क्रिकेट में बना रहे बाउंसर!

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ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ फ़िल ह्यूज़ की बाउंसर लगने के बाद हुई मौत से क्रिकेट की दुनिया में यह बहस तेज़ हो गई कि क्या अब बाउंसर पर रोक लगा देनी चाहिए.

क्या इसका समाधान यह है कि टेस्ट क्रिकेट में इनकी संख्या घटाकर प्रति ओवर एक कर देनी चाहिए.

इसी मुद्दे को शनिवार को बीबीसी ने अपने साप्ताहिक कार्यक्रम इंडिया बोल में बहस का केन्द्र बनाया.

इस बहस में शामिल हुए जाने-माने क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली और बीबीसी के श्रोता.

लंबी सूची

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इस बहस से यह बात निकलकर सामने आई कि क्रिकेट हो या दूसरे खेल इनमें हादसे होते रहते हैं.

मगर खेलों की मूलभूत बातों को अलग किया गया तो शायद इन खेलों का वजूद और लोकप्रियता ऐसी नहीं रहेगी जैसी अब है.

क्रिकेट के मैदान पर बाउंसर लगने से घायल होने वाले बल्लेबाज़ों की लंबी सूची है.

इनमें भारत के नरी कांट्रेक्टर, अंशुमान गायकवाड़, मोहिंदर अमरनाथ, संदीप पाटिल, आस्ट्रेलिया के रिक डार्लिंग, रिक मैकॉस्कर, श्रीलंका के दिलीप मेंडिस और ना जाने दुनिया के कितने खिलाड़ी.

कई सवाल

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कहा तो यह भी जाता है कि दुनिया के महान सलामी बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर और वेस्टइंडीज़ के धाकड़ बल्लेबाज़ विवियन रिचर्ड्स ने कभी हेलमेट नहीं पहना.

उन्हें कभी बाउंसर भी नहीं लगा. हालांकि इससे ठीक अलग विजय लोकपल्ली ने कहा कि एक बार भारत के पूर्व कप्तान रवि शास्त्री ने बातों-बातों में बताया था कि गावस्कर को एक बार वेस्ट इंडीज में मार्शल का बाउंसर लगा था.

तब ड्रेसिंग रूम से सभी घबरा गए कि अब क्या होगा. गावस्कर विकेट पर रुके और दोबारा स्टांस लेकर खेलना शुरू किया और मार्शल की अगली ही गेंद पर शानदार स्ट्रेट ड्राइव किया.

मुख्य उद्देश्य

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Image caption वेस्ट इंडीज़ के पूर्व कप्तान क्लाइव लॉयड.

आख़िरकार क्यों बाउंसर किए जाते हैं. क्या बाउंसर करना ज़रूरी ही है, चाहे किसी की जान ही क्यों न चली जाए. और सवाल ये भी है कि एक ओवर में कितने बाउंसर हों.

ऐसे सवालों के जवाब में लोकपल्ली ने कहा कि साल 1976 में वेस्ट इंडीज़ के कप्तान क्लाइव लॉयड का इरादा यक़ीनन भारतीय बल्लेबाज़ों को घायल करना था.

तब उनकी कप्तानी दांव पर थी. उसके अलावा तो गेंदबाज़ों का मुख्य उद्देश्य बल्लेबाज़ की एकाग्रता को तोड़ना होता है.

जैफ़ टॉमसन, डेनिस लिली और दूसरे तेज़ गेंदबाज़ों का हथियार बाउंसर ही था.

अगर बाउंसर को समाप्त करना है तो फिर मैदान में गेंदबाज़ी मशीन लगा देनी चाहिए.

हेलमेट की क्वालिटी

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अगर बाउंसर को रोकना है तो बल्लेबाज़ को भी कहना होगा कि वह सिर्फ़ सामने खेले.

अगर श्रोताओं की बात करें तो मोहम्मद महबूब खान, बहादुर खान, जयेश धनकीजा, मनिंदर सिंह, सुमित और बदरुद्दीन की भी यही राय थी कि जो हुआ वह दुर्घटना थी.

बाउंसर तेज़ गेंदबाज़ी की जान और शान है. हेलमेट की क्वालिटी में सुधार होना चाहिए.

अब यह बहस तो चलती रहेगी और खेल भी, पर किसी खिलाड़ी की जान ना जाए तो अच्छा है.

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