चमकीले कपड़े लाए जिमनास्टिक में: दीपा

  • 15 अगस्त 2014
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अपने आख़िरी मूव में दीपा ने बार (वॉल्ट) से छलांग लगाई और हवा में तीन कलाबाज़ियां खाते हुए सटीक लैंडिंग की.

उनका ये ज़बरदस्त प्रदर्शन उन्हें ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक दिला गया, जबकि इस आख़िरी मूव से पहले वो बाक़ी प्रतियोगियों से पीछे चल रही थीं. सिर्फ़ 0.1 अंक से वो रजत पदक से चूक गईं.

जिम्नास्टिक जैसा खेल, जिसमें भारत काफ़ी पीछे है उसमें दीपा करमाकर की ये उपलब्धि क़ाबिले-तारीफ़ है.

बीबीसी से ख़ास बात करते हुए दीपा ने कहा, "हमें अगर विदेशी कोरियोग्राफ़ मिल जाए तो भारतीय भी जिमनास्टिक में कमाल कर सकते हैं."

कांस्य पदक जीतने की ख़ुशी होने के साथ-साथ उन्हें रजत गंवाने का ग़म है लेकिन वो मानती हैं कि जिमनास्टिक में बस बाल भर के अंतर से हार और जीत का फ़ैसला होता है.

शुरुआत

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जिमनास्टिक में आने का फ़ैसला उन्होंने क्यों किया इसकी बड़ी दिलचस्प वजह है.

दीपा कहती हैं, "इस खेल में खिलाड़ी बड़े चमकीले, शानदार कपड़े पहनते हैं. मेरी पहली रुचि वहीं से हुई."

त्रिपुरा जैसे छोटे प्रदेश से आईं दीपा मानती हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत में जब वो कैंप आती थीं तो लोगों के बरताव से हैरानी होती थी.

उन्होंने बताया, "लोग मुझे पूछते कि कहां से हो. और त्रिपुरा का नाम सुनकर लोग हैरानी से पूछते कि ये कहां है."

अगला लक्ष्य

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दीपा अपनी उपलब्धि के लिए अपने पिता को श्रेय देती हैं जो एक भारोत्तोलक रह चुके हैं.

दीपा की निगाहें अब दक्षिण कोरिया में होने वाले एशियाई खेलों पर हैं.

हालांकि चीन, जापान और कोरिया के जिमनास्ट से मुक़ाबला करना बेहद मुश्किल रहेगा, लेकिन दीपा का आत्मविश्वास और उत्साह देखकर उनके मेडल लाने के दावे पर यक़ीन करने का मन करता है.

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