एशियाई खेल: भारतीय मुक्कों का कितना दम

  • 17 सितंबर 2014
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दक्षिण कोरिया के इंचियोन शहर में होने जा रहे एशियाई खेलों भारतीय मुक्केबाज़ों की चुनौती को दमदार माना जा रहा है.

चीन के ग्वांग्ज़ू में पिछले एशियाई खेलों में भारत ने दो स्वर्ण, तीन रजत और और चार कांस्य पदक सहित नौ पदक अपनी झोली में डाले थे और भारत मुक्केबाज़ी की पदक तालिका में दूसरे स्थान पर रहा था.

भारत को बीजिंग ओलंपिक खेलों के कांस्य पदक दिलाने वाले मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह और विकास कुमार यादव ने पिछले एशियाई खेलों में स्वर्णिम कामयाबी दिलाई थी.

इस बार कलाई में चोट के कारण विजेंदर सिंह इंचियोन नहीं जा रहे हैं. उन जैसे अनुभवी मुक्केबाज़ की कमी भारत को खल सकती हैं.

उनकी कमी को एक और अनुभवी मुक्केबाज़ अखिल कुमार पूरी करने की कोशिश करेंगे. उनके अलावा इस बार पुरूष टीम में देवेंद्रो सिंह, गौरव विधूडी, शिवा थापा, मनोज कुमार, मंदीप जांगड़ा, विकास कृष्ण यादव, कुलदीप सिंह, अमृतप्रीत सिंह, सतीश कुमार भारत का प्रतिनिधत्व करेंगे.

महिला वर्ग में लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता एमसी मेरी कॉम, एल सरिता देवी और पूजा रानी भी अपना दमख़म दिखाएंगी.

कितना चलेगा जादू

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Image caption मणिपुर के देवेंद्रो भी भारत की ओर से चुनौती पेश करेंगे

अखिल कुमार साल 2006 में मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. उनका मानना हैं कि सबकी कोशिश पुराने प्रदर्शन से बेहतर करने की होगी.

वहीं शिव थापा भारत के ऐसे मुक्केबाज़ हैं जिन्होंने साल 2012 में एशियन ओलंपिक क्वॉलिफायर में स्वर्ण पदक जीतकर लंदन ओलंपिक के लिए जगह बनाई थी. ऐसा कारनामा करने वाले वह सबसे युवा मुक्केबाज़ थे.

विकास कृष्ण यादव तो पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत ही चुके हैं. वह खब्बू मुक्केबाज़ हैं. उनके अलावा मनोज कुमार दिल्ली में साल 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

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Image caption नेपाली मूल के शिव थापा असम से हैं

मंदीप जांगड़ा भी हालिया ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीकर कामयाबी का स्वाद चख चुके हैं.

महिला मुक्केबाज़ भी एशियाई खेलों में दमख़म दिखाने में पीछे नही रही हैं. पिछली बार एमसी मेरी कॉम और कविता गोयत ने कांस्य पदक जीता था. इस बार सरीता देवी भी पदक की दावेदार हैं.

Image caption इंचियोन में 17 सितंबर से एशियाई खेल शुरू हो रहे हैं

उन्होंने पिछले ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता हैं.

इन पुरूष और महिला मुक्केबाज़ों के पास अनुभव और कामयाबी की कोई कमी नही हैं, देखना हैं कोरिया में इनका जादू कैसा चलता हैं?

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