रवि शास्त्री बदलेंगे क्रिकेट की तक़दीर?

  • 20 अगस्त 2014
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इंग्लैंड में टेस्ट सिरीज़ में शर्मनाक हार के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पूर्व कप्तान रवि शास्त्री को सोमवार से शुरू होने जा रही एकदिवसीय सिरीज़ के लिए डायरेक्टर नियुक्त किया है.

इस सिरीज़ के लिए पूर्व आलराउंडर संजय बांगड और पूर्व तेज़ गेंदबाज़ भारत अरुण को सहायक कोच के रूप में और आर श्रीधर को फ़ील्डिंग कोच की भूमिका दी गई है.

लेकिन इससे भारतीय क्रिकेट को लेकर उठ सवाल शांत नहीं हुए हैं. खेल के जानकार जहां इस नियुक्ति से हैरान हैं, वहीं उन्हें लगता है कि रातों रात कुछ नहीं बदलने वाला है.

प्रदीप मैगज़ीन, क्रिकेट समीक्षक

रवि शास्त्री कौन सा तीर मार लेंगे, या रातों-रात टीम का प्रदर्शन सुधारने का कौन सा मंत्र दे देंगे. अगर टीम वनडे सिरीज़ में अच्छा खेलेगी तो वह अपने बल बूते पर खेलेगी.

रवि शास्त्री आईसीसी अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के ख़ास आदमी है इसलिए उन्हे यह पद सौंपा गया है, लेकिन वास्तव में यह मज़ाक है.

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भारतीय टीम तो वनडे में वैसे ही दूसरे नंबर की टीम है. बात तो टेस्ट क्रिकेट की होनी चाहिए.

दूसरी बात, क्या बोर्ड की ज़िम्मेदारी नही है कि वह पिछले चार-पांच साल में टीम की हालत की ज़िम्मेदारी ख़ुद ले ना कि कोच को कसूरवार ठहराए जबकि मैदान में तो कप्तान और खिलाड़ी ख़राब या अच्छा खेलते है.

मदन लाल, पूर्व कोच

भारतीय क्रिकेट टीम बुरी तरह टेस्ट सिरीज़ हारी है, ऐसे में बोर्ड की काफ़ी बदनामी हो रही है.

इस बात को दबाने के लिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि देखिए हमने रवि शास्त्री को डायरेक्टर बना दिया है, लेकिन रवि शास्त्री के आने से टेस्ट सिरीज़ के शर्मनाक परिणाम तो नही बदल जाएंगे.

आकाश चोपड़ा, पूर्व क्रिकेटर

क्रिकेट में डायरेक्टर का क्या रोल है, यह तो मुझे भी नहीं पता. क्रिकेट प्रेमी की बात तो छोडिए मैं क्रिकेटर रह चुका हूं, मैंने कभी क्रिकेट डायरेक्टर के साथ काम नही किया.

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Image caption कप्तान धोनी को भी आलोचना झेलनी पड़ रही है

क्रिकेट में हैड कोच, सहायक कोच, फ़ील्डिंग, बैटिंग, गेंदबाज़ी कोच सहायक कोच होते है, लेकिन डायरेक्टर नहीं.

रवि शास्त्री के पास कितनी ताक़त होगी, वह कैसे काम करेंगे, क्या उनके पास कप्तान और कोच को ख़िलाफ वीटो पावर होगी अभी कहना मुश्किल है.

किसी भी चीज़ को बदलने में समय लगता है. चाहे वह रवि शास्त्री हो, संजय बांगड़ हो, भारत अरूण हो या फिर श्रीधर, इन्हें समय देना पडेगा. एक सिरीज़ से किसी भी बदलाव की उम्मीद अभी करना मुश्किल है, यह सोच ग़लत है, यह धारणा जल्दी टूट जाएगी.

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