज़ील के दिग्गज खिलाड़ी पेले और पश्चिमी जर्मनी के ऊवे सीलर के बाद तीसरे खिलाड़ी हैं.

नेमार का चोटिल होना

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ब्राज़ील के लिए ख़तरे के संकेत क्वार्टर फ़ाइनल के बाद तभी मिलने लगे थे जब उसके स्टार खिलाड़ी नेमार घायल हो गए थे.

कोलंबिया के ख़िलाफ़ खेलते हुए नेमार को लगी चोट ब्राज़ील की पूरी टीम पर भारी पड़ी.

इसके अलावा ब्राज़ील के कप्तान थिएगो सिल्वा को निलंबित किया गया जिसका टीम के प्रदर्शन पर असर अगले चार दिनों में नज़र आ गया.

जेम्स रोड्रिग्ज़ का हमलावर अंदाज़

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कोलंबिया के स्ट्राइकर रोड्रिग्ज़ इस विश्वकप में स्टार बनकर उभरे हैं.

ऐसा लगता है कि वह गोल्डन बूट पर नज़र गड़ाकर ही मैदान में उतर रहे थे.

उनके शानदार गोलों की बदौलत ही कोलंबिया की टीम पहली बार टूर्नामेंट में अंतिम आठ टीमों में जगह बना पाई.

टिम क्रुल का कारनामा

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नीदरलैंड्स के गोलकीपर टिम क्रुल ने कोस्टा रिका के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में कमाल का प्रदर्शन किया.

इस विश्वकप में अभी तक सबकी नज़रों से दूर रहे क्रुल को टीम के कोच ने कोस्टा रिका के ख़िलाफ़ क्वार्टर फ़ाइनल में अतिरिक्त समय में मैदान में तब उतारा जब करो या मरो की स्थिति थी.

क्रुल ने भी टीम को निराश नहीं किया और पेनल्टी में कोस्टा रिका के दो ज़बर्दस्त हमलों को नाकाम कर दिया.

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