मिलिए पाकिस्तानी 'सचिन' से

  • 16 नवंबर 2014
सचिन तेंदुलकर, अंजलि तेंदुलकर इमेज कॉपीरइट AFP

सचिन सुनते ही दिमाग़ में क्रिकेट, बल्ला और घुंघराले बालों वाला एक चेहरा याद आता है.

पर असल में जिस सचिन की बात यहां हो रही है वो है 'सचिन' नाम की हॉकी स्टिक. ये हॉकी एक ख़ास हॉकी है जिसका निर्यात पाकिस्तान से होता है.

भारत में पाकिस्तान से आई इस सचिन नाम की हॉकी स्टिक की ख़ास बात है कि ये लकड़ी की नहीं बल्कि विमानों में लगने वाले फ़ाइबर की बनी है.

पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि भारत के युवा हॉकी खिलाड़ियों में भी इसकी ख़ूब मांग है.

कैसे पड़ा नाम?

पंजाब के जालंधर में फ़ुटबॉल चौक पर खेल के सामान का बड़ा बाज़ार है. जहां किसी भी खेल से जुड़ा सामान ख़रीदा जा सकता है.

यहाँ स्थित एक दुकान पर सचिन नाम की ये पाकिस्तानी हॉकी स्टिक मिलती है.

दुकान के मालिक वीरेंद्र शर्मा ने हमें बताया, "इस स्टिक के निर्माता पाकिस्तान में बसे रतन लाल हैं. उन्होंने अपने बेटे सचिन के नाम पर इस ब्रांड को रजिस्टर कराया है. इसका हमारे सचिन तेंदुलकर से कोई लेना देना नहीं है."

वीरेंद्र शर्मा सचिन की ख़ासियत के बारे में बताते हैं कि ये कार्बन फाइबर की बनी होती है और खिलाड़ी जैसा चाहे उस मोल्ड में इसे डिज़ाइन करा सकता है.

दावा

वीरेंद्र शर्मा दावा करते हैं कि इससे ड्रैग और फ़्लिक करने में बड़ी आसानी होती है. पाकिस्तान के सियालकोट में हॉकी स्टिक बनाने के बड़े कारख़ाने हैं.

पंजाब के स्थानीय हॉकी खिलाड़ी वरुण शर्मा कहते हैं, "पाकिस्तान हमारा चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हम वहां बने सामान का भी इस्तेमाल नहीं करेंगे. हम सचिन हॉकी से ही खेलते हैं."

बाज़ार में ये स्टिक एक हज़ार से छह हज़ार रुपए तक में मिल जाती है.

और हां, कंपनी अपनी इस हॉकी को किसी खिलाड़ी को मुफ़्त में नहीं देती और ना ही ये किसी खिलाड़ी को स्पांसर (प्रायोजित) करती है.

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