सट्टेबाज़ी की जाँच कर रही कमेटी को मिले दो और महीने

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सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कथित सट्टेबाज़ी की जांच कर रही मुदगल कमेटी को अपनी जांच पूरी करने के लिए और दो महीने का समय दिया है.

मुदगल कमेटी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम रिपोर्ट दायर की थी जिसमें जांच पूरी करने के लिए और अधिक समय की मांग की गई थी.

मुदगल कमेटी आईसीसी अध्यक्ष श्रीनिवासन, उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन और आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा समेत 13 लोगों की इसमें कथित भूमिका की जांच कर रही है.

सोमवार को इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की अपील स्वीकार करते हुए उसकी समय सीमा बढ़ा दी.

जानकारों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला श्रीनिवासन के लिए झटका माना जा रहा है. क्योंकि बीसीसीआई के चुनाव सितंबर में होने हैं और श्रीनिवासन के वकीलों ने तर्क दिया था कि चुनावों के देखते हुए श्रीनिवासन को बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर बहाल किया जाए.

तर्क ख़ारिज़

याचिकाकर्ता और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े आदित्य वर्मा ने बताया, "सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन के वकील के तर्कों को ख़ारिज़ करते हुए कहा कि रिपोर्ट बंद लिफाफे में है, इसलिए अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकती."

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सुप्रीम कोर्ट में इस पर अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी.

बीसीसीआई के चुनाव सितंबर में होने वाले हैं और श्रीनिवासन का एक साल का एक्सटेंशन समाप्त हो जाएगा.

बीसीसीआई संविधान के अनुसार श्रीनिवासन अगले अध्यक्ष तभी बन सकते हैं जब उन्हें वो ज़ोन मनोनीत करे जिसकी इस बार अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार खड़ा करने की बारी है.

इस बार पूर्वी ज़ोन को अध्यक्ष मनोनीत करना है. लेकिन श्रीनिवासन तभी मनोनीत हो सकते हैं जब सुप्रीम कोर्ट उन्हें इस बात की इजाज़त दे.

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