32 साल बाद भारत को स्वर्ण पदक

  • 3 अगस्त 2014
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भारत के पारुपल्ली कश्यप ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है.

कश्यप ने 32 साल बाद पुरुषों के बैडमिंटन सिंगल्स मुकाबले में स्वर्ण पदक जीता.

1982 के ब्रिस्बेन कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के सैयद मोदी ने बैडमिंटन का स्वर्ण पदक जीता था, सैयद मोदी ने फ़ाइनल में इंग्लैंड के निक येट्स को हराया था.

कश्यप ने फ़ाइनल मुकाबले में सिंगापुर के डेरेक वॉन्ग को फ़ाइनल में 21-14, 11-21, 21-19 से हराया.

हालांकि कश्यप ने पहला गेम आसानी से जीत लिया था.

दूसरे मैच में डेरेक वॉन्ग ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया और उन्हें आसानी से हरा दिया.

लेकिन तीसरे गेम में कश्यप ने ज़ोरदार वापसी की. पहले पिछड़ने के बाद उन्होंने कड़े मुकाबले में वॉन्ग को हरा दिया.

कश्यप और वॉन्ग का फ़ाइनल मुकाबला एक घंटे एक मिनट तक चला.

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जीत से बेहद ख़ुश कश्यप ने स्टेडियम में ही अपनी टीशर्ट निकालकर लहराई और इसके बाद तिरंगा पहनकर बाहर निकले.

भारत के ही गुरुसाइदत्त ने बैडमिंटन सिंगल्स में कांस्य पदक जीता है.

ज्वाला-अश्विनी को रजत

हालांकि भारत की ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी को बैडमिंटन के युगल मुकाबलों में रजत से ही संतोष करना पड़ा.

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इन दोनों को फ़ाइनल में मलेशियाई जोड़ी ने हराया.

ज्वाला और अश्विनी पहला गेम 17-21 से हार गई थीं. हालांकि दोनों दूसरे गेम में आगे थीं लेकिन मलेशियाई खिलाड़ियों ने शानदार वापसी की और 23-21 से मुकाबला जीता.

भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में 64 पदक जीते हैं जिनमें 15 स्वर्ण, 30 रजत और 19 कांस्य पदक शामिल हैं.

भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर और इंग्लैंड 58 स्वर्ण, 57 रजत और 56 कांस्य के साथ पहले स्थान पर है.

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