नए नहीं हैं बॉक्सिंग में बेईमानी के आरोप

  • 1 अक्तूबर 2014
इंचियोन में भारतीय बॉक्सर एल सरिता देवी अपनी दक्षिण कोरियाई प्रतिद्वंदी पार्क जी-ना (लाल रंग के ड्रेस में) के साथ. इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption इंचियोन में भारतीय बॉक्सर एल सरिता देवी अपनी दक्षिण कोरियाई प्रतिद्वंदी पार्क जी-ना (लाल रंग के ड्रेस में) के साथ.

इंचियोन में जो कुछ महिला मुक्केबाज़ एल सरिता देवी के साथ हुआ वो ना तो भारत के लिए नया है और ना ही खेलों पर पैनी नज़र रखने वालों के लिए.

ख़ास तौर पर बॉक्सिंग के खेल पर. अफ़सोस इस बात का है कि बेईमानी छोटे स्तर पर कम और बड़े स्तर पर ज़्यादा होती है.

और कोरिया में यह कोई पहला मौका नहीं है.

यहां इंचियोन में कोरिया टीम के कोच पार्क सी हुन खुद अपना ओलंपिक गोल्ड विवादास्पद तरीके से ही जीते थे.

और मज़े के बात यह है कि पार्क ने वो पदक कोरिया में ही 1988 के सोल ओलंपिक में जीता था.

बदलाव

इमेज कॉपीरइट AFP

पार्क ने अमरीकी बॉक्सर रॉय जोंस के खिलाफ मुकाबला 3-2 से जीता था और क्योंकि पार्क को मालूम था कि असली विजेता वो नहीं बल्कि अमरीकी बॉक्सर हैं तो करीब दो साल बाद पार्क ने जोंस से माफी मांग ली थी.

इस मामले में मुकाबले के तीन जज में से एक को खेलों से आजीवन बाहर कर दिया गया था.

और इस विवाद के बाद ही बॉक्सिंग में स्कोरिंग के तरीके में बदलाव लाया गया. लेकिन स्थिति आज भी वही है.

इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग के भूतपूर्व अध्यक्ष पाकिस्तान के अनवर चौधरी पर भी आरोप लगते रहे थे.

मेडल

इमेज कॉपीरइट AFP

चौधरी पर आरोप लगे कि उन्होंने एक पाकिस्तानी बॉक्सर को ओलंपिक पदक दिलवा दिया था. बाद में उन पर गबन के आरोप भी साबित हुए.

सिडनी ओलंपिक खेलों में भारत के गुरचरण सिंह को भी इसी तरह हरा कर मेडल से वंचित रखा गया था.

बुरी तरह टूट जाने के बाद गुरचरण ने तो वही सिडनी में ही रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी. और बॉक्सिंग से संन्यास लेकर वो अमरीका चले गए थे.

हालांकि सरिता देवी ने अभी रिटायरमेंट की घोषणा तो नहीं की है लेकिन मेडल न लेकर उन्होंने विवाद को नया तूल ज़रूर दे दिया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार