'दुख साथ नहीं लाना चाहती थीं' सरिता

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भारतीय मुक्केबाज़ एल सरिता देवी ने बीबीसी को बताया है कि वो अपना दुख कोरिया से भारत नहीं ले जाना चाहती थीं, यही वजह है कि उन्होंने पदक लेने से मना कर दिया.

दक्षिण कोरिया के इंचियोन में एशियाई खेलों में महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में सरिता देवी को कांस्य पदक मिला था जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया.

सरिता देवी सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी पार्क जीना के हाथों विवादित तरीके से हार गई थीं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''मेरे दिल में जो दुख है, मैं उसे कोरिया में ही छोड़कर जाना चाहती हूं. मेरे साथ जो हुआ है, अच्छा नहीं हुआ है.''

उनका कहना है, ''मैं कई मेडल हासिल कर चुकी हूं, एशिया में पांच बार चैम्पियन रही हूं, ये मेडल मेरे लिए नहीं था, इसलिए मैंने अपना मेडल कोरिया को उपहार में दे दिया है.''

'प्रतिबंधों की परवाह नहीं'

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Image caption सरिता देवी का कहना है कि वे ख़ुश हैं और घर जाकर आराम से सोना चाहती हैं

ये सब कुछ अचानक हुआ या आपने इस बारे में पहले से सोच रखा था, इस सवाल पर सरिता देवी कहती हैं, ''मैंने इसकी कोई योजना नहीं बनाई थी, जब मुझे पदक दिया जा रहा था, तभी मेरे मन में ये ख्याल आया.''

पदक नहीं लेने पर संभावित प्रतिबंधों के बारे में पूछे जाने पर वे कहती हैं, ''मुझे प्रतिबंधों की कोई चिंता नहीं है.''

सरिता देवी ने इस बात पर भी अफ़सोस जताता कि ''भारतीय दल से किसी अधिकारी ने आकर मेरी हिम्मत नहीं बढ़ाई.''

सरिता देवी के पदक मामले में भारत की स्टार मुक्केबाज़ मैरी कॉम का कहना है, ''हम जानते हैं कि वास्तव में जीता कौन था इसलिए हम फ़ैसले से हैरान हैं. उम्मीद है कि अगली बार सरिता बेहतर प्रदर्शन करेंगी.''

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