जब खून में नहाए भारतीय क्रिकेटर

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ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ फ़िल हयूज़ और फिर इसराइल क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और अंतरराष्ट्रीय अंपायर हिलेल ऑस्कर की बाउंसर से मौत हो गई.

इन घटनाओं से भारत और वेस्टइंड़ीज के बीच 1975-76 में खेले गए एक खूनी टेस्ट मैच की याद ताज़ा हो गई.

यह उस सिरीज़ का चौथा टेस्ट मैच था जो जमैका में खेला गया.

आदेश गुप्त की रिपोर्ट

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दरअसल भारत ने इससे पहले पोर्ट ऑफ़ स्पेन ने वेस्टइंड़ीज को जीत के लिए 403 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दूसरे टेस्ट मैच में हराया था. तीसरा टेस्ट मैच भी ड्रॉ रहा.

हार से गुस्साए वेस्टइंड़ीज़ के कप्तान क्लाइव लॉयड ने अपने तेज़ गेंदबाज़ो माइकल होल्डिंग, वॉयने डेनियल, बर्नार्ड जूलियन और वैनबर्न होल्डर को भारतीय बल्लेबाज़ो की बाउंसर और बीमर से ख़बर लेने को कहा.

बाउंसर फैंकने का सिलसिला होल्डिंग ने शुरू किया जो गायकवाड़ पर हर ओवर में तीन बाउंसर कर रहे थे और उनकी अगुवाई में सुनील गावस्कर पर चार बाउंसर और एक बीमर किया जा रहा था.

दर्शकों का शोर

Image caption माइकल होल्डिंग.

उस मैच में विकेटकीपर बल्लेबाज़ सैयद किरमानी ने बताया कि हर बाउंसर के साथ दर्शक चिल्लाते थे. किल हिम! इन्हें मार डालो, हिट हिम, इनके सिर पर मारो. जब भी बल्लेबाज़ को गेंद लगती वह बीयर केन के साथ उछलते, खुशी मनाते.

गेंदबाज़ राउंड द विकेट गेंदबाज़ी करते हुए कई गेंदे गायकवाड़ के कंधे और सीने पर मार चुके थे.

इसके बाद जूलियन की एक गेंद पर विश्वनाथ की एक अंगुली टूट गई. लंबे संघर्ष के बाद अंततः गायकवाड़ के उलटे कान के पास गेंद लगी वह लहूलुहान होकर विकेट पर गिरे और अस्पताल ले जाए गये.

वेस्टइंडीज़ का कहर

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Image caption क्लाइव लॉयड.

इसके बाद ब्रजेश पटेल को होल्डर का बाउंसर लगा जो सीधा उनके मुंह पर लगा. इस पूरे मैच में भारत ने पहली पारी में छह विकेट गवाएं जबकि दूसरी पारी में केवल पांच.

इसके बावजूद भारत 10 विकेट से हारा क्योंकि पिच भारतीय खिलाड़ियों के ख़ून में रंगी थी.

दूसरी पारी में तो भारत का यह हाल था कि अंशुमान गायकवाड़, गुंडप्पा विश्वनाथ और ब्रजेश पटेल तो बल्लेबाज़ी करने के लिए मैदान में नहीं उतरे.

जब भारत को स्कोर पांच विकेट पर 97 रन था तब कप्तान बिशन सिंह बेदी ना तो ख़ुद मैदान पर उतरे और ना ही उन्होने चंद्रशेखर को बल्लेबाज़ी करने भेजा. यह था वेस्टइंड़ीज़ की चौकड़ी का कहर.

तेज विकेट

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उस टेस्ट मैच में पूर्व ऑलराउंडर मदन लाल भी मौजूद थे जो अपने करियर में पहली और आखिरी बार नंबर चार पर खेले.

मदन लाल कहते हैं कि तब ड्रेसिंग रूम में ख़ौफ छाया था. विकेट भी बेहद तेज़ थी. भारत को हिलाने का शायद यही हथियार उनके पास था. तब तक क्रिकेट में हेलमेट नहीं आया था.

उस टेस्ट मैच में मोहिंदर अमरनाथ और दिलीप वैंगसरकर ने भी कई बाउंसर अपने शरीर पर झेले. इसके बाद वेस्टइंडीज ने तेज़ गेंदबाज़ी के दम पर ही 19 साल क्रिकेट पर एकछत्र राज किया.

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