चैंपियंस ट्रॉफ़ीः घर में अग्नि परीक्षा

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शनिवार से भारत में चैंपियंस ट्रॉफ़ी टूर्नामेंट शुरू हो रहा है जिसे भारतीय हॉकी टीम के लिए कड़ी परीक्षा कहा जा सकता है.

इसमें कुल आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं जिनमें पूल-ए में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, इंग्लैंड और पाकिस्तान हैं जबकि पूल-बी में मेजबान भारत के अलावा नीदरलैंड्स, जर्मनी और अर्जेंटीना शामिल हैं.

भारत का पहला मुक़ाबला शनिवार को भुवनेश्वर में जर्मनी से होगी.

टूर्नामेंट में भारत की कमान अनुभवी सरदार सिंह संभाल रहे हैं. उनकी कप्तानी में भारत ने पिछले दिनों विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर 3-1 से टेस्ट सिरीज़ जीती थी.

सरदार सिंह की कप्तानी में ही भारत ने एशियाड में 16 साल बाद स्वर्ण पदक जीता था. टीम राष्ट्रमंडल खेलों के फ़ाइनल तक भी पहुंची थी जहां उसे ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा.

अनुभव का लाभ

Image caption गोलकीपर पी श्रीजेश का कहना है कि अब अलग शैली में हॉकी खेलनी होगी.

भारतीय टीम में सरदार सिंह के बाद सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी गोलकीपर पी श्रीजेश हैं. एशियाई खेलों के फ़ाइनल में उन्होंने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टाईब्रेकर में अपना हुनर दिखाया था.

श्रीजेश मानते हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी में विश्व की शीर्ष टीमें आ रही हैं. इसमें भारत के अलावा एशिया की केवल एक और टीम पाकिस्तान ही है.

बाकी टीमों के ख़िलाफ़ भारतीय खिलाड़ियों को अलग मनोविज्ञान के साथ खेलना होगा.

चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंडस, जर्मनी और हॉलैंड बेहद तेज़ और आक्रामक हॉकी खेलेंगे. यह बिलकुल अलग तरह का अनुभव होगा.

सरदार सिंह का मानना है कि हर टीम के ख़िलाफ अलग रणनीति के साथ खेलना होगा.

वह कहते हैं कि बीते ऑस्ट्रेलियाई दौरे में टीम के खिलाड़ियों ने शानदार जीत हासिल की थी. उस अनुभव का लाभ मिलेगा.

कोच की परीक्षा

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Image caption वॉल्श के इस्तीफ़े के बाद भारतीय टीम के भविष्य पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

भारतीय टीम के मुख्य कोच टेरी वाल्श हॉकी इंडिया से वेतन विवाद के कारण अपना पद छोडकर वापस ऑस्ट्रेलिया लौट चुके हैं.

ऐसे में टीम के वर्तमान कोच और पूर्व ओलंपियन एमके कौशिक की भी परीक्षा है.

उनका मानना है कि चैंपियंस ट्रॉफी में अधिकतर टीमें आगामी टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए युवा खिलाड़ियों को अवसर देती है. ऐसे में भारतीय टीम पर कम दबाव होगा.

चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन पहली बार साल 1978 में पाकिस्तान में हुआ था. ऑस्ट्रेलिया पिछले पांच बार से इस टूर्नामेंट का चैंपियन है.

भारत केवल एक बार 1982 में कांस्य पदक जीत सका था. देखना है कि इस बार टीम अपने ही घर में कैसा खेलती है.

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