कैसे कश्मीर ने मुंबई को धूल चटाई

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मुंबई के वानखेड़े मैदान पर तीन दिन पहले खेले गए रणजी ट्राफ़ी मैच में जम्मू-कश्मीर की टीम ने 40 बार की विजेता मुंबई टीम को धूल चटा दी. 80 साल में यह पहला मौक़ा था जब दोनों टीमें आमने-सामने थीं.

परवेज़ रसूल जम्मू कश्मीर टीम के कप्तान हैं.

परवेज़ रसूल के मुताबिक़ काफ़ी मुश्किलों के बावजूद उनकी टीम मुंबई को हराने में कामयाब हो पाई.

कप्तान का कहना है कि सितंबर में कश्मीर में बाढ़ के दौरान उनकी टीम की प्रैक्टिस चल रही था. बाढ़ के बाद एक महीने तक टीम के खिलाड़ी कुछ नहीं कर सके.

परवेज़ कहते हैं, "सितंबर में हमारी टीम इस जीत के लिए तैयारी कर रही थी कि अचानक बाढ़ आई जिसके बाद हम कश्मीर में कुछ नहीं कर सके. मेरी टीम के खिलाड़ियों की क्षमता ने हमारे लिए जीत का दरवाज़ा खोला."

बाढ़ के बाद परवेज़ की टीम ने चंडीगढ़ और नागपुर में एक महीने तक तैयारी की. अपनी जीत के लिए वह कोच सुनील जोशी को भी क्रेडिट देते हैं.

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परवेज़ मानते हैं कि राज्य में क्रिकेट की बेहतर सुविधाएं न होने के बावजूद उनकी टीम अच्छा खेल रही है.

क्रिकेट अकादमी चाहिए

परवेज़ मुंबई टीम को हराने के पीछे मेहनत और लगन के अलावा सही सोच का होना मानते हैं. वह कहते हैं, "मुंबई जैसी टीम को हराना कोई आसान बात नहीं थी पर कुछ करने की ललक ने यहां तक पहुंचाया."

मगर परवेज़ को शिकायत है कि उनके राज्य में एक भी क्रिकेट अकादमी नहीं है.

"हमारे यहां खिलाड़ियों में इतना हुनर होने के बावजूद यहां आज तक क्रिकेट अकादमी नहीं खोली गई है. मुझे राज्य के क्रिकेटर फ़ोन करते हैं कि दूसरे राज्यों की तरह हमारे लिए भी क्रिकेट अकादमी होनी चाहिए."

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अपनी टीम के खिलाड़ियों पर परवेज़ को इसलिए भी काफ़ी फ़ख़्र है कि उनके पास कुछ न होने के बावजूद वह बहुत कुछ कर रहे हैं.

वह कहते हैं, "मेरी टीम के खिलाड़ियों का ऐसे क्रिकेटर्स से सामना हो रहा है जो साल भर अच्छी सुविधाओं के साथ ख़ुद को तैयार करते हैं. हमारे यहां क्रिकेट मैदानों में मैटिंग तक नहीं है, लेकिन जब तक मेरी टीम में उम्र मजीद और खुजोरिया जैसे खिलाड़ी हैं कामयाबी हमारे क़दम चूमती रहेगी."

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