ये 'ब्लैकमेलिंग' तो ठीक नहीं!

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वेस्टइंडीज़ टीम भारत दौरा बीच में ही छोड़कर लौट रही है. वजह है बोर्ड के साथ पैसे को लेकर विवाद. लेकिन खिलाड़ियों की इस 'ब्लैकमेलिंग' को क्रिकेट के लिए ठीक नहीं माना जा रहा है.

धर्मशाला में चौथा वनडे मुक़ाबला शुरू होने से पहले ही एक गहरे विवाद का साया पड़ चुका था, जिसने वेस्टइंडीज़ क्रिकेट की छवि को तार-तार कर दिया.

विवाद का साया

क्रिकेट बोर्ड से पैसे के विवाद को लेकर वेस्टइंडीज़ की पूरी टीम कप्तान ड्वेन ब्रावो के साथ थी और उन्होंने भारत दौरा बीच में ही छोड़कर वापस लौटने का फ़ैसला किया. उन्हें पांचवां एकदिवसीय, एक ट्वेंटी-20 और तीन टेस्ट मैच खेलने थे.

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ख़बरें आ रही थी कि वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों की वनडे, ट्वेंटी-20 और टेस्ट मैच की फ़ीस 75 प्रतिशत कम करने का फ़ैसला किया था.

ख़बरें तो ये भी हैं कि वेस्टइंडीज़ की टीम धर्मशाला में भी मैदान में उतरना नहीं चाहती थी, पर हिमाचल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने उन्हें समझाया तब जाकर वह खेलने को तैयार हुई.

वैसे भी वेस्टइंडीज़ के कई खिलाड़ी आईपीएल में खेलते हैं और वो बीसीसीआई के संयुक्त सचिव अनुराग ठाकुर को नाराज़ नहीं कर सकते थे.

पैसा सब कुछ

भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन का मानना है कि क्रिकेट के लिए यह ठीक नहीं है. पैसे का मसला वेस्टइंडीज़ बोर्ड के लिए नया नहीं, क्योंकि उसके पास पैसा नहीं है.

वहां कई द्वीप आपस में मिलकर वेस्टइंडीज़ टीम के रूप में खेलते हैं.

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Image caption विराट कोहली का बल्ला धर्मशाला में खूब चला और उन्होंने वनडे करियर का 20वां शतक जमाया

वेस्टइंडीज़ के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले अधिकतर खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने के अधिक पैसे मिलते है. ऐसे में उन्हें लगता है कि बोर्ड उनका इस्तेमाल कर रहा है.

दूसरी तरफ, जाने-माने क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन का मानना है कि बीसीसीआई का श्रीलंका को पांच एकदिवसीय मैचों के लिए बुलाने का फ़ैसला भी क्रिकेटप्रेमियों को लुभाने के लिए नहीं हैं, बल्कि उन्होंने टेलीविज़न कंपनियों को इतने अधिक दिनों के अधिकार दिए हुए हैं कि उसकी भरपाई के लिए ऐसा किया गया है.

वेस्टइंडीज़ के खिलाड़ियों के इस क़दम को कोई भले ही ब्लैकमेलिंग कहे, लेकिन आख़िरकार अब पैसा ही तो सब कुछ है.

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