लॉर्ड्स: भारत का वर्ल्ड कप पकड़ने का रोमांच

Image caption 19 वीं सदी में पारसियों का इंग्लैंड दौरा

लंदन का लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान... इसे यूँ ही 'क्रिकेट का मक्का' नहीं कहा जाता है.

दुनिया का हर खिलाड़ी यहाँ बेहतरीन प्रदर्शन कर अपना नाम दर्ज करवाना चाहता है. इस साल लॉर्ड्स के 200 साल पूरे हुए हैं. यहाँ के म्यूज़ियम में मानो क्रिकेट का इतिहास दर्ज है.

इसी इतिहास को क़रीब से देखने के लिए हम निकले लॉर्ड्स के एक दौरे पर. शुरुआत हुई इंग्लैंड में किसी भारतीय टीम के पहले दौरे से.

पढ़िए लॉर्ड्स पहुंची बीबीसी संवाददाता वंदना का अनुभव

म्यूज़ियम के क्यूरेटर ऐडम चैडविक ने बताया, "हमारे पास शुरुआती सामान पारसी टूयर का है- 1880 के आस पास. हमारे पास मैच बुक्स, स्कोरकार्ड और टीम की फ़ोटो भी है. फिर आते हैं प्रिंस रणजीत सिंह जी जिन्हें अपने समय का महानतम बल्लेबाज़ माना जाता था. वे इंग्लैंड में बेहद मशहूर थे अपने बैटिंग स्टाइल के लिए."

भारत की ट्रॉफ़ी

Image caption भारत की विश्व कप ट्रॉफ़ी

भारत के क्रिकेट फ़ैन्स के लिए और भी कई नायाब चीज़ें लॉर्ड्स में मिलेंगी फिर वो सीके नायडू का साइन किया बैट हो या द्रविड़ का.

और जब मुझसे पूछा गया कि क्या मैं वो वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी देखना चाहूँगी जो भारत ने 1983 में जीती थी तो ज़ाहिर है मैने हाँ कहने में एक सेकेंड भी नहीं लगाया.

सफ़ेद दस्ताने पहन उस ट्रॉफ़ी को हाथ में पकड़ते हुए मैं सिर्फ़ कल्पना ही कर सकती थी कि भारतीय टीम उस समय किस रोमांच से गुज़री होगी.

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Image caption सीके नायडू और द्रविड़ के साइन किए बैट

विश्व विजेता टीम का हिस्सा रहे मदन लाल उस दिन को आज भी याद करते हैं.

मदन लाल कहते हैं, "मुझे याद है जब हम फ़ाइनल मे गेंदबाज़ी कर रहे थे. वेस्ट इंडीज़ का एक व्यक्ति मैदान पर लेट गया था, उसे यक़ीन नहीं हो रहा था कि भारत जीत कैसे गया. लॉर्ड्स का क्राउड और वेस्ट इंडीज़ का क्राउड... इसकी बात ही अलग थी."

इतिहास

1787 में बिज़नेसमैन और क्रिकेटर थॉमस लॉर्ड्स ने लंदन में पहला ग्राउंड शुरु किया.

1811 में इस ग्राउंड को छोड़ लंदन के सेंट वुड्स इलाक़े में मैदान चालू करना पड़ा. 1814 में लॉर्ड्स ग्राउंड को फिर नई जगह शुरु किया गया जो इसकी वर्तमान और तीसरी जगह है.

लॉर्ड्स में हमारी मुलाक़ात मुंबई से आई एक भारतीय दंपत्ति से हुई जिनका कहना था, "यहाँ घूमकर लग रहा है मानो मैं ख़ुद ही क्रिकेट खेल रहा हूँ.''

वहीं दिल्ली से आए एक भारतीय पर्यटक ने बतााया, ''मैं पुरानी यादें ताज़ा करने यहाँ आया था, हमारे दादा (गांगुली) ने यहाँ ख़ूब शतक लगाए हैं."

दूसरे देशों से जुड़ी कई चीज़ें भी लॉर्ड्स में संजो कर रखी गई हैं. एशिज़ का वो कलश हो, पाकिस्तान दौरे की तस्वीरें हों, या शेन वार्न और क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों का सामान हो. यहाँ कई खिलाड़ी आए और गए लेकिन इतिहास में डूबे लॉर्ड्स का गौरव पीढ़ी दर पीढ़ी बरक]रार रहा है- स्थापना के 200 साल बाद भी.

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